झूठी दुनिया झूठे लोग- हिंदी कविता | Jhoothi Duniya Jhoothe Log

आप पढ़ रहे है हिंदी कविता – झूठी दुनिया झूठे लोग

झूठी दुनिया झूठे लोग

झूठी दुनिया

झूठी दुनिया, झूठे लोग कि इनकी बातें भी झूठी,
झूठे हैं इरादे भी और मुस्कुराहटें भी हैं झूठी,

बंधती डोर है प्यार की जिस विश्वास के धागे से,
जो देखा तो पता पाया कि अब है डोर वो टूटी,

किस शख्स पर मैं करू यकीन, समझ नहीं आता,
कि इमारत है भरोसे की पर बुनियाद है झूठी,

वो थे जब ऊँचाई पर, गिर रहा था मैं नीचे
हरकत उनकी ऐसी थी कि हर उम्मीद थी छूटी,

सफ़र जो जिंदगी का है, बढ़ता है बढ़ा जाए,
तेरे इस बढ़ते कामों ने ही खुशियाँ सबकी है लूटी,

मुखौटे झूठे खुशियों के सबके चेहरों पे रहते हैं,
मगर अफ़सोस कि इनकी बातें और तसल्लियाँ भी है झूठी,

झूठी दुनिया, झूठे लोग कि इनकी बातें भी झूठी,
झूठे हैं इरादे भी और मुस्कुराहटें भी हैं झूठी।

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Sandeep Kumar Singh

बस आप लोगों ने देख लिया जीवन धन्य हो गया। इसी तरह यहाँ पधारते रहिये और हमारा उत्साह बढ़ाते रहिय्रे। वैसे अभी तो मैं एक अध्यापक हूँ साथ ही इस अपने इस ब्लॉग क लिए लिखता हूँ। लेकिन मेरे लिए महत्वपूर्ण है आप लोगों के विचार। अपने विचार हम तक अवश्य पहुंचाएं। जिससे हम उन पर काम कर के आपकी उमीदों पर खरे उतर सकें। धन्यवाद।

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