होली पर छोटी कविताएँ :- होली आयी होली आयी और होली आई उड़े गुलाल

होली, त्यौहार रंगों का और शीत ऋतु को अलविदा कहने का उत्सव। दीपावली के बाद एक और ऐसा त्यौहार जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। एक ऐसा त्यौहार है जब सबके रंग एक जैसे हो जाते हैं और हर तरह का भेदभाव दूर हो जाता है। तो आइये पढ़ते हैं होली पर छोटी कविताएँ :-

होली पर छोटी कविताएँ

होली पर छोटी कविताएँ

1. होली आयी होली आयी

होली आयी होली आयी, रंगों के संग खुशियाँ लायी
ग्रीष्म ऋतु है आने वाली, शीत ऋतु की हुयी विदाई,
होली आयी होली आयी, रंगों के संग खुशियाँ लायी।

धूम मचाएँगे होली में, सारे बच्चे मिलजुल कर
जश्न मनाएंगे होली का, इक दूजे को रंग मल कर,
आधी रात को एक साथ है, सबने आज होलिका जलाई
होली आयी होली आयी, रंगों के संग खुशियाँ लायी।

मारेंगे रंगों की बौछारें भरकर हम पिचकारी से
इस बार न खाली छोड़ेंगे, बैठे हैं हम पूरी तैयारी से,
खेल के होली साथ में हम फिर, खायेंगे भरपेट खूब मिठाई
होली आयी होली आयी, रंगों के संग खुशियाँ लायी।

बैर भुला कर सारे हम, सबको अपने गले लगायेंगे,
बुरी आदतों को इस होली, खुद से दूर भगायेंगे,
ठंडी में हम ठिठुर रहे थे, इसने है आकर जान बचायी,
होली आयी होली आयी, रंगों के संग खुशियाँ लायी।

होली आयी होली आयी, रंगों के संग खुशियाँ लायी
ग्रीष्म ऋतु है आने वाली, शीत ऋतु की हुयी विदाई,
होली आयी होली आयी, रंगों के संग खुशियाँ लायी।

पढ़िए :- होली पर एक छोटी हास्य कहानी


2. होली आई उड़े गुलाल

होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल,
मस्ती में सब झूम रहे हैं, रंगते हुए इक दूजे के गाल,
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

भोलू, पिंटू, रिंकू, भोलू, कोई भी न पहचाना जाए,
कोई किसी को भी मिलता है, मिलते ही वो रंग लगाये
शोर शराबा मचा हुआ है, मचा रहें है सभी धमाल,
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई इनमें भी कोई भेद न भाई
मिल कर सब होली खेलें और मिल कर ही खाते हैं मिठाई
होली के पावन उत्सव पर ये बना रहें है नयी मिसाल
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

तभी हमारे चाचा ने हमको एक कथा सुनाई
कैसे होलिका जली आग में, फिर सबने होली थी मनाई
भक्ति की शक्ति से कैसे हुआ था फिर एक नया कमाल
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

होली की इस बड़ी ख़ुशी में छोटू लाया नयी पिचकारी,
भर के रंग जोर से मारे, भिगा रहा सारे नर-नारी
बच्चे, बूढ़े और जवान सबके रंग उठे हैं बाल
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल,
मस्ती में सब झूम रहे हैं, रंगते हुए इक दूजे के गाल,
होली आई उड़े गुलाल, रंग हरा, पीला और लाल।

पढ़िए :- होली की पौराणिक और ऐतिहासिक कहानियां

होली पर छोटी कविताएँ आपको कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स में अवश्य बताएं।

धन्यवाद।

ये रचनाएँ भी पढ़े..



अच्छा लगा? तो क्यों ना लाइक और शेयर करे..!

हमारे सब्सक्रिप्शन पालिसी जानिए या अपना सब्सक्रिप्शन अपडेट कीजिये।

Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

You may also like...

प्रातिक्रिया दे

हमें ख़ुशी है की हमारे लेख के बारे में आप अपने विचार देना चाहते है, परन्तु ध्यान रहे हम सारे कमेंट को हमारे कमेंट पालिसी के आधार पर स्वीकार करते है।