एकाग्रता मंत्र कहानी :- एकाग्रता का रहस्य | एकाग्रता पर कहानी

एकाग्रता मंत्र कहानी है उन लोगों के लिए। जो काम न कर पाने के लिए बहुत से बनाते हैं। जो कहते हैं कि उनके आस-पास का वातावरण ऐसा नहीं है कि वो एकाग्रचित होकर अपना काम कर सकें। क्या सच-मुच समस्या उनके आस-पास के वातावरण में है या उनमें खुद में। आइये जानते हैं कहानी “ एकाग्रता मंत्र ” के जरिये :-

एकाग्रता मंत्र कहानी

एकाग्रता मंत्र कहानी

रिधिमा बहुत ही धार्मिक प्रवृत्ति की लड़की थी। पढ़ने में भी अच्छी थी और घर के सरे काम-काज भी अच्छे से कर लेती थी। आम तौर पर लड़कियों की माँ के साथ खूब बनती है लेकिन रिधिमा की अपने पापा के साथ बनती थी। उसे जब भी कोई भी परेशानी होती या कोई ख़ुशी की बात बतानी होती तो वो अपने पापा को ही पहले बताती थी।

वह हर सुबह उठ कर नहा-धो कर वह सबसे पहले घर के पास वाले मंदिर जाती और कुछ देर बैठ कर वहीं पाठ-पूजा करती। उसके बाद स्कूल जाती। लेकिन पिछले कुछ दिनों से वह जब भी मंदिर जाती तो वहां बैठी तो औरतें अपसा में सबकी चुगली किया करती। जिसकी आवाज रिधिमा के कानों में पड़ती और उसकी एकाग्रता भंग होने के साथ ध्यान पाठ-पूजा से हट जाता। इसी तरह दो-तीन दिन बीते और सुबह-सुबह ही ये घटना हो जाने के कारन उसका सारा दिन बेकार सा जाने लगा।



उसके चेहरे पर उदासी देख एक दिन उसके पिता ने उससे पूछा,

“क्या बात है रिधिमा? आज कल तुम बहुत उदास सी नजर आती हो?”

“क्या बताऊँ पापा, पिछले कुछ दिनों से मैं जब भी मंदिर जाती हूँ वहां पड़ोस की दो औरतें बैठ कर सबकी चुगली करती हैं और मेरा ध्यान पूजा से भटक जाता है।”

“बस इतनी सी बात? कल सुबह तुम मंदिर जाने से पहले मुझे मिल कर जाना।”

“लेकिन सुबह आप क्या करेंगे पापा?”

“ये तो सुबह ही पता चलेगा।”

इसके बाद अगली सुबह हुयी। रिधिमा मंदिर जाने के लिए तैयार थी। पापा के कहे अनुसार सुबह जाने से पहले वो उनसे मिली। उसके पापा ने एक कागज के टुकड़े पर लिखा और उसकी पूजा की थाली में रखते हुए कहा,

“इस कागज के ऊपर कोई और चीज मत रखना। और ध्यान रखना ये कागज थाली में से उड़ कर कहीं और न जाए।”

लेकिन इस से क्या होगा? यही सोचती हुयी रिधिमा थाली लेकर मंदिर चली गयी। सारे रास्ते उसका ध्यान उस कागज के टुकड़े पर ही था। फिर वो मंदिर गयी और जब घर वापस आई तो उसके पापा ने पूछा,

“तो रिधिमा जी, आज किसकी चुगली सुन कर आई आप?”

चुगली? आज तो रिधिमा ने चुगली सुनी ही नहीं। इसस कैसे हुआ? रिधिमा भी यही सोच रही थी।

“क्या हुआ रिधिमा? जवाब नहीं दिया तुमने?”

“पापा आज तो मेरा सारा ध्यान इस कागज के टुकड़े पर ही था। उन्होंने ने क्या बात की मुझे पता ही नहीं चला।“

“मतलब उनकी चुगली तुम्हें परेशान नहीं कार रही थी। बल्कि तुम्हारा उन्हें सुनना तुम्हे परेशान कर रहा था।”

“क्या मतलब पापा।”

“मतलब ये कि अगर तुम पूरी तरह से अपने काम पर ध्यान दो तो तुम्हें कोई भी चीज परेशान नहीं कर सकती। दिल से काम करने पर ऐसी एकाग्रता बनती है कि आस-पास क्या हो रहा है इस बात से फर्क नहीं पड़ता। जैसे आज तुम्हारा ध्यान इस कागज के टुकड़े पर एकाग्र था तो उनकी बातों पर ध्यान नहीं गया। इसी तरह अगर तुम अपना पूरा ध्यान पूजा में लगाओगी तो तुम्हें उनकी चुगली क्या और भी कुछ नहीं सुनाई देगा।”

“वाओ पापा, यू आर ग्रेट। आपे तो मेरी प्रॉब्लम झट से सोल्व कर दी।”

उस दिन के बाद न तो रिधिमा ने मंदिर में कोई चुगली सुनी और न ही उसके आस-पास होने वाली चीजों का उस पार असर हुआ।

दोस्तों यही हमारे जीवन की भी कहानी है। हम जब भी कोई काम करते हैं तो साथ ही ध्यान इधर-उधर भी डालते रहते हैं। जिस कारन हम अपने काम को अपना सौ प्रतिशत नहीं दे पाते। जिंदगी में आगे बढ़ना है तो हमें अपने आप को बदलना होगा। हम जो भी काम करते हैं उसे अपना सौ प्रतिशत देना होगा।

हमें एकाग्र होकर काम करने से ही सफलता की प्राप्ति हो सकती है। एकाग्रता मंत्र भी यही है कि आप अपने काम से प्यार करें। यदि आप अपने काम को प्रेम करते हैं तो आपको दुनिया की कोई भी ताकत सफलता प्राप्त करने से नहीं रोक सकती।

“ एकाग्रता मंत्र ” कहानी आपको कैसी लगी? कमेंट बॉक्स के जरिये हमें जरूर बताएं।

धन्यवाद।

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