हिन्दी प्रेरक कविता :- पड़ती है जब कठिनाई | Hindi Prerak Kavita

कभी-कभी इंसान के जीवन में ऐसा समय आता है जब वो मुश्किल में होता है। उसे किसी की सहायता की जरूरत होती है। लेकिन ऐसे ही समय में सब उसका साथ छोड़ देते हैं। ऐसे में कई बार कुछ लोग मानसिक तौर पर टूट जाते हैं। इससे उनकी स्थिति और भी ख़राब हो जाती है। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि रात के बाद जिस तरह सुबह आती है उसी तरह दुख के बाद सुख आता है। हमें हार ना मानते हुए बस डटे रहना है। समय बदलेगा तो खुशियाँ खुद दरवाजे पर दस्तक देंगी। आइये पढ़ते है ऐसी ही प्रेरणा देती यह हिन्दी प्रेरक कविता ” पड़ती है जब कठिनाई ”

हिन्दी प्रेरक कविता

हिन्दी प्रेरक कविता

दर-दर भटक-भटक कर मैंने
जीवन सीख यही पाई,
साथ छोड़ते संकट में सब
पड़ती है जब कठिनाई।

स्वयं भाग्य से लड़ना होगा
वीर तुझे बनना होगा
विजय हाथ में आएगी बस
धीर तुझे बनना होगा,
दुख आया, सुख भी आएगा
ध्यान रखो मेरे भाई
साथ छोड़ते संकट में सब
पड़ती है जब कठिनाई।

हाथ मिलाकर चलने वाले
हाथ जोड़कर जाते हैं
कितने भी अपने हों सब
साथ छोड़कर जाते हैं,
कहने को सब अपने हैं पर
पड़े ना कोई दिखाई
साथ छोड़ते संकट में सब
पड़ती है जब कठिनाई।

रख संयम इस अंधकार में
पग-पग बढ़ते जाना है
भोर नहीं जब तक हो साथी
गीत यही बस गाना है,
डटा रहे जो वही विजेता
यही जगत की सच्चाई
साथ छोड़ते संकट में सब
पड़ती है जब कठिनाई।

दर-दर भटक-भटक कर मैंने
जीवन सीख यही पाई,
साथ छोड़ते संकट में सब
पड़ती है जब कठिनाई।

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पड़ती है जब कठिनाई | जीवन की सच्चाई बताती प्रेरणादायक कविता | Inspirational Poem

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