पिता क्या है ? पिता के महत्व पर एक छोटी कविता | Hindi Poem On Father

हमारे जीवन में हम हर चीज की एक परिभाषा पढ़ते हैं।  ये परिभाषाएं तथ्य पर आधारित होती हैं। लेकिन भारत ऐसा देश है जहाँ कुछ परिभाषाएं भावनाओं से बन जाती हैं। जैसे प्यार की परिभाषा, भावनाओं की परिभाषा आदि। ऐसी ही एक परिभाषा मैंने भी “ पिता क्या है ?” के रूप में पिता पर कविता लिखने की कोशिश की है। पिता जो हमारी जिंदगी में वो महान शख्स है जो हमारे सपनों को पूरा करने के लिए अपनी सपनो की धरती बंजर ही छोड़ देता है। आइये पढ़ते हैं उसी पिता के बारे में :-

पिता क्या है?

पिता क्या है -Pita Par Kavita

पिता एक उम्मीद है, एक आस है
परिवार की हिम्मत और विश्वास है,
बाहर से सख्त अंदर से नर्म है
उसके दिल में दफन कई मर्म हैं।

पिता संघर्ष की आंधियों में हौसलों की दीवार है
परेशानियों से लड़ने को दो धारी तलवार है,
बचपन में खुश करने वाला खिलौना है
नींद लगे तो पेट पर सुलाने वाला बिछौना है।



पिता जिम्मेवारियों से लदी गाड़ी का सारथी है
सबको बराबर का हक़ दिलाता यही एक महारथी है,
सपनों को पूरा करने में लगने वाली जान है
इसी से तो माँ और बच्चों की पहचान है।

पिता ज़मीर है पिता जागीर है
जिसके पास ये है वह सबसे अमीर है,
कहने को सब ऊपर वाला देता है ए संदीप
पर खुदा का ही एक रूप पिता का शरीर है।


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Sandeep Kumar Singh

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73 Responses

  1. RAM NARAYAN KASHYAP HARDOI UP कहते हैं:

    I Love My Father

  2. जमशेद आज़मी कहते हैं:

    पिता को समर्पित बहुत ही सुंदर और संजीदा किस्‍म की रचना प्रस्‍तुत की है आपने। इसके लिए आपका धन्‍यवाद।

  3. Anand Pal singh कहते हैं:

    Very nice line for all children

  4. Jayanti Dewangan कहते हैं:

    Thanks for these Dedicating song

  5. drverma कहते हैं:

    पिता का महत्व बहुत ही अच्छा है मुझे भी इसका एहसास
    16 साल बाद हुआ जब मुझे दो जुड़वां लडकियां हुई आज मेरे एक संतुष्ट और खुश पिता हुं

    • Sandeep Kumar Singh Sandeep Kumar Singh कहते हैं:

      सबसे पहले आपको बहुत-बहुत बधाई हो। पिता तो भगवान की एक ऐसी देन है जो हमारे जीवन में साथ रहकर हमे सद्मार्ग पर चलने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। आशा है आपको भी अपने पिता की महानता की अनुभूति हो गयी होगी। एक बार फिर से आपको बधाई व ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद।

  6. लखन साहू कहते हैं:

    बहुत सुन्दर !

  7. puneetchaubey कहते हैं:

    aap ko thanks kehna chahta hu aapne muje mere papa ki yaad dila di….

  8. Raja patel कहते हैं:

    Hum bahut khus nasibe hai ki humara pass papa ji hai

  9. Shubham कहते हैं:

    This poem is best.
    I love u papa

  10. sonika jain कहते हैं:

    a very heart touching and commendable poem

  11. सुप्रिया कहते हैं:

    पिता है तो हम है nice thought bhai

  12. सुप्रिया कहते हैं:

    I love my Father

  13. दिनेश सिदार कहते हैं:

    पिता जी पर समर्पित बहुत ही सुन्दर पंक्तियां संजोए सर आपने
    सर्वप्रथम आपको बहुत बहुत धन्यवाद
    एवम काश कि ऐसा होता कि हर इंसान के मन मे पिता एवं माता के प्रति अपना फर्ज समझते हुए उनके प्रति इतनी आदर होती कि वृद्धा आश्रम की आवश्यकता ना होती

  14. दिनेश सिदार कहते हैं:

    माॅ एवम बाबूजी को सादर चरण वंदन

  15. Rajeeva Mohan Sharma कहते हैं:

    Pita hai to bhagwan hai, pita nahi to bekar saara jahan hai, pita hamari aas hai, pita hai to humari San jarroraten khaas hai, Pita humare liye chnah hai,pita hai to aasan humari raah hai. mere pita aap jaha bhi ho sada swasth aur khush rahna, Him baccho par aasheervaad banaye rakhna. Galtiya Jo hui hohumsabko chama karna.Charno me pranam.

  16. Rajeeva Mohan Sharma कहते हैं:

    Papa ji aap ko father's day par mery subhkamnayen. Varenya Bhatt, (Fareedabad)

  17. Rajeeva Mohan Sharma कहते हैं:

    Sandeepji aapki kavita aapka maa baap ke prati kitna prem hai batati hai, aisi kavita tabhi banti hai.

  18. shivam Mishra कहते हैं:

    Pita Parmeshwar hai

    पितृ देवो भव

  19. श्याम कहते हैं:

    मैं आपसे वादा करता हु इस कविता का पाठ मेरे भजन संध्या के कार्यक्रम में जरूर करूँगा संदीप जी

    • Sandeep Kumar Singh Sandeep Kumar Singh कहते हैं:

      श्याम जी ये तो आपने बहुत बड़ी बात कह दी। मैं इतना काबिल कहाँ की मेरी रचना किसी संध्या भजन का हिस्सा बने। आपको यह रचना अच्छी लगी वही मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। आपका अति धन्यवाद।
      इसी तरह हमारे साथ बने रहें।

  20. Shankar tailor कहते हैं:

    पिता रोटी कपडा और मकान है
    पिता नन्हें से परिंदे का बड़ा सा आसमान है
    पिता है तो माँ की बिंदी और सुहाग है
    पिता है तो सारे सपने अपने है
    पिता है तो बाजार के सारे खिलौने अपने है………..

  21. अरविन्द कुमार आर्य कहते हैं:

    संदीप जी आपकी कविता ने खासकर पिता पर लिखी गयी कविता । समाज में महिला उत्थान के जमाने में एक पिता की भूमिका को पुनः जागृत करने का काम किया है ।

  22. अरविन्द कुमार आर्य कहते हैं:

    समाज में परिवर्तन में आप जैसे कवियों की महत्वपूर्ण भूमिका सदियों से रही है ।
    आज हमारा पुरुष समाज एकतरफा महिला कानून के बोझ से दबा महसूस कर रहा है ।
    इस नारी शशक्तिकरण की होड़ में बुजुर्गो के खिलाफ अत्याचार बढ़ता जा रहा है । उनके सम्मान में कमी आई है । पुरुष हर तरफ कानून के मार से दंश झेल रहा है।
    चाहे झूठे दहेज़ के मुक़दमे हो, घरेलु हिंसा,बलात्कार या छेड़छाड़ का मुकदमा, इसमें झूठे शिकायतों की तादात ज्यादा है ।
    हमारा न्यायालय भी पंगु हो गया है। न्याय मिलने में सालो साल लग जाते हैं ।
    कृपया कर इस विषय पर भी कविता लिखे।
    बेटी और बहु की रट लगाते कही हम पुत्र और बेटे को दरकिनार न करदे उनके अधिकारो से वंचित न करें ।

  23. Jitendra kumar कहते हैं:

    Bhut khub
    Nice line yr
    Dil khush ho gya

  24. uttam Thakur कहते हैं:

    आज जब सर से पिता का साया उठा तब इस कविता का महत्त्व समझ में आया !

  25. sandeep kumar कहते हैं:

    nice Fathers lines I love you papa

  26. Sandeep bhargava कहते हैं:

    Sir mere pita ji nhi he mene ye kbita jb padi jb mujhe unki bhut yaad aarhi thi atynt sundr or bhabuk he

  27. Jeetendra Verma कहते हैं:

    बहुत बढ़ियाा संदीप जी

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