मुश्किलें इस जहान में | मुश्किलों भरा देश की हालत पर एक कविता

मित्रों जैसा की हमने पहले भी आप लोगों को यह बताया था कि अगर आप में लिखने की प्रतिभा और रुचि है तो आप अपने लेख, कवितायेँ या अन्य सामग्री आप हम तक पहुंचा सकते हैं। हमारी टीम उसका विश्लेषण करेगी और यदि आपके लेखन को चुना जाता है तो हम उसे अपने ब्लॉग पर जरूर प्रकाशित करेंगे। इसी चीज को आगे बढ़ाते हुए हम गोबिंदप्रीत सिंह जी की अमृतसर के रहने वाले हैं। उनकी कविता “ मुश्किलें इस जहान में ” को हम अपने ब्लॉग पर प्रकाशित करने जा रहे हैं।


मुश्किलें इस जहान में

मुश्किलें इस जहान में

बहुत हो रही है मुश्किलें इस जहान में
कहीं हो रही हैं मौतें व्यापम के जाल में
कहीं हो रहे घोटाले पैसे के माया जाल में
बहुत हो रही हैं मुश्किलें इस जहान में।

कहीं भाई मारता है खून को जमीन की खातिर
कहीं बाप मारता है बेटी को झूठी जमीर की खातिर
कहीं मारता है इंसान इंसानियत को
जीतने के लिए इस जहान में,
बहुत हो रही हैं मुश्किलें इस जहान में।

घर में हो गए हैं बंटवारे कि अब प्यार न रहा मकान में
सो जाते हैं भूखे फुटपाथ पर जिनका होता नहीं कोई जहान में
बेटा सोती माँ को मार जाता है नशे के अभाव में
बहुत हो रही हैं मुश्किलें इस जहान में।

अगर इंसान करे जरा भी ख्याल जहान पर
करे थोड़ी दया तबाह होते जहान पर
खुद समझे और समझाए दूजों को अपनों की खातिर
तो न रहेंगी ए प्रीत सिंह मुश्किलें इस जहान में
बहुत हो रही हैं मुश्किलें इस जहान में।

पढ़िए- स्वच्छ भारत अभियान स्लोगन व नारे


दोस्तों आपको ये कविता कैसी लगी हमें जरूर बताएं। आपके द्वारा दिए गए विचारों से लिखने वालों को और भी प्रेरणा मिलेगी। नये लेखकों का हौसला बढ़ाने के लिए उनके लेखन पर प्रतिक्रिया जरूर दें। यदि आप में भी लिखने की प्रतिभा है और लिखना चाहते हैं तो देर न करें अपनी रचना हम तक पहुँचाए।
धन्यवाद।

पढ़िए ये बेहतरीन कविताये-

ये रचनाएँ भी पढ़े..



अच्छा लगा? तो क्यों ना लाइक और शेयर करे..!

हमारे सब्सक्रिप्शन पालिसी जानिए या अपना सब्सक्रिप्शन अपडेट कीजिये।

Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

You may also like...

2 Responses

  1. रीनू कहते हैं:

    ये कविताएँ बहुत अच्छी और प्रेरणादायी हैं ।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *