शिक्षक पर कविता :- वह और कोई नहीं बस गुरु ही है | Shikshak Par Hindi Kavita

शिक्षक का जीवन में बहुत महत्त्व होता है। हम जीवन में जो भी बनते हैं उसका श्रेय शिक्षक को ही जाता है। शिक्षक ही है जो हमें जीवन का पाठ पढाता है और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। इन्हीं भावों के साथ हरीश चमोली जी ने हमें सभी शिक्षकों को समर्पित यह कविता भेजी है तो आइये पढ़ते हैं शिक्षक पर कविता :-

शिक्षक पर कविता

शिक्षक पर कविता

अँधियारो  को चीर कर
रोशनी की राह दिखाए
सच और झूठ का बोध कराये
गलत सही का भेद  बताये ..
अहंकार  को जड़  से मिटाकर
उदारता को विकसित करे….
भावनाओं से परिचय करवाकर
अन्तर्मन का श्रृंगार  करे ..
नकारात्मकता  को जीवन से मिटाकर .
एक नयी सोच से अवगत करे ..
वह और कोई नहीं बस गुरु ही है ..
जिसने है जीवन का महत्व बतलाया…
वह और कोई नहीं बस गुरु ही है।

माँ सरस्वती की वीणा  ध्वनि  सा
मधुर भाषी जो हो जग  में .
सहज सजक और धैर्य से जो
मानवता का पाठ  पढ़ाये ..
राम जी जैसा  वीर  बना  जो
जब भी विपत्ति कोई  कभी आयी हो
भुलाकर अपना सब कुछ जिसने
बस गुरु धर्म  का ही पालन जो करे
मात पिता ईश्वर से भी बढ़कर  हो जो
वह और कोई नहीं बस गुरु ही है ..
जिसने है जीवन का महत्व बतलाया….
वह और कोई नहीं बस गुरु ही है।

द्रोण विश्वामित्र  शुक्र परशुराम बृस्पति जैसे
इस जग में गुरु थे कभी अमिट महान
अर्जुन कृष्ण भीम  एकलव्य  आरुणी जैसे
शिष्यों ने गुरु महिमा का था किया बखान…
बाल्यकाल से मृत्यु  तलक
भिन्न  भिन्न रूप में  पहचान मिले
जिससे भी कुछ सीख मिले
छोटा हो या कोई बड़ा
बस कुछ न कुछ सदैव  ज्ञान मिले .
नासमझ  को जो समझाए
वह और कोई नहीं बस गुरु ही है ..
जिसने है जीवन का महत्व बतलाया….
वह और कोई नहीं बस गुरु ही है।

पढ़िए :- गुरु पर कविता ‘वही गुरु कहलाता है’


शिक्षक पर कविता मेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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