जीवन में लक्ष्य का महत्त्व :- लक्ष्य निर्धारण के लिए प्रेरित करता प्रेरणादायक लेख

अगर किसी के साथ लक्ष्य की बात करें तो ज्यादातर लोग कहते हैं कि जीवन में लक्ष्य होना जरूरी है लेकिन उनमें से ज्यादातर लोग बस बातें करते हैं। आपको क्या लगता है? क्या जीवन के लिए लक्ष्य जरूरी है? क्या लक्ष्य के बिना जीवन अधूरा है? ऐसे भी तो जीवन चल ही रहा है फिर लक्ष्य के बारे में क्यों सोचें? तो आइये आपको बताते हैं कि जीवन में लक्ष्य का महत्त्व और लक्ष्य का होना क्यों जरूरी है :-

जीवन में लक्ष्य का महत्त्व

जीवन में लक्ष्य का महत्त्व

लक्ष्य के बारे में साधारण शब्दों में आपको समझा सकूँ इसके लिए मैं जिंदगी को सड़क और आपको एक यात्री के रूप में प्रस्तुत करूँगा। अब मान लीजिये आप अपनी कार में बैठ कर एक सफ़र पर निकल पड़े हैं। आपको यह नहीं पता कि आपको जाना कहाँ है?

तो भाई साहब या बहन जी इस से पहले आप ये सोचिये कि क्या आप जो जीवन जी रहे हैं उसका कोई लक्ष्य है? अब शायद आपको मेरा वो वाला सवाल सही लगे।

तो आगे बढ़ते हैं, मान लीजिये आप एक कार में एक सफ़र पर निकले हैं तो आपके साथ क्या होगा?

अब अगर कार आपकी नहीं होगी तो आपको कार मालिक की मर्जी से चलाना होगा। क्योंकि अपनी मर्जी से चलने के लिए अपनी कार का होना जरूरी है। और मान लेते हैं कि कार आपकी ही है तो? तो क्या होगा? आप कार अपनी मर्जी से चलाएंगे।

आपको जहाँ भी जाम मिलेगा तब आप क्या करेंगे? जाहिर सी बात है आप वहां इंतजार न करते हुए अपना रास्ता बदल लेंगे। जब तक इंधन रहेगा आप कार चलाएंगे लेकिन जब ख़त्म हो गया तब? तब आप क्या करेंगे? अगर कोई पेट्रोल पंप पास में हुआ तो आप कार में पेट्रोल डलवा ही लेंगे। अगर पेट्रोल पंप न हुआ तो? तब तो आपको पैदल ही चलना पड़ेगा और पैदल भी आप कितनी दूर चेलेंगे जब आपको यही न पता होगा कि आपको जाना कहाँ है?

ये चीज कैसे जुड़ी है आपकी जिंदगी से आइये समझते हैं :-

अपनी कार न होना

जब आप कोई नौकरी करते हैं तो कहीं न कहीं आप किसी और की कार चला रहे होते हैं। अगर आपका मालिक अच्छा हुआ तो आपको आपकी मर्जी के मुताबिक थोड़ी बहुत चलने दे सकता है। लेकिन ज्यादातर आपको उसके हिसाब से ही चलना होगा।

आप अपनी जिंदगी में जब बिना किसी लक्ष्य के चलते रहते हैं तो आप अनजाने में किसी और का लक्ष्य पूरा कर रहे होते हैं। जो आपकी सहायता से अपने सपने पूरे कर रहा होता है। ऐसे में किसी और के सपने पूरे करते-करते आपके अपने सपने अधूरे रह जाते हैं। जो थोड़े बहुत पूरे होते भी हैं आपको उन्हीं में संतुष्ट रहना पड़ता है।

इसलिए यदि आप अपने जीवन को अपने मुताबिक जीना चाहते हैं तो पहले अपना लक्ष्य निर्धारित कीजिये।

रास्ते पर जाम का होना

जब आप बिना लक्ष्य के अपनी गाड़ी चला रहे हैं तब जब आपको रास्ते पर जाम मिलेगा तो जाहिर सी बात है आप अपना रास्ता बदल लेंगे। इस तरह ये भी संभव है कि आप कई बार अपना रास्ता बदलें। इस से होगा क्या?

हो सकता है आप अलग-अलग रास्तों को बदलते हुए घूम फिर कर फिर से वहीं पहुँच जाएँ।

अगर आप जीवन में लक्ष्य निर्धारित नहीं करते तो आपके फैसले समय के हिसाब से बदलते रहते हैं और आप उसी स्थिति में रह जाते हैं जिसमें थे। क्योंकि आपके फैसले बस एक अस्थिर समस्या से निजात पाना होता है। आप उस समस्या से निजात पाने की बजाय अपना रास्ता बदल लें तो वो समस्या बार-बार आपके सामने आ सकती है।

यदि आप अपनी समस्या से एक बार निपट लेते हैं तो आप उसके बारे में काफी-कुछ जान लेते हैं और भविष्य में उस से छुटकारा कैसे पाना है। ये भी भलीभांति जान लेते हैं।

अगर इंधन ख़त्म हो जाए

जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि यदि कार में से इंधन ख़त्म हो जाए तो आप क्या करेंगे? या तो आप पास में किसी पेट्रोल पंप से पेट्रोल डलवा लेंगे या फिर पैदल चलने लगेंगे।

ऐसे वो लोग हैं जो जो जीवन में किसी चीज से दुखी होते हैं। तो उनके जीवन जीने कि गति धीमी हो जाती है। जब अचानक ही वो उस चीज से अलग हो जाते हैं जिनकी वजह से उनका जीवन सुखमय व्यतीत हो रहा था। फिर चाहे वो नौकरी हो, प्रेम हो या कोई और कारण हो।

जब वो कारण ख़त्म हो जाता है तब या तो इन्सान का जीवन वहीं ठहर जाता है। या फिर अगर वो चलता भी है तो उसकी चलने की गति धीमी हो जाती है। क्योंकि आपके पास आगे बढ़ने का कोई स्थायी कारण नहीं होता।

क्या है समस्याएँ

हमारे जीवन की सबसे बड़ी समस्या ये है कि पाना तो हम बहुत कुछ चाहते हैं लेकिन करना कुछ नहीं चाहते। अगर उनसे कभी ये कहा जाए कि आप अपना जीवन बदलने के लिए कुछ करते क्यों नहीं. तो सामने वालों के जवाब ऐसे होते हिं जैसे आप में से भी कुछ लोगों के होते होंगे।

सबसे बड़ा बहाना :- मैं करना तो बहुत कुछ चाहता हूँ लेकिन समय नहीं मिल पाता।

अगर आपका भी ऐसा ही बहाना तो पढ़िए हमारा ये लेख :- सुव्यवस्थित कार्यशैली और लक्ष्य प्राप्ति

हम आपको आश्वस्त करते हैं कि यदि आप इसके हिसाब से अपने काम करेंगे तो आपके पास समय ही समय रहेगा।

दूसरा सबसे बड़ा बहाना :– ये काम मेरे लिए है ही नहीं या मैं ये काम करूँगा? कभी नहीं।

तो ऐसे लोग हमारा ये लेख पढ़ें  बड़ी सोच का बड़ा जादू

जिस से आपको पता चेलगा कि जीवन में काम छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि आप उसे करते कैसे हैं ये महत्त्व रखता है। उदाहरण स्वरुप अगर आप सब्जी ठेले पर बेचते हैं तो सब कम दाम लगाने के लिए बोलेंगे। परन्तु यदि आप उसी ठेले को थोड़ा आकर्षक बना लेते हैं और सब्जिय कुछ अलग ढंग से रखते हैं तो हो सकता है कि आप पहले से ज्यादा मदनी कर पायें।

तीसरा सबसे बड़ा बहाना :- ये बहाना कम और खुद को धोखा देना ज्यादा होता है। ये है मैं आज ये काम नहीं कर सकता कल ये जरूर करूँगा।

ऐसा सोचने वाले लोग मुनिबा मज़ारी की ये कहानी जरूर पढ़ें। फिर आप जान पाएंगे कि जीवन को बदलने का सही समय आज और भी से शुरू होता है कल से नहीं।

तो हमें सबसे पहले इन सब बहनों से छुटकारा पाना होगा। फिर हमें अपना लक्ष्य निर्धारित करना होगा। जी हाँ, हम बात कर रहे थे कार की।

पहले बात करते हैं अपनी कार होने कि। यदि आप अपने जीवन का एक लक्ष्य निर्धारित करते हैं तो भगवान् कि तरफ से आपको एक कार उपहार स्वरुप मिल जाती है। जिसमें आप अपनी मर्जी के अनुसार अपने निर्धारित किये गए लक्ष्य कि तरफ बढ़ने लगते हैं।

इस बीच यदि आपके रस्ते में जाम या कोई रुकावट आ जाती है तो आप रास्ता तभी बदलेंगे जब आपको पता होगा कि दूसरा रास्ता आपकी मंजिल की तरफ ही जाता है। अगर ऐसा नहीं है तो आप वहां खड़े होकर जाम हटने का इन्तजार करते हैं या फिर उसे हटाने के लिए खुद प्रयास करते हैं।

क्योंकि यदि आप गलत रस्ते पर चले जाते हैं तो इस से आपका समय और शक्ति दोनों व्यर्थ जायेंगे। इसके साथ ही आपको अपना अतिरिक्त समय देने के साथ अधिक उर्जा भी लगानी होगी।

लक्ष्य की तरफ बढ़ते हुए जब जीवन में परेशानियाँ आती हैं या कोई रुकावट आती है तो हम उसे सुलझाने का प्रयास करते हैं। इस कारन हमारे अन्दर एक आत्मविश्वास बना रहता है और वो दुःख-तकलीफ हमें ज्यादा देर तक रोक नहीं पाते। हम निरंतर प्रयास करते रहते हैं कि हमें आगे बढ़ना है क्योंकि हमें अपना लक्ष्य प्राप्त करना है।

इंधन ख़त्म होने का ये अर्थ था कि जब आपके जीवन में आपके साथ कोई दुखद घटना घटती है तो आप कई बार उस घटना के कारन जीवन में एक स्थान पर ही ठहर जाते हैं। ऐसे में यदि आपके पास लक्ष्य हो तो आप उस घटना से जल्दी उबर सकते हैं और दूसरे लोगों के सामने भी एक नई मिसाल रख सकते हैं। कुल मिलकर यदि आपको पता होगा आपको कहाँ जाना है तो आप कार के पास नहीं बैठे रहेंगे बल्कि पैदल ही अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ देंगे।

इस लेख से तो यही निष्कर्ष निकलता है कि लक्ष्य होगा तो आपका जीवन सही ढंग से चलेगा। यदि लक्ष्य नहीं होगा तो आपके जीवन के साथ आप भी भटकते रहेंगे और कहीं न पहुँच पाएँगे।

यदि आपको यह लेख अच्छा लगा और आपको लगा कि ये आपके जीवन को बदल सकता है या फिर आपको इसमें कोई कमी लगी तो बेझिझक अपनी राय कमेंट बॉक्स में दें।

धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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