किसीकी याद में कविता :- और फिर तेरी याद आयी | Yaad Kavita

किसीकी याद में कविता बताती है कि कैसे जब हम किसी से बिछड़ जाते हैं तो आस-पास की हर चीज उसकी याद दिलाने लगती है। हम उसे जितना भूलना चाहते हैं फिर वो उतना ही याद आता है। आइये पढ़ते हैं इन्हीं भावनाओं से भरी “किसीकी याद में कविता ” :-

किसीकी याद में कविता

किसीकी याद में कविता

देखकर हसीन वादियों को

मन में इक खुशहाली छाई

ओंस की महकती बूंदों ने

थी तेरी सूरत दिखलाई,

अक्स तेरा साफ दिखा मुझे

उस इंद्रधनुष के रंगों में

देखकर उसे गुम हो गए हम

और फिर तेरी याद आयी।

 

सूरज की उजली किरणों में

परछाई तेरी शरमाई

गुनगुनी सी धूप ने मन में

फिर प्रेम की चाहत जगाई,

पेड़ की छावं में बैठ मुझे

बीते लम्हें महसूस हुए

जीवन में बस थी तन्हाई

और फिर तेरी याद आयी।

 

मखमली चमकीली बर्फ पर

सुबह ने जब धूप बिखराई

फिर तेरा मासूम चेहरा

मुझे हर ओर दिया दिखाई,

टहलते हुए बर्फ में मुझे

कुछ किस्सों का अहसास हुआ

सरसराहट हुई तन में जब

और फिर तेरी याद आयी।

 

शाम का मौसम है सुहाना

गगन में इक लालिमा छाई

अस्त होते सूरज को देख

आंखें अपनी थी भर आयी,

जो मोहब्बत सूर्य सी जली

शाम ढलते ही बढ़ने लगी

धड़कनें मेरी बढ़ गयी जब

और फिर तेरी याद आयी।

 

जवां सर्द मौसम ने फिर से

बदन में एक ठिठुरन जगाई

तन्हा भिगो रहा था पलकें

तेरी याद फिर चली आई,

तकिये में किया ख्याल तेरा

रजाई बनी थी परछाई

सुबह फिर टूटा ख़्वाब मेरा

और फिर तेरी याद आयी।

 

साथ न तुझको भाया मेरा

जो मोहब्बत न निभा पाई

छोड़ दिया मुझको ऐसे ही

देकर साथ मुझे तन्हाई,

कैसे जिंदगी काटूँ मैं अब

उम्मीद न तेरे आने की

टूटता हुवा खुद को पाया

और फिर तेरी याद आयी।

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शिक्षक पर कवितामेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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