जिंदगी के मैदानों में – प्रेरक कविता | Inspirational Hindi Poem

पेश है एक प्रेरक कविता – जिंदगी के मैदानों में।

प्रेरक कविता – जिंदगी के मैदानों में

jindagi ke maidano me प्रेरक कविता

अजीब सी धुन बजा रखी है
जिंदगी ने मेरे कानों में,
कहाँ मिलता है चैन
पत्थर के इन मकानों में।
बहुत कोशिश करते हैं
जो खुद का वजूद बनाने की
हो जाते हैं दूर अपनों से
नजर आते है बेगानों में।

हस्ती नहीं रहती दुनिया में
इक लंबे दौर तक,
आखिर में जगह मिलती है
उन्हें कहीं दूर श्मशानों में।
न कर गम कि
कोई तेरा नहीं,
खुश रहने की राह है
मस्ती के तरानों में

जान ले कि दुनिया
साथ नहीं देती,
कोई दम नहीं होता
इन लोगों के अफसानों में।
क्यों रहता है निराश
अपनी ही कमजोरी से
झोंक दे सब ताकत अपनी
करने को फतह मैदानों में।

⇒पढ़िए- जिंदगी क्या है? – जिंदगी पर कविता⇐

खुद को कर दे खुदा के हवाले
ऐ इंसान
कि असर होता है
आरती और आजानों में,
करना है बसर तो
किसी की खिदमत में कर
वर्ना क्या फर्क है
तुझमें और शैतानों में।

करना है तो कर गुजर कुछ
किसी और की ख़ातिर
बन जाए अलग पहचान
तेरी इन इंसानों में
बन जाए अलग पहचान
तेरी इन इंसानों में।

[social_warfare]


ये प्रेरक कविता आपको कैसी लगी हमें जरुर बताये, और दुसरो तक भी शेयर करे।

धन्यवाद। तबतक पढ़े ये प्रेरक लेख-

ऐसे ही प्रेरक कविता और कहानी अपने इनबॉक्स में पाइए, नीचे सब्सक्राइब करे-

हमसे जुड़िये
हमारे ईमेल सब्सक्राइबर लिस्ट में शामिल हो जाइये, और हमारे नये प्रेरक कहानी, कविता, रोचक जानकारी और बहुत से मजेदार पोस्ट सीधे अपने इनबॉक्स में पाए बिलकुल मुफ्त। जल्दी कीजिये।
We respect your privacy.

 

Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

You may also like...

2 लोगो के विचार

  1. ghanshyam kumar says:

    App ke es kabita se hame jindgi ka ashli matlab samajh me ata hai.kahi dhup to kahi chaya hai prabhu ki ahi maya hai.kahi gam to kahi khushi hai.jindgi ki ahi maja hai.enshano ko nahi milta road chalne ko janwaro ko milta hai a/c me ghumne ko.mushkrate hai log dushro ki mushibat par apni jindgi chor aate hai.makhane par.

    • धन्यवाद, ghanshyam kumar ji…..आपकी कविता भी बहुत अच्छी थी। इसी तरह हमारे साथ बने रहें। आपका बहुत-बहुत आभार।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *