संकल्प पर कविता :- संकल्पों से ही जीवन | Sankalp Poem In Hindi

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संकल्प पर कविता में बताया गया है कि संकल्प शक्ति ही मनुष्य को विकास की राह दिखाती है । संकल्प से ही व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है । संकल्प के आधार पर ही मनुष्य के जीवन में उन्नति और अवनति निर्धारित होती है । संकल्प से ही सब प्रकार की कामनाओं की पूर्ति संभव हो सकती है । हम अपने मन से बुरे विचारों को निकालकर सभी की भलाई का संकल्प लें ।शुभ संकल्पों में ही विश्व का कल्याण निहित है ।

संकल्प पर कविता

संकल्प पर कविता

संकल्पों से ही जीवन की
दूर हुई हर बाधा,
संकल्पों ने ही मानव का
संकट में हित साधा ।

संकल्पों की दूर दृष्टि से
राह प्रगति की दिखती,
संकल्पों की कठिन लेखनी
भाग्य मनुज का लिखती ।

पूरी होती संकल्पों से
मन की सौ सौ चाहें,
आसमान भरती अपने में
संकल्पों की बाहें ।

संकल्पों से अंतरिक्ष में
जा पहुँचा है मानव,
खोज कई करते वैज्ञानिक
संकल्पों से नित नव ।

लक्ष्य स्वयं ही संकल्पों से
पास चले हैं आते,
दृढ़ निश्चय वालों को पथ के
मोड़ नहीं भटकाते ।

संकल्पी जन गिर गिरकर भी
उठ उठ कर चल देते,
मंजिल पाने से पहले वे
साँस नहीं हैं लेते ।

वैसे तो हर जन के दृग में
कल के सपने पलते,
लेकिन जो होते संकल्पी
मात्र उन्हीं के फलते ।

अवरोधों से दृढ़ संकल्पी
हार कभी ना माने,
हो जाता पर्वत के आगे
वह सीने को ताने ।

जैसे हो संकल्प हृदय में
वह वैसा ही होता,
मानव की उन्नति अवनति के
बीज यही है बोता ।

अंधकार हो दूर जगत से
सबको मिले उजाला,
मन अपना सबका हित सोचे
शुभ संकल्पों वाला ।

संकल्प  पर कविता आपको कैसी लगी ? अपने विचार कमेंट बॉक्स में लिखना न भूलें।

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धन्यवाद।

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