तिरंगे पर कविता :- सुनो तिरंगा हमें हमारा | राष्ट्रीय ध्वज गीत | Tiranga Par Kavita

भारत का राष्ट्रीय ध्वज “ तिरंगा ” जो भारत की आन-बान और शान है। सबसे पहले भारतीय ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वेंकैया ने की थी। स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर यह पूरे देश में बहुत सम्मान के साथ फहराया जाता है। इसकी रक्षा की खातिर दुश्मनों से लड़ते-लड़ते न जाने कितने ही जवान शहीद हो गए। परन्तु भारत के इस सम्मान को कभी आंच न आने दी। भारत के उसी तीन रंगों से सुशोभित राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को समर्पित है हमारी यह तिरंगे पर कविता :-

तिरंगे पर कविता

तिरंगे पर कविता

तीन रंगों में रंगा हुआ
सारे जग से न्यारा है,
सुनो तिरंगा हमें हमारा
प्राणों से भी प्यारा है।

बतलाता है रंग केसरी
वीरों ने बलिदान दिया
अंग्रेजों को मार भगाया
स्वतंत्र हिंदुस्तान किया,
इनकी भुजाओं के बल से
दुश्मन हमसे हारा है
सुनो तिरंगा हमें हमारा
प्राणों से भी प्यारा है।

श्वेत रंग संदेशा देता
अमन चैन फ़ैलाने का
प्रेम भावना बसे हृदय में
ऐसा वतन बनाने का
सुख-दुःख में एक दूजे का
बनना हमे सहारा है
सुनो तिरंगा हमें हमारा
प्राणों से भी प्यारा है।

हरा रंग हरियाली का जो
उन्नति पथ दिखलाता है
चीर धरा का सीना हलधर
सारी फसल उगाता है,
सारे जगत को देता अन्न
पशुओं को देता चारा है
सुनो तिरंगा हमें हमारा
प्राणों से भी प्यारा है।

बढ़ते रहें कहीं रुके नहीं
चक्र ज्ञान यह देता है
साथ समय के चले निरंतर
बनता वही प्रणेता है
बिना परिश्रम कहाँ किसीका
चमका कभी सितारा है
सुनो तिरंगा हमें हमारा
प्राणों से भी प्यारा है।

इस कविता का विडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :-

Tirange Par Kavita | तिरंगे पर कविता - सुनो तिरंगा हमें हमारा | Poem On Tiranga In Hindi

पढ़िए और भी संबंधित बेहतरीन रचनाएं :-

भारत के राष्ट्रीय ध्वज “ तिरंगे पर कविता ” आपको कैसी लगी? अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स के जरिये जरूर बताएं।


धन्यवाद।

Add Comment