जिसे इश्क़ की गर बीमारी लगे और रहा दर्द जो भी | ग़ज़ल की दुनिया भाग 3

आप पढ़ रहे हैं ग़ज़ल की दुनिया में दो नई ग़ज़लें “ जिसे इश्क़ की गर बीमारी लगे और रहा दर्द जो भी ”

जिसे इश्क़ की गर बीमारी लगे

जिसे इश्क़ की गर बीमारी लगे

जिसे इश्क़ की गर बीमारी लगे
उसे ख्वाब में हुस्न आरी लगे ।

जो नैनों की हाला में डूबा रहा
उसे दूसरी क्या ख़ुमारी लगे ।

तेरा हिज्र रह रह सताता रहा
खिली चाँदनी तन को भारी लगे ।

करोड़ों का मालिक बड़ी शान का
तिरे दर जो आया भिखारी लगे ।

ग़मे-दिल छुपाकर सुनाई ग़ज़ल
लबों का तबस्सुम हजारी लगे ।

 शजर काट डाले परिंदे ख़फ़ा
बशर हाथ वाला शिकारी लगे ।

रमल खेल पासा पलटवार है
अगर हार जाए जुआरी लगे ।

✍ अंशु विनोद गुप्ता


रहा दर्द जो भी

रहा दर्द जो भी बढ़ा हो रहा है ।
मेरा चाँद मुझसे जुदा हो रहा है ।।

लगी आग दिलकी कहाँ तक बुझायें
हवासों में जीना सज़ा हो रहा है ।

निगाहों पिलाई रहा होश काबिज़
असर बाद दो दिन नशा हो रहा है ।

उठे आँधियों के हुजूमें  कहाँ से
हवा का हुनर भी ख़फ़ा हो रहा है ।

खिला फूल बादे सबा की इनायत
बिना ख़ार वो भी फ़ना हो रहा है ।

अभी से दिया ले हथेली न बैठो
खुदा का अजब सिलसिला हो रहा है ।

मिला सोज़ इतना मुझे होश कब था
मेरा मर्ज़ बढ़कर दवा  हो रहा है ।

✍ अंशु विनोद गुप्ता


अंशु विनोद गुप्ता जी

अंशु विनोद गुप्ता जी एक गृहणी हैं। बचपन से इन्हें लिखने का शौक है। नृत्य, संगीत चित्रकला और लेखन सहित इन्हें अनेक कलाओं में अभिरुचि है। ये हिंदी में परास्नातक हैं। ये एक जानी-मानी वरिष्ठ कवियित्री और शायरा भी हैं। इनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। जिनमें “गीत पल्लवी “,दूसरी पुस्तक “गीतपल्लवी द्वितीय भाग एक” प्रमुख हैं। जिनमें इनकी लगभग 50 रचनाएँ हैं ।

इतना ही नहीं ये निःस्वार्थ भावना से साहित्य की सेवा में लगी हुयी हैं। जिसके तहत ये निःशुल्क साहित्य का ज्ञान सबको बाँट रही हैं। इन्हें भारतीय साहित्य ही नहीं अपितु जापानी साहित्य का भी भरपूर ज्ञान है। जापानी विधायें हाइकु, ताँका, चोका और सेदोका में ये पारंगत हैं।

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