बच्चों के लिए 10 कविताएँ – छोटी बाल कविताओं का बाल कविता संग्रह

नन्हे-मुन्हे बच्चों के लिए 10 कविताएँ

बच्चों के लिए 10 कविताएँ

बच्चों के लिए 10 कविताएँ

एक खिलौना मुझको ले दो

मैंने भी तो खेलना होता ,
घर में हूँ मैं ही इकलौता,
मुझको मेरी खुशियां दे दो,
एक खिलौना मुझको ले दो ।

छुट्टी वाले दिन खेलूंगा ,
करके सकूल का काम ,
खेल कूदकर माँ की गोदी ,
में करना आराम ,
अव्वल दर्जे पर आऊंगा ,
अपनी कक्षा में देखो ,
मुझको मेरी खुशियां दे दो,
एक खिलौना मुझको ले दो ।

तोड़ूंगा ना ये खिलौना ,
रखूंगा मैं संभाल ,
पढ़ लिखकर होशियार बनेगा ,
आपका नन्हा बाल ,
आपका कहना भी मानूंगा ,
अवसर एक मुझे दो ,
मुझको मेरी खुशियां दे दो,
एक खिलौना मुझको ले दो ।


आम खाऊं मैं पीला – पीला

आम खाऊं मैं पीला – पीला,
अंदर से ये गीला – गीला ,
खाता हूँ खाने के बाद,
खाने में ये बड़ा स्वाद,
गुठली इसकी बड़ी निराली ,
चूसके बनते शक्तिशाली,
रोज़ ही बापू लाते हैं ,
धोकर मुझे खिलाते हैं,
पौष्टिक तत्वों से भरपूर ,
इसको सारे खाओ ज़रूर ,
कम खाओ ना है नुकसान,
खट्टा होता कच्चा आम ,
कहते इसको फ्लों का राजा ,
माँ ने बोला फट से खाजा ।


आसमान और तारे

रात में देखो ख़ूब नज़ारे ,
आसमान और ढेरों तारे ,
कुछ चलते , कुछ रुके हुए ,
चमक रहे हैं लगते प्यारे ,
रात में देखो ख़ूब नज़ारे ,
आसमान और ढेरों तारे ।

सूरज निकला गायब होते ,
बड़े – बड़े और छोटे – छोटे,
कैसे लटके , रहते हैं ये ,
रात को इनको देख निहारें,
रात में देखो ख़ूब नज़ारे ,
आसमान और ढेरों तारे ।

आभा इनकी बहुत निराली ,
ठंडी – ठंडी किरणों वाली ,
टूट के गिरें, मेरी झोली ,
कैसे नीचे हम उतारें ,
रात में देखो ख़ूब नज़ारे ,
आसमान और ढेरों तारे ।

आकृतियां भी ये बनाते,
ध्रुव तारे के साथ हो जाते ,
इनके ऊपर , बैठ जाऊं मैं ,
जाऊं पर किसके सहारे ,
रात में देखो ख़ूब नज़ारे ,
आसमान और ढेरों तारे ।


घर में नन्ही किलकारियां

नन्ही किलकारीयों से,
गूँज उठा है अंगान,
खुशियों से भर गया,
मेरा ये जीवन,
पा लिया हो जैसे,
दबा हुआ खज़ाना,
खुशी में पागल है,
ऐसे ये मेरा मन,
तोतली ज़ुबान से,
अब कोई पुकारेगा,
इंतज़ार उस पल का,
रहेगा अब हरदम ।


तितली पर कविता – तितलियाँ

कैसी हैं तितलियाँ,
बैठीं हैं तितलियाँ,
ख़ूबसूरत तो हैं,
जैसी हैं तितलियाँ,
कैसी हैं तितलियाँ,
बैठीं हैं तितलियाँ ।

छोटी तितलियाँ,
बड़ी तितलियाँ,
फ़ूलों के ऊपर,
हैं चढ़ी तितलियाँ,
मन को हैं भाती,
हैं ऐसी तितलियाँ ,
कैसी हैं तितलियाँ,
बैठीं हैं तितलियाँ ।

काली तितलियाँ,
पीली तितलियाँ,
बारिश में नहाकर,
हुई गीली तितलियाँ,
भंवरों के नशे में,
हैं बहकी तितलियाँ ,
कैसी हैं तितलियाँ,
बैठीं हैं तितलियाँ ।

पकड़ी तितलियाँ,
छोड़ी तितलियाँ,
अकेली तितलियाँ,
एक जोड़ी तितलियाँ,
बच्चों को देखकर,
हैं सहमी तितलियाँ ,
कैसी हैं तितलियाँ,
बैठीं हैं तितलियाँ ।


कुदरत का वरदान हैं बच्चे

कुदरत का वरदान हैं बच्चे,
माँ – बाप की जान हैं बच्चे,
इनके मन भगवान् है बस्ता,
फ़िर कैसे शैतान हैं बच्चे,
कुदरत का वरदान हैं बच्चे ।

हर देश का है भविष्य इनसे,
पूछलो जाकर मर्ज़ी जिनसे,
फ़र्क किया ना इनमें किसी ने,
सारे एक समान हैं बच्चे,
कुदरत का वरदान हैं बच्चे,
माँ – बाप की जान हैं बच्चे ।

बच्चा होना हर कोई चाहे,
पर मुश्किल बच्चों की राहें,
पैदा होने से लेकर अब तक,
पलते नहीं आसान हैं बच्चे,
कुदरत का वरदान हैं बच्चे,
माँ – बाप की जान हैं बच्चे ।

बच्चों पर बोझा ना डालो,
बच्चों को अच्छे से पालो,
ध्यान रखो हर वक़्त उनका,
क्यूंकि अभी नादान हैं बच्चे,
कुदरत का वरदान हैं बच्चे,
माँ – बाप की जान हैं बच्चे ।


बारिश आई चलो नहाएं

बारिश आई चलो नहाएं ,
इस बारिश में धूम मचाएं ,
काले बादल घनघोर घटाएँ ,
बारिश आई चलो नहाएं ।

अपने सखी सखा संग खेल ,
हम आनंद उठाएंगे ,
इस बारिश में डूब – डूब कर ,
गीत प्यार का गाएंगे ,
मज़ा लें इसका सारे बच्चे ,
आओ उन्हें बुलाएं ,
काले बादल घनघोर घटाएँ ,
बारिश आई चलो नहाएं ।

देखो – देखो कितने पक्षी ,
होकर गीला आए हैं ,
मस्ती में ये झूम रहे हैं ,
लगता ख़ूब नहाए हैं ,
हम भी इनसे कम नहीं हैं ,
आओ इन्हें दिखाएं ,
काले बादल घनघोर घटाएँ ,
बारिश आई चलो नहाएं ।

बारिश में नहाने के बाद ,
साफ पानी से नहाओ ,
करके अपनी मस्ती पूरी ,
घर पर लौट आओ ,
बीमार ना हमको कर डालें ,
जो ठंडी चलें हवाएं ,
काले बादल घनघोर घटाएँ ,
बारिश आई चलो नहाएं ।


घर में है में एक बिल्ली काली

बचपन में एक बिल्ली काली,
भूरी – भूरी आँखों वाली,
छोटे बच्चे देख थे डरते,
माँ देती है दूध की प्याली,
घर में है में एक बिल्ली काली ।

उसके भी हैं छोटे बच्चे,
प्यारे – प्यारे अच्छे – अच्छे,
बड़ी शरारत करते हैं हम,
बुद्धि से हम अभी हैं  कच्चे,
कितनी बार तो खेलते हुए,
आँखों में है मिट्टी डाली,
घर में है में एक बिल्ली काली ।

उसको सभी हैं कहते मौसी,
जितने भी हैं आस – पड़ोसी,
मेरी माँ उसे भूआ बताती,
रिश्तेदारी ऐसे होती,
बचपन की ये बातें जान,
बड़ी ही होती हैं निराली,
बचपन में एक बिल्ली काली,
घर में है में एक बिल्ली काली ।


देश की बेटियों के नाम

मेरे नन्हे कदमों को,
आगे बढ़ जाने दो,
मैं जीना चाहती हूँ,
मुझे बाहर आने दो,
मैं एक छोटी गुड़िया हूँ,
क्या है कसूर मेरा,
इस दुनियां में आकर,
कुछ कर दिखाने दो ।

मैं पढूंगी लिखूंगी ,
बेटों की तरह ,
मैं भी तो प्राणी हूँ ,
तुम समझो तो ज़रा ,
मुझे ज़िन्दग़ी जीने का ,
अब हक जताने दो ,
मेरे नन्हे कदमों को,
आगे बढ़ जाने दो ।

मुझसे संसार चले,
मेरा चलना मुश्किल,
तो कौन निकलेगा ,
इस बात का हल,
चलो मुझको ही मेरी,
किस्मत आजमाने दो ,
मेरे नन्हे कदमों को,
आगे बढ़ जाने दो ।

तुम क्यों देते हो ,
बेटों को हक ज़्यादा ,
मेरी नारी शक्ति का ,
मत टूटने देना धागा ,
अपनी हस्ती को यशु ,
मुझे ही बच जाने दो ,
मेरे नन्हे कदमों को,
आगे बढ़ जाने दो ।


सब पढ़कर बनो महान बच्चों

सब पढ़कर बनो महान बच्चों,
पढ़ने में ही शान बच्चों ।

पूरी करो सब अपनी शिक्षा,
प्राप्त करो ज्ञान बच्चों ।

माता – पिता भी गर्व करें,
रौशन करदो नाम बच्चों ।

पढ़कर सब अच्छा पद लो,
छोड़ो काम नादान बच्चों ।

मेहनत करो और आगे बढ़ो,
कह रहे यशु जान बच्चों ।

पढ़िए :- शिक्षक दिवस पर बाल कविता “भगवान समान वो शिक्षक हैं”


यशु जानयशु जान (9 फरवरी 1994-) एक पंजाबी कवि और अंतर्राष्ट्रीय लेखक हैं। वे जालंधर शहर से हैं। उनका पैतृक गाँव चक साहबू अप्प्रा शहर के पास है। उनके पिता जी का नाम रणजीत राम और माता जसविंदर कौर हैं। उन्हें बचपन से ही कला से प्यार है। उनका शौक गीत, कविता और ग़ज़ल गाना है। वे विभिन्न विषयों पर खोज करना पसंद करते हैं।

उनकी कविताएं और रचनाएं बहुत रोचक और अलग होती हैं। उनकी अधिकतर रचनाएं पंजाबी और हिंदी में हैं और पंजाबी और हिंदी की अंतर्राष्ट्रीय वेबसाइट पर हैं। उनकी एक पुस्तक ‘ उत्तम ग़ज़लें और कविताएं ‘  के नाम से प्रकाशित हो चुकी है। आप जे. आर. डी. एम्. नामक कंपनी में बतौर स्टेट हैड काम कर रहे हैं और एक असाधारण विशेषज्ञ हैं।

उनको अलग बनाता है उनका अजीब शौंक जो है भूत-प्रेत से संबंधित खोजें करना, लोगों को भूत-प्रेतों से बचाना, अदृश्य शक्तियों को खोजना और भी बहुत कुछ। उन्होंने ऐसी ज्ञान साखियों को कविता में पिरोया है जिनके बारे में कभी किसी लेखक ने नहीं सोचा, सूफ़ी फ़क़ीर बाबा शेख़ फ़रीद ( गंजशकर ), राजा जनक,इन महात्माओं के ऊपर उन्होंने कविताएं लिखी हैं।

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