छोटी व शिक्षाप्रद कहानी :- शरीर का सबसे श्रेष्ठ और निकृष्ट अंग

छोटी व शिक्षाप्रद कहानी जिसमे आप जानेंगे क्या है शरीर का सबसे श्रेष्ठ और निकृष्ट अंग और क्या है। इसकी महत्वता तो आइये पढ़ते हैं छोटी व शिक्षाप्रद कहानी :-

छोटी व शिक्षाप्रद कहानी

छोटी व शिक्षाप्रद कहानी

बहुत समय पहले की बात है। जब अरब देश में अमीर शेख अपने काम करवाने के लिए गुलाम रखते थे। उसी समय एक शेख के पास लुकमान नमक एक गुलाम था। उसकी और सेख की जोड़ी भारत में लोकप्रिय अकबर और बीरबल की तरह थी।

बीरबल की तरह ही लुकमान भी बहुत बुद्धिमान और चतुर था। अकबर की तरह उसका शेख भी लुकमान से बहुत सारे सवाल पूछता जिसका लुकमान बहुत ही बुद्धिमानी से जवाब देता। उसके पास हर सवाल का एक जवाब होता था।

एक बार शेख ने एक बकरी देखी तो उसके मन में विचार आया और उसने लुकमान से कहा,

“लुकमान जाओ और उस बकरी को मार कर उसके शरीर का सबसे श्रेष्ठ अंग लेकर आओ।”

लुकमान तुरंत गया और जाकर बकरी को मार दिया। उसके बाद उसने बकरी की जीभ काटी और जाकर शेख के आगे रख दी। शेख ने जीभ देखी और फिर से कहा,

“बहुत बढ़िया! अब जाओ और एक बकरी को मार कर उसके शरीर का सबसे निकृष्ट अंग लेकर आओ।”

लुकमान शेख की आज्ञा का पालन करते हुए फिर से एक बकरी को मारने चला गया। बकरी को मारने के बाद एक बार फिर से वो बकरी की जीभ काट लाया। यह देख कर शेख का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया।

“ये क्या मजाक है? एक ही चीज सबसे बढ़िया और सबसे निकृष्ट कैसे हो सकती है?”

शेख गुस्से में आग बबूला होते हुए लुकमान को बोला। तो लुकमान ने शांत स्वभाव से ही जवाब दिया,

“क्यों नहीं हो सकता? एक जीभ ही वो अंग है जो अच्छा बोले तो इन्सान की जय-जयकार होती है। वाणी मीठी हो तो सबके दिलों पर राज करती है और इस से इन्सान सबके हृदय पर विजय प्राप्त कर सकता है। वहीं यदि यह बुरा बोलने लगे तो इन्सान का बुरा वक़्त उसके साथ रहने लगता है। उसे कोई पसंद नहीं करता और उसका अंत भी बुरा होता है।”

लुकमान का यह उत्तर सुन एक बार फिर से शेख को वही ख़ुशी और संतुष्टि मिली जैसा कि पहले उसके जवाबों से मिलती थी।

वैसे तो कबीरदास जी के दोहे के माध्यम से भी हमें यह ज्ञान मिलता है,

“ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोये।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।।”

जिसका अर्थ है कि हमें ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जिस से अपने मन को तो शांति मिले और दूसरों पर भी उस से कोई बुरा प्रभाव न पड़े। इन्सान को जीवन में आगे बढाने और नीचे गिराने में जीभ का बहुत महत्त्व होता है। यदि आप सबसे प्रेम भाव से बात करते हैं तो आपके प्रति भी सब प्रेमभाव रखेंगे। इसके विपरीत यदि आप सबसे असभ्य ढंग से बात करेंगे तो सभी आप से नफरत करेंगे और आप की छवि एक बुरे इन्सान के रूप में बन जाएगी।

इसलिए आप अपनी जीभ को ऐसा बनाइये कि यह सबके साथ सभ्यता से पेश आये। इस से आप जल्द ही सके दिलों पर राज करते नजर आयेंगे।

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धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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