जिंदगी के मैदानों में – प्रेरक कविता | Inspirational Hindi Poem

Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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2 लोगो के विचार

  1. ghanshyam kumar says:

    App ke es kabita se hame jindgi ka ashli matlab samajh me ata hai.kahi dhup to kahi chaya hai prabhu ki ahi maya hai.kahi gam to kahi khushi hai.jindgi ki ahi maja hai.enshano ko nahi milta road chalne ko janwaro ko milta hai a/c me ghumne ko.mushkrate hai log dushro ki mushibat par apni jindgi chor aate hai.makhane par.

    • धन्यवाद, ghanshyam kumar ji…..आपकी कविता भी बहुत अच्छी थी। इसी तरह हमारे साथ बने रहें। आपका बहुत-बहुत आभार।

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