एकतरफा मोहब्बत :- पहली मोहब्बत के अनकहे जज़्बात कविता

जिंदगी बड़ी अजीब है। जो सोचो वो होता नहीं और जो हो जाता है वो सोचा नहीं होता। कई बार पहली मोहब्बत इस तरह होती है कि बस हो जाती है लेकिन पता नहीं चलता। और जब पता चलता है तो दिल इज़हार करने से डरता है। ऐसी मोहब्बत को एकतरफा मोहब्बत का नाम दिया जाता है। कुछ अलग ही एहसास होता है इसका। लेकिन अगर समय रहते इसका इजहार न किया जाए तो बाद में बस यादें ही रह जाती हैं। ऐसी ही एक याद को मैं आपके साथ बाँटना चाहता हूँ। आइये पढ़ते हैं :- ‘ एकतरफा मोहब्बत ‘

एकतरफा मोहब्बत

एकतरफा मोहब्बत

न जाने दर्द सा हुआ क्यों मुझको
और दिल भी मेरा रोया है,
पाया ही नहीं था तुझको
तो न जाने कैसे खोया है?
ये दूरियां हम दोनों के दरमियान
पहले दिन से ही थीं
मगर न जाने क्यों
इसका एहसास
तेरे जाने के बाद हुआ।



न जाने कब ये वक्त
बीतता ही चला गया,
न जाने कब तू मेरी
जिंदगी से होकर गुजर गया।

मैं हर रोज ये सोचकर
निकलता था घर से
जो कल न कह सका
वो आज कहूँगा फिर से
बयां कर दूंगा वो सब
जो इस दिल में छिपा रखा है,
मगर न जाने वो पल
कहाँ, कब और कैसे निकल गया।

हाँ मैं इस बात से वाकिफ हूँ
कि अब कभी तुझसे
मुलाकात न होगी,
सजाया करता था मैं जो ख्वाब
अफ़सोस अब वो रात न होगी,
कोई याद भी तो नहीं है
जिसके सहारे खुश हो लूँ मैं
एकतरफा मोहब्बत थी
बर्बाद हो गयी।



मगर तू जब तक
आँखों के सामने था
दिल में एक सुकून सा था,
अब तो बस बेबसी का
आलम हर वक़्त है,
और क्या लिखूं
कुछ समझ नहीं आता,
बस तेरा चेहरा
आँखों के सामने से नहीं जाता,
ये तो बस मैंने अपने जज्बातों को
शब्दों में पिरोया है,
न जाने दर्द सा हुआ क्यों मुझको
और दिल भी मेरा रोया है,
पाया ही नहीं था तुझको
तो न जाने कैसे खोया है?

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आपको यह कविता ‘ एकतरफा मोहब्बत ‘ कैसी लगी हमें अवश्य बतायें। धन्यवाद।

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5 Comments

  1. Avatar Raj
  2. Avatar shakti singh
  3. Avatar Sachhu

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