नशा मुक्ति अभियान को समर्पित स्लोगन भाग – 2 | Nasha Virodhi Slogans

प्रिय पाठकों, 29 अक्टूबर को हमने नशा मुक्ति स्लोगन का एक संग्रह प्रकशित किया था। जिसका उद्देश्य नशा मुक्ति अभियान में हमारा योगदान डालना था। एक लेखक के लिए सबसे बड़ी प्रशंसा यही है कि पाठक उसे पढ़ रहे हों। नशा मुक्ति स्लोगन के पहले हिस्से की लोकप्रियता के कारन ही हमने नशा मुक्ति स्लोगन का एक और संग्रह तैयार किया है। यह संग्रह भी नशा मुक्ति अभियान को समर्पित स्लोगन का है।

नशा मुक्ति अभियान को समर्पित स्लोगन

नशा मुक्ति अभियान को समर्पित स्लोगन

1. आज तो बस होना ये हिसाब जरूरी है,
शराब जरूरी है या किताब जरूरी है।

2. आज नहीं सुधरा जो तू तो अंत काल पछताएगा,
आज नशा जो खाता तू है, कल तुझको नशा ये खायेगा।

3. नशा जो करता है इन्सान, बन जाता है बेईमान,
इज्ज़त न रहती उसकी और न ही रहता धर्म ईमान।

4. नशे की कैसी लत ये देखो, बिगड़ी देश की हालत है,
वो क्या समझें गर्व देश का जो खुद में इक लाहनत है।

5. किसी घर का चिराग न बुझने पाए,
नशे की आग को हम जो बुझायें।

6. छोड़ो, नशे को त्यागो तुम,
होश में आओ जागो तुम।

7. नशा तो ऐसी आफत है,
सीधी मौत को दावत है।

8. नशे का है ये प्रावधान,
मौत से पहले मरे इंसान।

9. छोड़ दो ऐसी यारी को,
जिसमे बंटती नशे की बीमारी है।

10. साक्षरता हम फैलाएँगे,
नशे को जड़ से मिटायेंगे।

11. ये आग नहीं जलने देंगे,
नशे को न पलने देंगे।

12. जन-जन को है अब हमें जगाना,
नशे को है अब दूर भागना।

13. समय रहते नशे को ख़त्म कर दो,
वरना समय आने पर नशा तुम्हें ख़त्म कर देगा।

14. अब तो है बस एक ही सपना,
नशा मुक्त हो भारत अपना।

15. नशे को मिलकर मार भगाओ,
अपनी संस्कृति और सभ्याचार बचाओ।

16. बर्बाद तुम्हें ये कर देगा, दुःख जीवन में भर देगा,
जो ना छोड़ोगे इसको, मौत का तुमको ये घर देगा।

17. इससे बचने का इक उपचार,
दृढ़ संकल्प और शुद्ध विचार।

18. नशे से बनानी दूरी है,
क्योंकि परिवार जरूरी है।

19. वक़्त रहते जो न जागे तुम, तो अनर्थ हो जाएगा,
नशे की लत से तो तुम्हारा, सारा जीवन व्यर्थ हो जाएगा।

20. रोक दो नशे के दरिया में बहते पानी को,
अभी वक़्त है बचा लो देश की जवानी को।

पढ़िए :- नशे पर कविता – ये मेरे देश को क्या हो रहा है?

पाठकों से निवेदन है की ये नशा मुक्ति अभियान को समर्पित स्लोगन फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस, व्हाट्सएप्प और जहाँ भी हो सके ज्यादा से ज्यादा शेयर करें, और समाज को एक कदम सुधार की ओर बढ़ाने में मदद करें।
धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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1 Response

  1. bunty कहते हैं:

    नशा नास का द्वार

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