कहानी ईमानदारी का फल :- एक शिक्षाप्रद कहानी | Imandari Ka Inam Kahani

एक देश के सफल और समृद्ध होने के लिए उसके शासक का इमानदार होना बहुत आवश्यक है। यदि वह स्वयं ही भ्रष्ट होगा तो भला अपने राज्य का क्या भला करेगा। इसी संदर्भ में प्रस्तुत है यह कहानी ईमानदारी का फल :-

कहानी ईमानदारी का फल

कहानी ईमानदारी का फल

किसी राज्य में एक राजा रहता था। वह बूढ़ा हो रहा था। अपनी ढलती उम्र को देख कर राजा के मन में अपने उत्तराधिकारी का ख्याल आया। वह चाहता था कि उस राज्य का अगला राजा उसके पुत्र या कोई नजदीकी नहीं बल्कि कोई ऐसा व्यक्ति बने जो सच्चा और नेक इरादे वाला हो। इसीलिए उस राजा ने एक योजना बनाई।

राजा ने अपने राज्य के सभी नौजवानों को बुलाया और उन सबको एक-एक बीज दिया साथ ही कहा,

“यह बहुत ही ख़ास बीज है। मैं चाहता हूँ कि आप सब इस बीज को ले जाएँ औए इस से एक पौधा तैयार करें। एक साल बाद जिस व्यक्ति का पौधा सबसे सुंदर होगा उसे ही इस राज्य का अगला राजा घोषित किया जायेगा।”

यह सुनकर सब बीज लेकर खुशी-ख़ुशी चले गए। उन्हीं नौजवानों में एक नौजवान था राहुल। राहुल ने भी बाकी लोगों की तरह ही बीज ले जाकर एक गमले में बो दिया। लेकिन 3 हफ्ते बीत जाने पर भी राहुल का बीज अंकुरित नहीं हुआ। उसके साथियों के बीजों से बहुत सुंदर-सुंदर पौधे उग गए थे।

राहुल इस बात से चिंतित रहने लगा। उसे लगा कि उसने बीज की साही देखभाल नहीं की जिस कारन वह पौधा नहीं बन सका।वह अब राजा को क्या जवाब देगा। उसके दोस्त उसे अपने पौधों के बारे में बताते लेकिन उसके पास बताने के लिए कुछ नहीं था।

किसी तरह धीरे-धीरे एक साल बीत गया। वह समय आ ही गया जब सबको अपने पौधे लेकर राजा के सामने हाजिर होना था। सभी बहुत उत्साहित थे। मगर राहुल बहुत परेशान था। वह अकेला ही ऐसा था जो खाली गमला लेकर पहुंचा था। जो भी उसे मिलता उसकी हालत पर हँसता।

अंततः इंतजार ख़त्म हुआ और राजा पौधों का निरिक्षण करने लगे। राजा सभी के सुंदर सुसज्जित पौधेदेख रहे थे। राहुल अपने खाली गमले के साथ छिपने का प्रयास कर ही रहा था कि अचानक राजा की नजर उस पर पड़ गयी। उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि राहुल को उनके सामने लाया जाए। या देख राहुल बुरी तरह डर गया। वह सोचने लगा,

“शायद अब राजा मुझे जान से मरवा देगा।”

जब राहुल को राजा के पास लाया गया तो रजा ने घोषणा कि,

“नगरवासियों अपने नए राजा को देख लो।”

राहुल को इस पर विश्वास नहीं हो रहा था। सभी लोग भी हैरान थे। कि राजा ने राहुल को अगला राजा कैसे बना दिया? अभी सब यही सोच ही रहे थे कि राजा ने फिर से बोलना शुरू किया,

“एक साल पहले मैंने सबको जो बीज दिए थे। वह सारे बीज उबले हुए थे। जो कभी उग ही नहीं सकते थे। लेकिन यह बा आप सब को नहीं पता थी। जब आपने देखा कि बीज बोने के बाद भी कोई पौधा नहीं उगा तब आप सब ने दूसरा बीज लेकर उसे बो दिया। सिर्फ एक राहुल ही ऐसा नौजवान है जो पूरी ईमानदारी के साथ खाली गमला लेकर आया है। इसलिए इस राज्य के नेतृत्व के लिए वही सही व्यक्ति है।”

इसके बाद राहुल को उस राज्य का अगला राजा घोषित कर दिया गया।

दोस्तों जिस तरह राहुल को एक पल के लिए लगा था कि ईमानदारी दिखाने के कारण शायद उसे सजा मिलेगी लेकिन हुआ इसके बिलकुल विपरीत। हमारे जीवन में भी बिलकुल ऐसा ही होता है। यदि हम भविष्य की कल्पना कर ईमानदारी का साथ छोड़ देते हैं तो हमें जीवन में निराशा के अलावा कुछ नहीं मिलता। परन्तु यदि हम सच का दामन पकड़े रहते हैं और ईमानदारी से अपना हर काम करते हैं तो उसका फल हमें एक न एक दिन जरूर मिलता है।

आपको कहानी ईमानदारी का फल कैसी लगी? अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स के जरिये जरूर पहुंचाएं।


धन्यवाद।




Sandeep Kumar Singh
Sandeep Kumar Singh
ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं सिर्फ एक ब्लॉगर हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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