खुशी पर कविता :- खुशियों के फूल | Hindi Poem On Happiness

( Hindi Poem On Happiness ) खुशी पर कविता “ खुशियों के फूल ” एक शिक्षाप्रद कविता है जिसमें आपस में मिलजुल कर प्रेम से रहने और दूसरों से झगड़ा नहीं करने की सीख दी गई है । इस कविता में अपने सुख का त्याग कर औरों की सहायता करने की बात कही गई है । बच्चों और बड़ों के लिए समान रूप से उपयोगी इस कविता में दूसरों की गलतियों को माफ करने और अपनी कमियों की ओर ध्यान देकर सबके सुख की कामना की गई है ।

खुशी पर कविता

खुशी पर कविता

हम झगड़ें छोटी बातों पर
कभी नहीं यह अच्छी बात,
बात बात पर औरों को भी
सोचें ना देने की मात।

कड़वे बोल कभी ना बोलें
कहें किसी से कभी न झूठ,
बात नहीं होती है अच्छी
करें बहाना जाएँ रूठ।

रहें प्रेम से हम मिलजुल कर
नहीं और में डालें फूट ,
करें मदद हम हाथ थाम कर
जो पीछे जाता है छूट।

कभी किसी का बुरा न सोचें
सबके प्रति हों अच्छे भाव,
कभी किसी का दिल न दुखाएँ
नहीं कुरेदें मन के घाव।

संकट में हम देख अन्य को
नहीं वहाँ से जाएँ भाग,
विपदा से हम उसे उबारें
करके अपने सुख का त्याग।

क्षमा करें औरों की गलती
और सुधारें अपनी भूल,
काँटे चुन औरों के पथ से
बिखरा दें खुशियों के फूल।

– सुरेश चन्द्र ” सर्वहारा “

इस कविता का विडियो यहाँ देखें :-

खुशी पर कविता ( खुशियों के फूल ) | प्रसन्नता पर कविता | Hindi Poem On Happiness | Khushi Par Kavita

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सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"
सुरेश चन्द्र "सर्वहारा"
कोटा, राजस्थान के रहने वाले सुरेश चन्द्र "सर्वहारा" जी स्वैच्छिक सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी (रेलवे) हैं। सुरेश जी एक वरिष्ठ कवि और लेखक हैं। ये संस्कृत और हिंदी में परास्नातक हैं। इनकी कई काव्य पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें नागफनी, मन फिर हुआ उदास, मिट्टी से कटे लोग आदि प्रमुख हैं। इन्होंने बच्चों के लिए भी साहित्य में बहुत योगदान दिया है और बाल गीत सुधा, बाल गीत सुमन, बच्चों का महके बचपन आदि पुस्तकें भी लिखी हैं।

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