दुश्मन शायरी :- दुश्मन को जलाने वाली शायरी हिंदी में | दुश्मनों के लिए शायरी

जब सफलता आपके कदम चूमने लगती है तो दुश्मन खुद-ब-खुद बन जाते हैं। ऐसे में आपको जरूरत होती है बस अपने लक्ष्य पर ध्यान देने की। अगर आप अपने दुश्मनों की चाल में फंस जाते हैं तो आप फिर से नीचे गिर सकते हैं। ऐसे ही दुश्मनों को जलने के लिए लिखा है हमने यह ‘ दुश्मन शायरी ‘ शायरी संग्रह :-

दुश्मन शायरी

दुश्मन शायरी

1.

ज़ख्म भर रहे हैं
जरा सी चोट खाया हूँ,
मेरे दुश्मनों
चेहरे पर मुस्कराहट रखना
एक मुद्दत बाद ही सही
मैं लौट आया हूँ।

2.

हमें देख कर दुश्मनों के चेहरे का नूर जायेगा,
सब्र रखिये जनाब हमारा भी दौर आयेगा।

3.

जो हम तक पहुँच नहीं सकते
वो हमें नीचे क्या गिराएंगे,
हमारे दुश्मनों से कहो अपना कद ऊँचा करें
बराबरी होगी तो हम भी दुशमनी निभाएँगे।

4.

अपने दिल में हम
शेरों सा हौसला मौजूद रखते हैं,
छूकर कहीं हमें ख़ाक न हो जाना
हम रगों में लहू नहीं बारूद रखते हैं।

5.

एक अलग शख्सियत है हमारी
हर किसी को हमारे अंदाज कहाँ भाते हैं,
हर बार टकरा कर गिरते हैं औंधे मुँह मगर
मेरे दुश्मन अपनी हरकतों से बाज कहाँ आते हैं।

6.

मेरे टूट कर बिखर जाने का
बड़ी शिद्दत से जो इंतजार करते हैं,
मेरे दुश्मन इतने कम अक्ल हैं
कि अपना वक़्त मेकर करते हैं।

7.

बदलते वक़्त ने रिश्तों का
झूठा सच हमें दिखाया है,
हर रिश्ता जिसे अपना समझा
उन में दुशमनों को ही पाया है।

>> पढ़िए :- आज के रिश्तों पर कविता <<

8.

ख़ाक बराबर भी औकात नहीं है उनकी
हमें धमकी भरे जो पैगाम दिया करते हैं,
मिल जाता खुदा उन्हें अगर वो याद करते
जितनी बार वो लबों पर हमारा नाम लिया करते हैं।

9.

वो शौक से छोड़ सकते हैं जहान
जिनकी आँखों में हम खटकते हैं,
हम तो वो खौफ हैं जो
दुश्मनों के दिल में धडकते हैं।

10.

किसकी मजाल थी जो हमें बर्बाद करता
दुश्मनों को क्या खबर थी क्या अजीज हैं हमें
अपनों के सितम सह कर भी चुप रहे
कैसे निभाते हैं रिश्ते इसकी तमीज है हमें।

11.

मेरी शख्सियत क्या है, गर तुम जान लोगे
अपनी औकात को फिर तुम पहचान लोगे,
मुझसे दुश्मनी के लिए चाहिए एक अलग सा हुनर
उसके काबिल नहीं हो तुम ये मान लोगे।

12.

कल तक जो अपना था
आज अफ़साना हो गया,
सफलता ने कदम क्या चूमे
दुश्मन ज़माना हो गया।

13.

ये सुन कर ज़माने के कई लोग घायल हो रहे हैं,
हमारे दुश्मन भी हमारे अंदाज के कायल हो रहे हैं।

14.

जिन्होंने बता औकात हमारी
हमें सही रास्ता दिखाया है,
शुक्रगुजार हूँ उन दुश्मनों का जिनकी
बातों ने मुझे बुलंदियों पर पहुँचाया है।

15.

हमें गिराने का जो
हर पल मौका देखते हैं,
अपने ही हैं दुश्मन यहाँ
अपने ही धोखा देते हैं।

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दुश्मनों के लिए लिखे गए इस ‘ दुश्मन शायरी ‘ शायरी संग्रह के बारे में अपने विचार हम तक कमेंट बॉक्स के जरिये जरूर पहुंचाएं।

धन्यवाद।

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