पंछी पर कविता – पंछी एक प्रेरणा | An Inspirational Hindi Poem On Birds

इंसान की जिंदगी में कई दफा ऐसे पल आते हैं, जब वो अपनी परिस्थितियों से हार मान लेता है। लेकिन इंसान की हार उसकी सोच पर निर्भर करती है। अगर इंसान दृढ़ निश्चयी है तो निश्चित ही विजय उसकी होगी। मात्र इंसान ही नहीं संसार का हर प्राणी तभी सफलता प्राप्त कर सकता है जब वो उसे प्राप्त करने के लिए पूरी जान फूंक दे। इसी तरह का उदाहरण पेश करती एक पंछी पर कविता – पंछी एक प्रेरणा, हम आपके सामने लाये हैं जिसमें एक पंछी हिम्मत ना हारने का संदेश दे रहा है :-

पंछी पर कविता – पंछी एक प्रेरणा

पंछी पर कविता

एक पेड़ की डाली के कोने पर
मेहमान नया कोई आया था,
संघर्ष से सफलता पाने का
संदेश नया वो लाया था,
इक पंछी देखा था मैंने
मेरे मन को बहुत वो भाया था।

बसंत के मौसम में बगिया में
हर ओर ही अंकुर फूट रहे थे,
नयन हमारे आनंदित हो
इस दृश्य का आनंद लूट रहे थे,
हर ओर ही हर्ष उल्लास सा था
हर ओर भरी हरियाली थी,
तभी अचानक नज़र पड़ी
वो पेड़ की डाली खाली थी,
कुछ सोच रहा था उस पर बैठा
ऊपर से पेड़ का साया था,
इक पंछी देखा था मैंने
मेरे मन को बहुत वो भाया था।



सोच रहा था वो कैसे अब
घर को अपने बसाएगा,
सब से पहले तिनका-तिनका
उठा उठा कर लाएगा,
खोज-बीन में जुट गया था
तलाश हुई अब पूरी थी,
मुश्किल तो बस इतनी थी कि
पेड़ से थोड़ी दूरी थी,
पहला तिनका रखते ही अचानक
हवा के झोंके ने उड़ाया था,
इक पंछी देखा था मैंने
मेरे मन को बहुत वो भाया था।

संशय था तब मन में आया
इससे ना हो पाएगा,
कहाँ सामना हवा का कर ये
नई मिसाल बनाएगा,
हुआ अचंभा दूजे पल ही
वो दूसरा तिनका ले आया,
उड़ गया उसको भी लेकर
जब हवा का झोंका फिर आया,
वक़्त ना जाने आज ये कैसा
इम्तिहान ले आया था,
इक पंछी देखा था मैंने
मेरे मन को बहुत वो भाया था।

हिम्मत गज़ब की थी उसमें
अभी हार ना उसने मानी थी,
उसी डाल पर उसने अब
आशियाना बनाने की ठानी थी,
जाने उसने कब और कैसे
हवा को दे दी मार,
जल्दी-जल्दी लाकर रख दिए
उसने तिनके दो-चार,
काम शुरू कर उसने अब
अपना हौसला और बढ़ाया था,
इक पंछी देखा था मैंने
मेरे मन को बहुत वो भाया था।



धीरे-धीरे संयम से उसने
अपने घर का निर्माण किया,
मेरी भी नजरों ने उसके
जज़्बे का सम्मान किया,
देखा मैंने दृढ़ निश्चय उसका
अपनी समस्या का उसने समाधान किया,
लक्ष्य प्राप्त कर उसने अपना
अपनी विजय का गान किया,
हार ना मानो, विजय है तुम्हारी
इस बात को उसने सिखाया था,
इक पंछी देखा था मैंने
मेरे मन को बहुत वो भाया था।

शरद की खुबसूरत सुबह | सुबह की खूबसूरती पर एक कविता


आपको ये पंछी पर कविता कैसी लगी और आपने इस कविता से क्या सीखा, कमेंट बॉक्स में अपने विचार जरूर लिखें। हमें आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा। अगर ये कविता आपको अच्छी लगी तो कृपया इसे फेसबुक, ट्वीटर, व्हात्सप्प सभी जगह शेयर करे, ये हमें नए नए कविता लिखने के लिए प्रोत्साहित करती है। नये नए कविताओ के अपडेट पाने के लिए हमारे फेसबुक पेज पे जुड़े रहे।
धन्यवाद।

अभी शेयर करे
WhatsAppFacebookTwitterGoogle+BufferPin It

हमारे सब्सक्रिप्शन पालिसी जानिए या अपना सब्सक्रिप्शन अपडेट कीजिये।

25 Comments

  1. Avatar Partho
    • Sandeep Kumar Singh Sandeep Kumar Singh
  2. Avatar Abhishek Anand
  3. Avatar Kuldeep sahu
  4. Avatar Sangeeta gupta
  5. Avatar vani gupta
  6. Avatar Archna
  7. Avatar दीपक भारती
  8. Avatar Abhishek
  9. Avatar Jitendra Kumar
  10. Avatar Ankit kumar
  11. Avatar Bikki Barnwal

Add Comment