चल छोड़ दे रोना तू जरा मुस्कुरा दे – जिंदगी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरणादायक कविता

परेशानियाँ किसके जीवन में नहीं आती? सबके जीवन में आती हैं, सब परेशान होते हैं। कुछ लोग इसके लिए तैयार रहते हैं और इसका सामना कर अपनी उदास-बेरंग दुनिया में खुशियों के रंग भर देते हैं। वहीं कुछ लोग ऐसी परिस्थितियों में हौसला छोड़ देते हैं और अपनी हालत को किस्मत के भरोसे छोड़ देते हैं। उन्हें लगता है कि वो हार गए हैं लेकिन हार उनकी नहीं होती जो किसी कराया में असफल हो जाएँ। हारते तो वो लोग हैं जो दुबारा प्रयास नहीं करते। खुशियों का कोई शॉर्टकट नहीं होता। इसलिए अपने प्रयासों को और बढाइये। और इसकी शुरुआत होती है एक मुस्कराहट से। अब आप मुस्कुरा देते हैं तो कई अद्भुत शक्तियां आपके अन्दर आ जाती हैं और आपको सकारात्मक होकर आपने ईवन में आगे बढ़ने लगते हैं। बस उसी परिस्थिति को कविता के रूप में प्रस्तुत करने जा रहा हूँ कविता :- ‘ चल छोड़ दे रोना तू जरा मुस्कुरा दे ‘

चल छोड़ दे रोना तू जरा मुस्कुरा दे

चल छोड़ दे रोना तू जरा मुस्कुरा दे

चल छोड़ दे रोना तू जरा मुस्कुरा दे
न रुकना राहों में तू कदम बढ़ा दे,
मुश्किलों का है जो तूफ़ान उसको हरा दे,
दिखा दे दुनिया को तू है क्या?
अपनी पहचान से वाकिफ करा दे,
चल छोड़ दे रोना तू जरा मुस्कुरा दे।

ये जीवन भी खेल ही है तो है
क्यों हार मानें?
हम भी हटें ऐसे कैसे जिद हैं ठाने,
जब तक न जीतेंगे मैदान न छोड़ेंगे,
हम तो भरम सब लोगों के अब तोड़ेंगे,
लाज शर्म के परदे अब तू गिरा दे,
चल छोड़ दे रोना तू जरा मुस्कुरा दे।

गिर जो गया तो बात क्या? कोशिश है जारी
आज नहीं तो कल को होगी अपनी भी बारी
पा लेंगे मंजिल अपनी आसमान छू लेंगे
एक नई मिसाल हम इस जग को देंगे,
बस हौसलों की लौ तू अब जला ले
चल छोड़ दे रोना तू जरा मुस्कुरा दे।

जिन्दा तो है सारी दुनिया
तुझे जिंदगी जीनी है,
दिखा दे दुनिया को कैसे
किस्मत से खुशियाँ छीनी हैं,
रच दे अब इतिहास नया सबको अपना बना ले
चल छोड़ दे रोना तू जरा मुस्कुरा दे।

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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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