काश तुम समझ पाती :- अधूरे प्यार की कविता | कविता भावनाओं की

जिसे हम खुद से भी ज्यादा चाहते हैं जब वही जिंदगी से बिना कुछ कहे और बिना हमारा दर्द समझे बहुत दूर चला जाता है। तब दिल को एक अजीब से घुटन महसूस होती रहती है और दिल बहुत देर तक उसका इन्तजार करता है लेकिन फिर एक ऐसा वक़्त अत है कि वो शख्स एक गुजरा हुआ वक़्त हो जाता है। उसके बाद उसके लिए दिल में जो भावनाएं रहती हैं वो हरीश चमोली जी ने प्रस्तुत की हैं काश तुम समझ पाती में :-

काश तुम समझ पाती

काश तुम समझ पाती

आसमान की बारिश को
कोई रोक न पाए
जाने वाले हमराही को
अब कौन समझाए,
रिश्तों में कम हुई मिठास
कभी नहीं है बढ़ पाती
हमारे इसी रिश्ते को
काश तुम समझ पाती।

ये तो वक़्त ही है जो
जो नए नए खेल है रचाता
हर रोज किसी बहाने से
मुझे है आजमाता,
अब तुम्हारे बिन
हर रात मुश्किल से हैं कटती
उन्हीं रातों की बात
काश तुम समझ पाती।

काश मेरी तड़प को
तुमने जाना होता
काश इन आंसुओं की
कीमत को पहचाना होता,
कितनी मुहब्बत है तुमसे
ये अब बताई नहीं जाती
मेरी इस मुहब्बत को
काश तुम समझ पाती।

मुझे करके अकेला
तुम यूँ छोड़ न जाती
मेरे आंसुओं की कीमत को
गर तुम पहचान जाती,
सीने में मेरे, गम से तेरे
तकलीफ सहीं नहीं जाती
मेरे सीने के हर गम
काश तुम समझ पाती।

सुनते नहीं हो मेरी
किसी भी बात को तुम
बस भुलाये जा रही हो
हर इक मुलाकात को तुम,
क्या होगा उन वादों का
जो साथ में हमने किये थे
मेरे इन्ही वादों को
काश तुम समझ पाती।

वो कसमें सब छूट गयी
किस्मत भी मेरी सोने लगी
साथ निभाने की वो रस्में
अब खत्म सी थी होने लगी,
मेरे मन की भावनाएं भी अब
हैं कितना और आहत सहती
मेरी इन्ही भावनाओं को
काश तुम समझ पाती।

प्यार की यह नैया मेरी अब
कोई किनारा नहीं है ढूंढती
इस धरती में कहीं भी अब
कोई ठिकाना नहीं ढूंढती,
मेरे दिल की हर धड़कन
तेरी कमी हैं धड़काती
मेरी इन्हीं धड़कनों को
काश तुम समझ पाती।

पढ़िए :- अधूरे प्यार की कविता ‘अतीत का अंतिम संस्कार’


हरीश चमोलीमेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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