सुबह पर बाल गीत :- देखो प्रभात हो आई है | बालगीत इन हिंदी

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एक बच्चे के सुबह आलस्य की वजह से न उठने पर उसे उठाने के लिए लिखा गया बाल गीत ” सुबह पर बाल गीत ” :-

सुबह पर बाल गीत

सुबह पर बाल गीत

सूरज चाचू अम्बर आये
धूप भी साथ में आई है,
उठो न प्यारे लाल हमारे
देखो प्रभात हो आई है।

काली-काली रात ढल गई
तारे विदा हुए हैं सारे
कुदरत तुम्हारे स्वागत को
लेकर नाम तुम्हें पुकारे,
चिड़िया देखो छेड़ती तान
मुर्गे ने बाँग लगाई है
उठो न प्यारे लाल हमारे
देखो प्रभात हो आई है।

मीठी वाणी कोयल बोले
अपनी नींद तुम दूर करो
प्रातः काल शीतल वायु से
अपने आलस को चूर करो,
बिस्तर से निकलो अब जल्दी
माँ ने आवाज लगाई है
उठो न प्यारे लाल हमारे
देखो प्रभात हो आयी है।

सूरज ने है छटा बिखेरी
चमकती ओस की बूंदेें हैं
घंटी भी बज गयी घड़ी की
सब कोई हमको ढूंढे हैंं
ईश-भक्ति में लीन हो माँ ने
सुंदर आरती सुनाई है
उठो न प्यारे लाल हमारे
देखो प्रभात हो आई है।

कल-कल करती नदिया बहती
मौसम भी बहुत सुहाना है
करने हैं जग में काम बहुत
सोया जो हुनर जगाना है,
आसान नहीं यह जीवन राह
आती इसमें कठिनाई है
उठो न प्यारे लाल हमारे
देखो प्रभात हो आई है।

करके अब संघर्ष निरंतर
स्वयं में खुद ही सुधार करो
साधकर अपना एक निशाना
अपना जीवन साकार करो,
सूरज ने भी भटके जन को
एक नई राह दिखाई है
उठो न प्यारे लाल हमारे
देखो प्रभात हो आई है।

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शिक्षक पर कवितामेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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2 thoughts on “सुबह पर बाल गीत :- देखो प्रभात हो आई है | बालगीत इन हिंदी”

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    आपकी प्रतिक्रिया के लिये आपका बहुत बहुत आभार आर्यन जी।

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