शायरी की डायरी :- मेरी डायरी से कुछ चुनिंदा शेरों का शायरी संग्रह

‘ शायरी की डायरी ‘ शायरी संग्रह by संदीप कुमार सिंह। पढ़िए संदीप कुमार सिंह की डायरी से कुछ बेहतरीन शेर :-

शायरी की डायरी

शायरी की डायरी

1. दुश्मन

दिलों में नफरतों का सैलाब लिए चलते हैं,
हमारे दुश्मन शराफत का नकाब लिए चलते हैं।

2. शराफत

इतनी शराफत से निभाया था हर रिश्ता मैंने
कि हर शख्स ने उठाया फ़ायदा मेरा।

3. मिजाज

चेहरा वही है हिजाब बदल रहा है,
पहले मौसम बदलते थे
अब मौसमों का मिज़ाज बदल रहा है।

4. इश्क

इससे ज्यादा क्या होगी मेरे इश्क की इन्तेहाँ
तुझसे ही मुकम्मल और तेरे बिना अधूरा हूँ।



5. विश्वास

इश्क में इक प्यारे से दर्द का जोर होता है,
धड़कने खुद-ब-खुद बढ़ जाती हैं
जब विश्वास कमजोर होता है।

6. इन्तजार

आज भी तलाशते हैं हम उनके साए,
मुद्दत गुजर गयी पर वो नहीं आये।

7. तन्हाई

जब भी वो तनहा निकलते हैं
मुझे तनहा छोड़कर,
तन्हाई का आलम देख आ जाते हैं लौट कर।

8. लाश

लौटोगे तो फिर वहीँ पाओगे मुझे
मगर ये जिस्म तब तलक
लाश बन चुका होगा।

9. इन्सान

वक़्त ने फंसाया है
लेकिन मैं परेशान नहीं हूँ,
हालातो से हार जाऊं
मैं वो इन्सान नहीं हूँ।

10. मुकाम

कभी न कभी उसकी जिंदगी में
ये मुकाम भी आएगा,
आँखों से अश्क बहेंगे और
लबों पर मेरा नाम भी आएगा।

11. रात

देर से सही मुलाकात तो हुयी
आखिर तुमसे बात तो हुयी,
बरसों से था जिस पल का इंतजार
शुक्र है आज वो रात तो हुयी।



12. इबादत

सब्र रख कि वो दिल भी
तेरे क़दमों में रख देंगे,
तू एक बार इबादत की
हद तो कर।

13. मुलाकात

मांग लूँगा तुझे जब भी खुदा से बात होगी,
जमाना याद रखेगा वो पल जब हमारी मुलाकात होगी।

14. धोखा

दर्द-ए-दिल का हाल हम किसको बतायें
अपनेपन का हक़ हम किस पर जताएं,
हमें धोखा दिया है हमारे अपनों ने
अब हम अपना बनायें भी तो किसे बनायें।

15. अच्छा है…..

तुझसे रोज मुलाकात हो तो अच्छा हो
तुझसे मेरी बात हो तो अच्छा हो,
यूँ तो जिंदगी में कई चेहरे मिलते हैं
लेकिन जो साथ रहे जिंदगी भर
तू वो चेहरा बन जाए तो अच्छा हो….

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धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

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ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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4 Responses

  1. विजय त्यागी कहते हैं:

    एक सुकून जो बचपन मे मां की गोद मे मिला ठीक वैसा ही सुकून मुझे हिंदी की कविताएं पढ़ने में मिलता है

    बहुत अच्छा प्रयास
    जीवन में निरंतर सफलताओं को प्राप्त करें यही शुभकामनाएं हैं
    धन्यवाद

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