सफलता पर शायरी – सफलता की शायरी By संदीप कुमार सिंह

जो लोग ठान लेते हैं वो एक न एक दिन सफलता जरूर प्राप्त कर लेते हैं। सफलता प्राप्त करने के बाद इंसान उस दुनिया में पहुँच जाता है जिस दुनिया के वो अक्सर ख्वाब देखा करता था। तब उसे कैसा महसूस होता है और वह क्या-क्या सोचता है। इस अनुभूति को हम आपके सामने शायरी के रूप में पेश कर रहे है। पेश है – शायरी संग्रह ‘ सफलता पर शायरी ‘।

सफलता पर शायरी

सफलता पर शायरी - सफलता की शायरी By संदीप कुमार सिंह

1.
सूरज की तपिश और बेमौसम बरसात को हमने हंस कर झेला है,
मुसीबतों से भरे दलदल में हमने अपनी जिंदगी को धंस कर ठेला है,
यूँ ही नहीं कदम चूम रही है सफलता आज इस खुले आसमान तले
ज़माने भर के नामों को पीछे छोड़ा है तब जाकर हमारा नाम फैला है।


2.
मिट जाता, बर्बाद हो जाता या बदनाम हो जाता मै,
सफलता की राहों पे गुमनाम हो जाता मैं,
शुक्रगुजार हूँ उस खुदा का जिसने हर कदम साथ दिया
कहाँ पहुँचता वरना इस मुकाम पर, इक मौत आम हो जाता मैं।


3.
चमक रहा हूँ जो सूरज का की तरह तो सब हैरान हैं क्यों?
मेरी कामयाबी से सब इतना परेशान हैं क्यों?
हर रात टकराया हूँ मैं इक नई मुसीबत से नई सुबह के लिए
सबको दिखा हुनर मेरा लेकिन
किसी ने न पूछा की ये जख्मों के निशान हैं क्यों?



4.
मिली जो मंजिल तो कारवां भी बड़ा लग रहा था,
वरना सफ़र में हर शख्स मुझे ठग रहा था,
यूँ ही नहीं पहुंचा हूँ आज मैं इस मुकाम पर
जब सो रहा था ये ‘जग’ तब मैं ‘जग’ रहा था।
जग1 = दुनिया, जगत
जग2 = जागना


5.
कौन कहता है कि बुने हुए ख्वाब सच्चे नहीं होते,
मंजिलें उन्हीं को नहीं मिलती जिनके इरादे अच्छे नहीं होते,
रूखी-सूखी रोटी और धक्के तो बहुत खाए हैं जिंदगी में लेकिन
आज देख रहा हूँ कि सफलता के फल कभी कच्चे नहीं होते।


6.
चमक रहा है सितारा आज ज़माने में मेरे नाम का
मिल गया हैं नतीजा मुझे मेरे काम का,
किसी चीज की जरूरत न रही मुझे
जबसे नशा चढ़ गया है मुझे सफलता के जाम का।


7.
गिरा रही थी जिंदगी मुझे बार-बार अलग-अलग ठोकरों से,
बर्ताव कर रहा हो जैसे कोई मालिक अपने नौकरों से,
हिम्मत और हौसले को मैंने फिर भी अपनी बैसाखियाँ बनायीं
पहुँच गया सफलता की मंजिल पे


8.
बिना लक्ष्य के जीने वाले इंसानों की जिंदगी कहाँ अमीर होती है,
जब मिल जाती है सफलता तो नाम ही सबसे बड़ी जागीर होती है।



9.
किसी की तमन्ना थी तो किसी की उम्मीदें जुड़ी थीं,
मेरी सफलता के लिए मेरी मेहनत बहुत कड़ी थी,
पहुँच कर मुकाम पर जो मुद कर देखा मैंने तो पाया कि
मुझसे आगे निकलने को दुनिया तमाम खड़ी थी।


10.
जो शतरंज की बिसात होती जिंदगी तो
मैं सिर्फ एक मोहरा ही बन कर रह जाता,
ये तो वो खाली किताब निकली जिसने
बादशाह बना दिया मुझको जो मैंने
खुद की किस्मत लिखनी शुरू की।


पढ़िए :- कामयाबी पर बेहतरीन शायरी


11.
बीत गया है रास्ता की आज मैं अपने मुकाम पर हूँ,
सारे सफ़र सताती रही जिंदगी
थक चुका हूँ थोडा आज आराम पर हूँ।


12.
मिल गयी है सफलता तो नजरिये बदले हैं
जो थे कल तक दुश्मन आज करीबी निकले हैं,
ना ही बदला हूँ मैं ना ही मेरे अंदाज बदले हैं,
ये तो बस शुरुआत थी अभी तो पड़ाव अगले हैं।


13.
ख्वाब पूरे हो गए हैं मेरे कि आज चैन की नींद सोना चाहता हूँ,
बहुत देर से दूर था जिस आँचल से आज उसी माँ की गोद में सोना चाहता हूँ।


14.
माना कि पहुँच गया हूँ सफलता की ऊँचाइयों पर आज मैं,
लेकिन लोगों के दिलों में उतरने का हुनर आज भी रखता हूँ।



15.
मुझे तो खबर भी न थी की कौन-कौन साथ दौड़ रहा है मेरे
पहुंचा मंजिल पर तो पता चला की एक लम्बा कारवां मेरे पीछे था।


16.
एक जमाना था जब मैं तलाशता था रास्ता आसमान तक जाने का
एक आज का दौर है की सारा आसमान मेरा है।


17.
खोटा सिक्का जो समझते थे मुझे
आज मैं उनका ध्यान तोड़ आया हूँ,
जिंदगी की राहों में सफ़र लम्बा था मेरा
इसलिए क़दमों के निशान छोड़ आया हूँ।


18.
उड़ान भरी तो इतनी दूर निकल आया मैं,
न जाने इस मुकाम का मंजर क्या होगा?


19.
घिर चुका था जब मुसीबतों के बीच
हौसला बढाया तो रुकावटों की ईमारत हिल ही गयी,
बहुत दूर नजर आ रही थी जो इक दिन
कदम बढाया तो आज मंजिल मिल ही गयी।


20.
जिस सफ़र से होकर तू आज मुकाम पर पहुंचा है,
उसी सफ़र में आज कई दीवाने चल निकले हैं,
जानते नहीं नादान इन्हें जरूरत है इक जिद की
नन्हें कदमो से नापने आसमान चल निकले हैं।



सोच बढ़ाये, लक्ष्य बनाये और सफलता पाए

सफलता पर शायरी की तरह सफलता की राह दिखाती हमारी अन्य रचनाएँ:

आपको यह शायरी संग्रह ‘ सफलता पर शायरी ‘ कैसा लगा? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। धन्यवाद।

आगे क्या है आपके लिए:

ये रचनाएँ भी पढ़े..



अच्छा लगा? तो क्यों ना लाइक और शेयर करे..!

हमारे सब्सक्रिप्शन पालिसी जानिए या अपना सब्सक्रिप्शन अपडेट कीजिये।

Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

You may also like...

32 Responses

  1. HindIndia कहते हैं:

    बहुत ही बढ़िया article लिखा है आपने। ……..Share करने के लिए धन्यवाद। 🙂 🙂

  2. Gaurav Dhoke कहते हैं:

    thanks sir ji aap ki sayari ke lekh bhahut hi badiya hai.
    "dhanyawaad"

  3. Akash singh कहते हैं:

    sir, aapne jindgi bdlne vali sayariya likhi h eske liye aapko very very thanks.

  4. shantanu hazra कहते हैं:

    khub surat shyri…i loved…

  5. sachin yadav कहते हैं:

    sir i am sachin yadav, maine jindgi mai dusro ke dwara bahut khai hai aur hum akele nahi hamare aise kai sathi hai leki bayan nahi karte aap hamara aur hamare jaise maaro ka junoon badate rahiye , please

    • Sandeep Kumar Singh Sandeep Kumar Singh कहते हैं:

      सचिन यादव जी,,, धन्यवाद की आपको हमारी रचना अच्छी लगी। हमारा प्रयास यही रहता है कि पाठक को प्रेरित करने वाली रचना ही लिखें। हमें ये जानकर खुशी हुई कि हमारा प्रयास सफल हुआ। इसी तरह हमारे साथ बने रहें।
      धन्यवाद।

  6. उमाशंकर कहते हैं:

    नमस्कार सर
    मुझे आपका ये सारी सफल शायरी बहूत अच्छे लगे
    so thanks sir

  7. Priyesh Gamot कहते हैं:

    Behad atisundar evam utsahjanak pankitiya likhi hai aapne.. aapke in sabhi sher ne mera dil jeet liya hai.. me stage anchoring me aapke kuch shabdo ko logo tak pahuchaunga.. ummid karta hu ki aap bhavishya me bhi isse behtar likhate rahe.. Dhanywad

    • Sandeep Kumar Singh Sandeep Kumar Singh कहते हैं:

      मुझे खुशी है Priyesh Gamot की आपको मेरी कलम की रचना पसंद आयी। आप जैसे पाठक अगर उत्साह बढ़ाते रहे तो ये कलम इसी तरह मेरा साथ देती रहेगी। सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

  8. AmitSharma कहते हैं:

    Bahut bahut badiya sir ji gajab line likhin apne sir

  9. Saurabh कहते हैं:

    Wow.. amazing poem. Brings me to tears..
    Often people make mistake while reading poetry. You ready every stanza twice and then think about it to completely understand the meaning. Poems are shorter but have deeper meanings..you could spend an hour on such poetry imagining each and every situation carefully..

  10. rama ram कहते हैं:

    very nice shayri

    manji teri kisti k tlabgar bhut h ,is paar kuch pr us paar bahut h.
    jis shahar me tune kholi h shishe ki dukan , us shahar me patthar k kharidar bhut h..
    thanks

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *