दिल ने फिर याद किया :- किसी खास के लौट आने की उम्मीद में कविता

जिदगी में कभी कोई इतना दूर चला जाता है कि हम बस उसके वापस आने की ख्वाहिश ही कर पाते हैं। जोकि कभी पूरी नहीं हो सकती। दिल से हर पल उसके वापस आने की न पूरी होने वाली दुआ निकलती रहती है। ऐसे में वो पुरानी यादें ही जीने का सहारा बन जाती हैं। आइये पढ़ते हैं किसी की याद में लिखी गयी ये कविता :- ” दिल ने फिर याद किया “

दिल ने फिर याद किया

दिल ने फिर याद किया

ख्वाहिश है मेरी कि तुम मेरी जिंदगी बन जाओ
दिल ने फिर याद किया है हो सके तो लौट आओ,
छोड़ो ये शिकवे गिले दिल को दिल से मिलाओ
दिल ने फिर याद किया है हो सके तो लौट आओ।

सपने जो संग सजाये तेरे, वो सारे करने है पूरे
सतरंगी इस दुनिया में बस तेरे ही संग हो सवेरे
मोहब्बत के बादल से बरसे जो पानी
तुम उस पानी की बूंदे हो जाओ
दिल ने फिर याद किया है हो सके तो लौट आओ।



मैं ही नहीं तनहा ये चाँद ये तारे भी तेरी राह तकते हैं
तेरे लिए खुद को क्या ये दुनिया भी बदल सकते हैं,
कब से तड़प रहे हैं तेरी मोहब्बत की आग में
अब तो इस नाचीज पर थोड़ा रहम खाओ
दिल ने फिर याद किया है हो सके तो लौट आओ।

मेरे जीने की वजह और उम्मीद हो तुम
कैसे हार सकता हूँ किसी भी हालात से
आखिर मेरी जीत हो तुम,
चाहता नहीं हूँ मैं तुझे किसी हाल में खोना
ख्वाहिश यही है कि संग मेरे तुम सारी जिंदगी बिताओ
दिल ने फिर याद किया है हो सके तो लौट आओ।

ख्वाहिश है मेरी कि तुम मेरी जिंदगी बन जाओ
दिल ने फिर याद किया है हो सके तो लौट आओ,
छोड़ो ये शिकवे गिले दिल को दिल से मिलाओ
दिल ने फिर याद किया है हो सके तो लौट आओ।



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Sandeep Kumar Singh

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