योग दिवस पर कविताएँ – योग करें हम योग करें और नित्य जो करता मानव योग

वर्ष के सबसे लम्बे दिन 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व में ही मनाया जाता है। योग का प्रचार आज उरे विश्व में हो चुका है। देश ही नहीं देश के बाहर भी इसको अपनाया जा रहा है। संसार को योग भारत की ही देन है। यह भारतीय संस्कृति का ही एक हिस्सा है। हमें एक भारतीय होने के नाते इस बात पर गर्व होना चाहिए कि भारत की संस्कृति पूरे विश्व में पैर पसार रही है। आइये पढ़ते हैं योग दिवस को समर्पित “ योग दिवस पर कविताएँ ”

योग दिवस पर कविताएँ

योग दिवस पर कविताएँ


योग करें हम योग करें

योग करें हम योग करें
दूर सभी हम रोग करें,
वरदान मिला जो हमको
हम उसका उपयोग करें।

तन-मन स्वस्थ बनाता है
आलस दूर भगाता है,
सदा सुखी वह रहता है
जो इसको अपनाता है।

कहे संजीवनी बूटी
जीवन को दे नए प्राण,
ऐसा आशीर्वाद मिला
होता सभी का कल्याण।

उद्देश्य यही इसका है
सृजन स्वस्थ समाज का हो,
भविष्य बनेगा बेहतर
ध्यान यदि बस आज का हो।

संदेश यही फैलाओ
इसको सारे लोग करें,
वरदान मिला जो हमको
हम उसका उपयोग करें।

योग करें हम योग करें
दूर सभी हम रोग करें।

पढ़िए :- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर निबंध


नित्य जो करता मानव योग

नित्य जो करता मानव योग
रहे जीवन में सदा निरोग।

चुस्ती फुर्ती वह दिखलाए
आलास उसके पास न आए,
तन मन रहता सदा ही स्वस्थ
लगे कभी न कोई रोग।
नित्य जो करता मानव योग।

पूरे मन से करे जो ध्यान
पाता है वाही सच्चा ज्ञान
जीवन सुखमय बन जाता है
इश्वर संग होता संयोग।
नित्य जो करता मानव योग।

कर सकते सब बूढ़े-बच्चे
आसन होते सारे अच्छे
अपना लेता है जो इनको
उत्तम जीवन लेता भोग।
नित्य जो करता मानव योग।

पढ़िए :- 21 जून, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर स्लोगन

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