जिंदगी पर शायरी – जिंदगी के अलग-अलग रंग बताती शायरियाँ

‘ जिंदगी पर शायरी ‘ शायरी संग्रह के साथ एक बार फिर हम आप सबके सामने हैं दोस्तों आशा करता हूँ आपको पिछले शायरी संग्रह की तरह यह शायरी संग्रह भी पसंद आएगा।

कहीं दर्द तो कहीं खुशियाँ, कहीं है आसमान और कहीं हैं जमीन
कभी खट्टी तो कभी मीठी है, ये जिंदगी है बड़ी हसीन।

दोस्तों जिंदगी बड़ी ही अजीब है। किस पल क्या हो जाए कोई नहीं कह सकता लेकिन बीते हुए पलों से हर कोई जिंदगी के बारे में अपने विचार बता सकता है। ऐसा ही कुछ प्रयास मैंने भी किया है। जिंदगी के अलग-अलग पलों को मैंने इस शायरी संग्रह में उतारने की कोशिश की है। किसी एक पल को मुख्य रख कर नहीं जिंदगी के हर पल को इस शायरी संग्रह में संजोने की कोशिश की है। तो आइये पढ़ते हैं शायरी संग्रह’ जिंदगी पर शायरी ‘ :-

जिंदगी पर शायरी

जिंदगी पर शायरी

1.
न कोई नियम न क़ानून है, बस आगे बढ़ने का ही जुनून है,
तू कितनी भी रुकावटें डाल-ए-जिंदगी,
हम न रुकेंगे जब तक हमारी रगों में उबलता खून है।

2.
गम, दर्द, हर्ष, उल्लास तो इसके जाम हैं,
हर शख्स के लिए जाल बिछाना इसका काम है,
हर कोई चाहता है कि बना रहे इसका साथ,
मगर साथ छोड़ देती है ये, जिंदगी जिसका नाम है।

3.
मिली है जिंदगी तो शान से जीते हैं,
खुशियों के जाम हर शाम को पीते हैं,
चेहरे पर मुस्कान देख कर धोखा मत खा जाना
कुछ जख्म भी हैं किस्मत में जिन्हें हम रोज सीते हैं।

4.
जिंदगी के किस्से में न जाने कब मोड़ आता है,
वक़्त आता है तो पत्थर भी पिघल जाता है,
अपने हौसलों और जज्बों को बनाये रखना
जितना संघर्ष हो हुनर उतना ही निखर जाता है।

5.
कभी न बुझती है वो प्यास है जिंदगी
निराशा को मिटाती एक आस है जिंदगी,
मिल जाती है खुशियाँ किसी को जहाँ भर की
तो किसी के लिए हर पल उदास है जिंदगी।

6.
कुछ रो के गुजरी है, कुछ हंस के गुजरी है,
कभी सुलझी सी रही तो कुछ कशमकश में गुजरी है।

7.
आगे बढ़ने की जिद, जिंदगी में सबको भगा रही है,
सपनों में दौड़ने वालों को, जिंदगी की ठोकरें जगा रहीं हैं।

8.
डूबे हुए से हैं मझधार में, न कश्ती है न सहारा मिलता है,
जिंदगी के इस समंदर में बस मौत ही एक किनारा मिलता है।

9.
तेरा दिया जख्म आज भी नासूर क्यों है?
मुझको बता ए जिंदगी मेरा कसूर क्या है?
पल भर की ख़ुशी देके ताउम्र गम दिए,
कुछ तो समझ में आये, तेरा दस्तूर क्या है?

10.
डूबे हुए से रहते हैं
न कश्ती मिलती है न किनारा मिलता है,
एक ऐसा समंदर हैं जिंदगी
जहाँ मौत ही किनारा मिलता है।

11.
न जी ही पा रहे है, न मौत ही है आती
न जाने दिल में ये कैसी ख्वाहिशें हैं जागी,
ये जिंदगी की राहें हैं, गुमशुदा सी जैसे
न जाने मेरी खुशियाँ है किस ओर को भागी।

12.
न गम रहा कोई न कोई दर्द ही आज है
हर पल अब तो खुशियों का आगाज़ है,
सीख लिया है जब से धोखे और झूठ का खेल
तब से हर पल जिंदगी का हमारा खुशमिजाज है।

13.
जरूरत तक ही अपना बना कर रखती है
वक़्त आने पर ये दुनिया विश्वास तोड़ देती है,
बेवफा तो ये जिंदगी भी है यारों
मौत आने पर ये भी साथ छोड़ देती है।

14.
परेशानियों का हर लम्हा खुशियाँ लूटता है,
जिंदगी ख्वाब है ऐसा जो मौत आने पर ही टूटता है।

15.
दिल में जो दर्द है उसकी आवाज नहीं आती
लबों पे तुमसे मिलने की फ़रियाद नहीं आती,
जबसे सिखा दिया तुमने जिंदगी जीने का अंदाज हमें
आँख भर तो जाती है मगर बह नहीं पाती।

सफर शायरी | जिंदगी के सफ़र पर शायरी by संदीप कुमार सिंह

आपको यह शायरी संग्रह ‘ जिंदगी पर शायरी ‘ कैसा लगा हमें अपने विचार अवश्य बताएं। आपके विचार हमारे लिए बहुमूल्य हैं। धन्यवाद्।

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Sandeep Kumar Singh

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ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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4 Responses

  1. AMBER CHOUKSEY कहते हैं:

    आपके blogs और posts हमेशा ही अच्छे लगते है ।
    जय माता की ।।
    मिस्टर Sky

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