गणेश चतुर्थी पर कविता – मंगलमूर्ति गजानना | Ganpati Kavita

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आप पढ़ रहे हैं गणेश चतुर्थी के अवसर पर विघ्नहर्ता मंगलकर्ता गणपति जी को समर्पित ( Ganesh Ji Ki Kavita ) ” गणेश चतुर्थी पर कविता ”

गणेश चतुर्थी पर कविता

गणेश चतुर्थी पर कविता

मंगलमूर्ति गजानना,
सुखकर्ता गणनाथ ।
जग में उसका नाम हो,
तुम हो जिसके साथ ।।

शिव-गौरी के लाल जो,
लम्बोदर कहलाय ।
मन से जो पूजा करे,
भक्त वो बुद्धि पाय ।।

लड्डू जिसकोे प्रिय लगे,
गणपति हे एकदंत ।
सबपे हो तेरी कृपा,
तेरी कथा अनंत ।।

आज्ञा पालन मातु के,
दीन्हा शीश कटाय ।
वचन दिया जो मात को,
टूट नहीं वो पाय ।।

चरणों में माँ-बाप के,
बसते चारों धाम ।
दुनियां को यह सीख दी,
बारम्बार प्रणाम ।।

जग में तब से आपकी,
पहली पूजा होय ।
ले आपका नाम शुरू,
काज करे सब कोय ।।

विघ्नहर्ता तुम पर है,
भक्तन को विश्वास ।
बड़ी कृपा हो गर मिले,
शुभ चरणों में वास ।।

गणपति बप्पा मोरया,
गूंजे नभ में आज ।
मूषक पर आ बैठके,
मंगल कर सब काज ।।


पढ़िए :- गणेश चतुर्थी और उनके जन्म की कथा भाग – १ 


विनय कुमारयह रचना हमें भेजी है आदरणीय विनय कुमार जी ने जो की अभी रेलवे में कनिष्ठ व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं।
रचनाएं व अवार्ड: इनकी रचनाएं देश के 50 से अधिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। जिस के फलस्वरूप आप कई बार सम्मानित हो चुके हैं। गत वर्ष 2018 का रेलमंत्री राष्ट्रीय अवार्ड भी रेल मंत्री ने दिया था।
लेखन विद्या: गीत, ग़ज़ल, दोहा, कुण्डलिया छन्द, मुक्तक के अलावा गद्य में निबंध, रिपोर्ट, लघुकथा इत्यादि। तकनीकी विषय मे हिंदी में लेखन।

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2 thoughts on “गणेश चतुर्थी पर कविता – मंगलमूर्ति गजानना | Ganpati Kavita”

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    चरणों में मा बाप के बसते चारो धाम…बहुत ही बढ़िया….धन्यवाद

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