मदर्स डे पर कविता :- मातृ दिवस पर माँ को समर्पित एक बेहतरीन रचना

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माँ, जो इंसान को जन्म देती है। इस संसार को प्रगतिशील करती है। विश्व को महान संत, वैज्ञानिक, योद्धाओं को जन्म देती  है। इतना ही नहीं एक माँ अपनी औलादों के लिए न जाने कितने त्याग करती है। यदि इस धरती पर कोई भगवान् है तो वह माँ ही है। क्योंकि वही है जो अपनी संतानों की हर जरूरत को पूरी करने की ताकत रखती है। उसी माँ को समर्पित है ” मदर्स डे पर कविता ”

मदर्स डे पर कविता

मदर्स डे पर कविता

माँ की ममता, माँ की समता ।।
माँ में क्षमता माँ उत्तमता ।।

माँ की प्रीत, माँ का संगीत।।
माँ निभाती जग की रीत ।।

माँ का राग, माँ का अनुराग।।
माँ से मिलता सबको भाग।।

माँ देती सपनों को गीत।।
माँ बिसराती पीत अतीत।।

माँ की होती ऊँची उड़ान।।
माँ भविष्य का उन्वान ।।

माँ वर्तमान की पहचान ।।
माँ तो हर युग में महान ।।

सँस्कार सब माँ सिखलाती ।।
अँधकार में माँ राह दिखलाती ।।

माँ करती घर द्वार उजाला ।।
माँ दो कुल का मान निराला ।।

माँ की जीत, माँ की हार।।
माँ का दुलार, माँ की फटकार।।

माँ का प्यार, माँ का आधार।।
माँ ही जग की करतार।।

तुम सोते माँ जग जाती ।।
तुम जगते माँ उठ जाती ।।

तुम रोते माँ हिल जाती ।।
तुम हँसते माँ खिल जाती ।।

माँ का कोई देश नहीं होता ।।
माँ का कोई वेश नहीं होता ।।

माँ की नहीं भाषा कोई ।।
माँ की नहीं परिभाषा कोई ।।

चाहे धरा अंबर छू आओ।।
चाहे पार समुंदर जाओ।।

माँ को बच्चा प्यारा लगता।।
सुन्दर चाँद सितारा लगता।।

माँ का कोई धर्म नहीं होता।।
माँ से कोई परम नहीं होता ।।

माँ की आँख परख सब लेती ।।
माँ की आँख भरम रख लेती ।।

माँ बनकर तुम माँ को जानो ।।
माँ सबसे  सुंदरतम होती ।।

✍ अंशु विनोद गुप्ता

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अंशु विनोद गुप्ता जी अंशु विनोद गुप्ता जी एक गृहणी हैं। बचपन से इन्हें लिखने का शौक है। नृत्य, संगीत चित्रकला और लेखन सहित इन्हें अनेक कलाओं में अभिरुचि है। ये हिंदी में परास्नातक हैं। ये एक जानी-मानी वरिष्ठ कवियित्री और शायरा भी हैं। इनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें गीत पल्लवी प्रमुख है।

इतना ही नहीं ये निःस्वार्थ भावना से साहित्य की सेवा में लगी हुयी हैं। जिसके तहत ये निःशुल्क साहित्य का ज्ञान सबको बाँट रही हैं। इन्हें भारतीय साहित्य ही नहीं अपितु जापानी साहित्य का भी भरपूर ज्ञान है। जापानी विधायें हाइकू, ताँका, चोका और सेदोका में ये पारंगत हैं।

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