उत्साहवर्धक कविता दिल कहता है :- आगे बढ़ने का उत्साह पैदा करती कविता

जिंदगी में परेशानियाँ तो आती रहती हैं लेकिन असली इन्सान वो है जो अपने जीवन में नकारात्मकता को पीछे छोड़ आगे बढ़ जाए। आप जहाँ रुक गए आपकी जिंदगी भी वहीं रुक जाती है। इसलिए अगर जिंदगी में बदलाव लाने केलिए कुछ सबसे ज्यादा जरूरी है तो वो है आगे बढ़ना और जब आपका दिल ही आगे बढ़ने को कहने लगे तो तो आपको कौन रोक सकता है। आइये पढ़ते हैं इसी विचार को बताती उत्साहवर्धक कविता दिल कहता है :-

उत्साहवर्धक कविता दिल कहता है

उत्साहवर्धक कविता दिल कहता है

खुद में एक नयी उमंग और नया जोश पैदा कर
दिल कहता है कि अब तू बड़ा हो चल
छोड़ चंचलता और नादानी खुद में बदलाव कर
ज़िन्दगी में कुछ करने के लिए अब तू मचल
पैदल ही सही पर तू हिम्मत तो कर और निकल
दिल कहता है कि अब तू बड़ा हो चल….

कुछ भी नही अपनों से बढ़कर यहाँ
ये दुनियां भी है मतलब की, ध्यान कर
कोई करता नहीं परवाह किसी की भावनाओं की
किसी की उदासी का न बन कसूरवार तू परोपकार कर
मत घबरा तू मुकाम से और अपनों के लिए निकल
दिल कहता है कि अब तू बड़ा हो चल….

इस देश की खातिर कुछ करने की, कर पहल
सेवा भाव को अपने अंदर पैदा कर
चाह हो कुछ करने की तो खुद को बदल
इस माटी का कर्ज तू अदा कर
ला तू स्वयं में समर्पण का भाव और देश के लिए निकल
दिल कहता है की अब तू बड़ा हो चल….

नहीं देता कोई साथ यहाँ सारी उमर
होता नहीं कोई किसी का यहाँ, तू जान ले
छोड़ देते हैं यहाँ सब मन भर जाने पर
मत उलझ झूठी मुहब्बतों में तू मान ले
बस अपने जीवन की कर फिकर, स्वयं के लिए निकल
दिल कहता है की अब तू बड़ा हो चल….

न खुद को कर उदास किसी के जाने पर
जो तेरा था ही नहीं उसके जाने का गम क्यूँ कर
न कर कोई फ़िक्र अब रख भरोसा भगवान पर
सब तुझे मिल जायेगा सही वक़्त आने पर
बस तू धैर्य रख और अब आगे निकल
दिल कहता है की अब तू बड़ा हो चल
दिल कहता है की अब तू बड़ा हो चल….


हरीश चमोलीमेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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