कोहरे की चादर | शरद ऋतू और कोहरे से ढकी एक सुबह पर कविता

सूचना: दूसरे ब्लॉगर, Youtube चैनल और फेसबुक पेज वाले, कृपया बिना अनुमति हमारी रचनाएँ चोरी ना करे। हम कॉपीराइट क्लेम कर सकते है।
रचना पसंद आये तो हमारे प्रोत्साहन के लिए कमेंट जरुर करें। हमारा प्रयास रहेगा कि हम ऐसी रचनाएँ आपके लिए आगे भी लाते रहें।

दिन की सुरुवात सुबह से होती है। और सुबह की खूबसूरती तो आप सबको पता ही है। अगर सुबह शरद ऋतू की हो और साथ में कोहरे की चादर भी हो तब तो सुबह का नजारा ऐसा खुबसूरत बन पड़ता है की मन आनंदित हो जाता है।

अब कुछ लोग ये ना पूछ ले की शरद ऋतू कब से शुरू होती है? हमारे भारत में जब मानसून वापस लौटता है उसके बाद सितम्बर से लेके दिसम्बर तक शरद ऋतू होता है। जिस दिन शरद पूर्णिमा मानते है उसके बाद से ही शरद ऋतू प्रारंभ हो जाता है।

शरद ऋतू में ठण्ड दिन-ब-दिन बढ़ते जाता है। दिन छोटे होते चले जाते है। सुबह कोहरे के आँचल में छिपते जाता है। चारो और हरियाली रहती है। धुप सुहानी लगती है। इस प्रकार शरद ऋतू और इसकी सुबह बहुत ही मनभावन होता है।

तुलसीदास जी ने भी शरद ऋतू के बारे में रामचरितमानस में लिखा है

“बरषा बिगत सरद ऋतु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई॥
फूलें कास सकल महि छाई। जनु बरषाँ कृत प्रगट बुढ़ाई॥”

ऐसे ही शरद ऋतू की कोहरे से ढकी एक सुबह की खूबसूरती पे चंद लाइने हमने भी प्रस्तुत की है।


कोहरे की चादर

कोहरे की चादर | शरद ऋतू और कोहरे से ढकी एक सुबह पर कविता

कोहरे की चादर ओढ़ी सुबह
निकली सूरज की लाली में,
ओस की बूँदें लगे हैं मोती
खेतों की हरियाली में।
शीत लहर का मौसम ऐसा
रंग बिरंगे बागों में,
मंद-मंद मुस्काऐ कुसुम
पौधों की पतली डाली में।

खग नभ में जो उड़ते जाएँ
गीत सुहाने गाते हैं,
करे पुकार ह्रदय ये मेरा
मिल जाऊँ चाल मतवाली में।
आरती है आजान कहीं
स्वर पड़ते मधुर कानों में,
सिखा रहा हो दूर अंधेरा
जग की इस उजियाली  में।

कष्ट हो या हो संशय कोई
या भटके मन कहीं राहों में,
प्रसन्नता से प्रयास तू करना
हर हल है सोच निराली में।
कोहरे की चादर ओढ़ी सुबह
निकली सूरज की लाली में।

पढ़िए :- प्रेरणादायक कविता :- हर सुबह नयी शुरुआत है


ये प्यारी सी कविता आपको कैसी लगी हमें कमेंट के माध्यम से जरुर बताये। ताकि हमें लिखने की प्रेरणा मिलती रहे। अगर कविता अच्छी लगी तो दूसरों के साथ भी शेयर करें, शेयर करना बिलकुल मुफ्त है।

पढ़िए ऋतुओं से जुड़ी ये बेहतरीन रचनाएं :-


धन्यवाद।

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on telegram
Telegram
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on email
Email

6 thoughts on “कोहरे की चादर | शरद ऋतू और कोहरे से ढकी एक सुबह पर कविता”

  1. Avatar

    bahut sunder kavita.kya mai es kavita ko apke nam se facebook me le sakta hu. anumati denge to mujhe khushi hogi.dr r k sonawane

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *