पिता पर शायरी | पिता दिवस पर पिता को समर्पित शायरी संग्रह

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प्रिय पाठकों, पिता से संबंधित इस शायरी संग्रह का अर्थ यह नहीं कि मेरे मन में ‘माँ’ के प्रति प्रेम-भाव नहीं है। ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि कुछ दिन पहले मुझे मेरे एक मित्र ने मुझसे यह प्रश्न किया था कि मैं पिता के बारे में ज्यादा क्यों लिखता हूँ? तो मैंने जवाब दिया था कि माँ के बारे में तो सारी दुनिया लिखती है। मेरे पिता जी ज्यादा समय घर से बाहर ही रहते हैं शायद यही कारन है कि मेरे मन में पिता से संबंधित विचार ज्यादा आते हैं। यह बात सबको स्पष्ट रहे कि मेरे लिए माता-पिता दोनों समान हैं। मेरी तरफ से यह ‘पिता पर शायरी’ शायरी संग्रह विश्व के हर पिता को समर्पित है।

पिता पर शायरी

पिता पर शायरी

1.
चट्टानों सी हिम्मत और
जज्बातों का तुफान लिए चलता है,
पूरा करने की जिद से ‘पिता’
दिल में बच्चों के अरमान लिए चलता है।


2.
बिना उसके न इक पल भी गंवारा है,
पिता ही साथी है, पिता ही सहारा है।


3.
न मजबूरियाँ रोक सकीं
न मुसीबतें ही रोक सकीं,
आ गया ‘पिता’ जो बच्चों ने याद किया,
उसे तो मीलों की दूरी भी न रोक सकी।


4.
हर दुःख हर दर्द को वो
हंस कर झेल जाता है,
बच्चों पर मुसीबत आती है
तो पिता मौत से भी खेल जाता है।


5.
बेमतलब सी इस दुनिया में
वो ही हमारी शान है,
किसी शख्स के वजूद की
पिता’ ही पहली पहचान है।


पढ़िए :- पिता पर कविता – बंजर है सपनों की धरती


6.
जलती धूप में वो आरामदायक छाँव है
मेलों में कंधे पर लेकर चलने वाला पाँव है,
मिलती है जिंदगी में हर ख़ुशी उसके होने से
कभी भी उल्टा नहीं पड़ता ‘पिता’ वो दांव है।


7.
उसकी रातें भी जग कर कट जाती हैं
परिवार के सपनों के लिए,
कितना भी हो ‘पिता’ मजबूर ही सही
पर हमारी जिंदगी में इक ठाठ लिए रहता है।


8.
न रात दिखाई देती है
न दिन दिखाई देते हैं,
‘पिता’ को तो बस परिवार के
हालात दिखाई देते हैं।


9.
कमर झुक जाती है बुढ़ापे में उसकी
सारी जवानी जिम्मेवारियों का बोझ ढोकर,
खुशियों की ईमारत खड़ी कर देता है ‘पिता’
अपने लिए बुने हुए सपनों को खो कर।

कुछ शब्द पिता के नाम


10.
परिवार के चेहरे पे ये जो मुस्कान हंसती है,
‘पिता’ ही है जिसमें सबकी जान बस्ती है।

पिता पर शायरी | पिता दिवस पर पिता को समर्पित शायरी संग्रह


11.
बिता देता है एक उम्र
औलाद की हर आरजू पूरी करने में,
उसी ‘पिता’ के कई सपने
बुढ़ापे में लावारिस हो जाते हैं।


12.
सख्त सी आवाज में कहीं प्यार छिपा सा रहता है
उसकी रगों में हिम्मत का एक दरिया सा बहता है,
कितनी भी परेशानियां और मुसीबतें पड़ती हों उस पर
हंस कर झेल जाता है ‘पिता’ किसी से कुछ न कहता है।


13.
तोतली जुबान से निकला पहला शब्द
उसे सारे जहाँ की खुशियाँ दे जाता है,
बच्चों में ही उसे नजर आती है जिंदगी अपनी
उनके लिए तो ‘पिता’ अपनी जिंदगी दे जाता है।


14.
उसके लफ्जों को कभी गलत मत समझना
कि उसके हर अलफ़ाज़ में एक गहराई होती है,
न समझना उसकी हरकतों को अपने लिए परेशानियाँ तुम
तुम्हारे लिए तो ‘पिता’ ने दिल में एक दुनिया बसाई होती है।


15.
उसके हाथ की लकीरें बिगड़ गयी
अपने बच्चों की किस्मतें बनाते-बनाते,
उसी ‘पिता’ की आंखों में आज
कई आकाशों के तारे चमक रहे थे।

इस शायरी संग्रह का विडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें :-


पढ़िए :- जीवन में पिता का महत्व बताते ” पिता पर दोहे “


‘पिता पर शायरी’ शायरी संग्रह आपको कैसा लगा? अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

पढ़िए पिता पर अन्य बेहतरीन रचनाएं :

 धन्यवाद।


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26 thoughts on “पिता पर शायरी | पिता दिवस पर पिता को समर्पित शायरी संग्रह”

  1. Avatar

    Ji Mujhe ye Shayari Apne youtube channel ke Video mein Bolni hai Iske Liye kya mujhe ye Link hi dena hoga ki aur bhi kuch kerna hoga.

  2. Avatar

    Bahut badiya sir man ko laga hamare bhi nahi h ab vo hame chhod gaye kya ham apki likhi hui kavita ko le sakte h

    1. Sandeep Kumar Singh
      Sandeep Kumar Singh

      आनंद जी आप हमारी कविता को हमारे लिंक के साथ किसी भी सोशल साईट पर प्रकाशित कर सकते हैं लेकिन किसी वेबसाइट या यूट्यूब पर नहीं….धन्यवाद….

  3. Avatar

    Dhanyawaad sir. I lost my papa last year. Now in tears when read this beautiful poetry. Aisa laga aapne mere dil ki baat likh di hai.

  4. Avatar
    अनिल कुमार

    संदीप जी आपको दिल की गहराईयों से नमन्
    बहुत अच्छा लिखते है आप।।।

    आपकी शायरियां बहुत अच्छी लगी।

    आशा करते है आप अच्छे से भी अच्छा लिखते जाये।।

    1. Sandeep Kumar Singh

      बहुत-बहुत धन्यवाद अनिल कुमार जी। आप जैसे पाठकों का प्यार ही लिखवा रहा है मुझे ये सब। इसी तरह हमे प्रोत्साहित करते रहिये जिससे हम और भी सुन्दर रचनाएँ आपके लिए लाते रहें। धन्यवाद।

  5. Avatar

    Pita maata aur putri ke liye bahut kuch likha gaya hai. Putra ke liye bhi kuch likhe. Putra maa baap le liye kitne acche sapne sajata hai. Putra jo chahta hai ki uski safalta uske maa baap dekhe.

    1. Sandeep Kumar Singh
      Sandeep Kumar Singh

      बिल्कुल सही बात कही आपने पूजा जी। किसी की कमी का एहसास हमें उसके न होने पर होता है। यही बात माता पिता के लिए भी लागू होती है।

    1. Sandeep Kumar Singh
      Sandeep Kumar Singh

      बिल्कुल सही बात कही रामानुज साहू जी आपने।

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