रक्षाबंधन पर शायरी :- राखी पर भाई और बहन की शायरी

रिश्ते तो कई होते हैं दुनिया में लेकिन एक रिश्ता बहुत ही खास होता है। ये रिश्ता है भाई और बहन का। भाई और बहन चाहे कितनी ही दूर क्यों न हों। उनके बीच का प्यार कभी कम नहीं होता। माँ के बाद बहन ही होती है जो एक आदमी के लिए हमेशा दुआ मांगती रहती है और उसका ख्याल रखती है। बहन छोटी हो या बड़ी, वो हमेशा भाई का ख्याल रखती है और अपने भाई से बहुत प्यार करती है। वैसे तो भाई-बहन का प्यार सदा बरक़रार रहता है लेकिन एक ऐसा पर्व है जो इस प्यार को कई गुना बाधा देता है वो है रक्षाबंधन का त्यौहार। इसी प्यार के एहसास को मैंने शायरी में प्रस्तुत करने की कोशिश की है। आइये पढ़ते हैं :- ” रक्षाबंधन पर शायरी “

रक्षाबंधन पर शायरी

रक्षाबंधन पर शायरी

1.

रिश्ते कई हैं दुनिया में पर ये रिश्ता कुछ खास है
बहना ने जो हाथों पे बांधा वो धागा नहीं विश्वास है,
दूरी हो चाहे कोसों की पर दिल से कभी न दूर हैं
ख़ुशी हो या हो गम हो कोई उसे हो जाता अहसास है
रिश्ते कई हैं दुनिया में पर ये रिश्ता कुछ खास है।

2.

न मांगे वो धन और दौलत, न मांगे उपहार
चाहत उसकी इतनी की बस बना रहे ये प्यार,
गम न कोई पास में आये खुशियाँ मिले हजार
ऐसा ही सन्देश है लाता राखी का ये त्यौहार
ऐसा ही सन्देश है लाता राखी का ये त्यौहार।

3.

कितने दिनों के बाद
सूनी कलाई पर बहना का प्यार आया है,
सब भाई-बहनों को मुबारक हो
जो ये राखी का त्यौहार आया है।

4.

बंधन ये प्यार का जो तूने
मेरे हाथों पर बांधा है,
मरते दम तक मैं अपना फ़र्ज़ निभाऊंगा
तुझसे ये मेरा वादा है।

5.

रेशम की डोरी हाथों में
और माथे पे लगा है चन्दन
सलामत रहे भाई हमारा
करते हैं प्रभु के आगे वंदन।

6.

गम मेरे हों सारी जिंदगी के
और सारी खुशीयाँ तुम्हारी हो,
इस भाई की जान हो तुम
और पापा की राजकुमारी हो।

7.

वो सदा ख्याल रखता है उसका
और उसे सिर आँखों पर बिठाता है,
दुनिया का हर भाई अपनी बहन को
जी-जान से भी ज्यादा चाहता है।

8.

सावन के महीने में जो पावन पर्व ये आता है
हर बहन को ये अपने भाई से मिलवाता है
रक्षा बंधन का ये त्यौहार है ऐसा
भाई-बहन के लिए जो ढेरों खुशियाँ लाता है।

9.

वो उसे लगती परी, वो उसे लगता फ़रिश्ता है,
भाई-बहन का कुछ ऐसा ही रिश्ता है।

10.

हर रिश्ते से ये रिश्ता जुदा है
क्योंकि इसमें प्यार का सागर बसा है,
उसके गम को हमेशा दूर किया है भाई ने
और उसकी खुशियों में उसके संग हंसा है।

11.

एक मर्द की तकलीफ जिसको
बिलकुल भी न सहन है
एक है माँ और
दूसरी बहन है।

12.

जब भी मुसीबत पड़ेगी हम पर
हमारे हक़ में दुवायें कौन मांगेगा,
जब बहनें ही न रहेंगी इस दुनिया में
तो राखी कौन बांधेगा?

13.

तेरी तरफ जो रुख करेंगी गरम हवाएं तो
तो उनको भी जला कर ख़ाक कर दूंगा
ओ मेरी प्यारी बहना जो तुझे किसी ने सताया
तो ये कायनात भी जला कर राख कर दूंगा।

14.

बचपन की वो शैतानियाँ मुझे आज भी याद आती हैं,
उस वक़्त तो बस मेरी आँखें भर जाती हैं,
दिल को मिल जाता है सुकून और रूह खुश हो जाती हैं
जब रक्षाबंधन पर मेरी बहना राखी लेकर आती है।

15.

साधारण सा धागा नहीं ये विश्वास की एक डोर है,
कोई तोड़ सके इसे न किसी में इतना जोर है
कौन कहता है की अंत हो जाता है हर रिश्ते का
ये वो रिश्ता है जिसका न कोई ओर न कोई छोर है।


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Sandeep Kumar Singh

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ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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15 Responses

  1. Nageshwar Dhakad कहते हैं:

    शायरी दिल को छू गई
    रक्षाबंधन की

  2. sushila कहते हैं:

    bhai and bahana ka bara tounhar hai rakshabandan all broter very happy rakshabandan

  3. Subhash khant कहते हैं:

    Dhara 347ko maddenajar rakhate hue ye Adalat India ki koi bhi beti Subhash Khant Ko Bhai yani apna Bhai banane ki Saja sunati he from SUBHASH KHANT

  4. sanjay कहते हैं:

    शायरी दिल को छू गईरक्षाबंधन की

  5. dhani कहते हैं:

    jaane kese inhe bahar ched jaate hai log….
    jabki ghar me inhe behana bulaate hai log….

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