प्रेम पर कविता :- लम्हा लम्हा मेरा दिल | Prem Par Kavita

प्रेमिका के प्रेम में लिखी गयी प्रेम पर कविता :-

प्रेम पर कविता

प्रेम पर कविता

लम्हा लम्हा मेरा दिल
तेरी ओर आता है
तेरी सूरत बिना देखे
कहीं न चैन पाता है,
तुझे पाने की चाहत में
नए सपने सजाता है
तुझे दुल्हन बनाने की
ये सौगंध रोज खाता है।

दिन का आलम ना पूछो तुम
बड़ा बेताब रहता है
मोहब्बत में तेरा आशिक
सारी रात जगता है,
खुली आंखों से अब तो ये
तेरे सपने सजाता है
तुझसे मिलन की मुझमे
इक उम्मीद जगाता है।

मेरी दीवानगी बढ़ती है
तेरे होने से जाने मन
मैं अब तक ना समझ पाया
मोहब्बत है या पागलपन,
रंग ऐसा चढ़ा तेरा
जो मेरा नूर बढाता है
ये साजिश है कोई दिल की
जो अपनापन दिखाता है।

उदासी में तेरी अब तो
दिल ये नादान रोता है
रेसम की डोरियों में
तेरे नाम के मोती पिरोता है,
कटता नहीं वक़्त मेरा ये
इंतजार बहुत करवाता है
जो मुझको न मिली तू तो
ये पागल जान गवांता है।

कोई सुध बुध न रहता
न होश मुझे अब रहता है
महफिलों में मुझे अब तो
साथ न कोई मिलता है,
रूठ जाए कभी मुझसे
तो दिल में तड़प उठाता है
तेरे दामन में खुशियों की
दिल बारिश कराता है।

मेरे लब कह रहे तुझसे
कहानी प्रेम की दिलबर
साथ आओ मेरे तुम
निशानी छोड़ चलो प्रियवर,
तुझे बाहों में भरने के
अवसर मुझे दिलाता है
अवसरों को गंवाकर भी
दिल तुझमे समाता है।

मेरी जुबां पे हरदम
तेरा ही नाम रहता है
सुबह शाम हर दिन तो ये
तेरी ही पूजा करता है,
तुझे पाने की ईश्वर से
गुजारिश ये कराता है
कांच सा है जिस्म तेरा
जिसे कोहिनूर बनाता है।

न गिरने दूँ कतरा एक
तेरी आँखों से आँसू का
तेरा हर एक आँसूं तो
लगता है अंश मोती का,
माँग भरने को तेरी ये
मुझमें ललक जगाता है
तुझे दुल्हन बनाने की
मुझमें अलख जगाता है।

पढ़िए :- बारिश और प्रेम की कविता


शिक्षक पर कवितामेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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