प्रेम भरी कविता :- लिखूं तो क्या लिखूं तेरे बारे में | प्रेम मिलन पर कविता

जब कोई चाहने वाला दूर होता है और दिल उससे मिलने को मजबूर होता है तब दिल में प्यार की तरंगे बहुत तेजी से चलने लगती हैं और क्या होता है हाल बता रहें हैं हरीश चमोली जी प्रेम भरी कविता के माध्यम से। आइये पढ़ते हैं प्रेम भरी कविता :

प्रेम भरी कविता

प्रेम भरी कविता

लिखूं तो क्या लिखूं तेरे बारे में
जितना लिखूं सब कम ही कम है
सोचूं तो क्या सोचूं तेरे बारे
जितना सोचूं सब कम ही कम है,
तेरा जिस्म भले ही मेरे साथ नहीं
तेरे ख्याल से ही मेरी आँखें नम हैं
मेरे दिल में तू हरदम शामिल है
तेरी सोच में ही इतना गम है,
लिखुँ तो क्या लिखूं तेरे बारे
जितना लिखूँ  सब कम ही कम है।

सावन की बारिशों में
तू शबनम सी भा रही है
पत्तों से फिसलकर तू जैसे
मेरे दिल तक आ रही है,
फुलवारी में खिले फूलों सी
तेरी खुशबू मेरी सांसों में घुल रही है
समुन्दर की लहर सी तू भी मेरी
यादों को धुल रही है

तेरा जिस्म भले ही मेरे साथ नहीं
तेरे ख्याल से ही मेरी आँखें नम हैं,
लिखुँ तो क्या लिखूं तेरे बारे
जितना लिखूँ सब कम ही कम है।

तू हिमालय की गोद से पिघल
इक नदी रूप में बदल रही है
होकर पर्वत पहाड़ समतल मैदानों  से
मुझसे मिलने को मचल रही है,
बसन्त ऋतू की बहार निराली सी
निशा सी काली तेरी घुंघराली लटें
करके दीवाना तू इक मनचली सी
चाहूँ मैं अब की तू मुझसे लिपटे

तेरा जिस्म भले ही मेरे साथ नहीं
तेरे ख्याल से ही मेरी आँखें नम हैं,
लिखुँ तो क्या लिखूं तेरे बारे
जितना लिखूँ सब कम ही कम है।

दिखाकर ये मोहिनी रूप
तू मेरे मन मे हुडदंग कर रही है
देकर अपने होंठों का स्पर्श
एक नयी उमंग भर रही है,
ठंडी हवाओं सी बहकर तू
मुझे बैचेन कर रही है
शाम के ढलते सूरज सी तू
मेरे प्यार के समुन्दर में घुल रही है

तेरा जिस्म भले ही मेरे साथ नहीं
तेरे ख्याल से ही मेरी आँखें नम हैं,
लिखुँ तो क्या लिखूं तेरे बारे
जितना लिखूँ सब कम ही कम है।

अमावस की काली रातों में तू
जुगनुओं की रोशनी सी चमक रही है
तेरी ये जगमगाती यादें अब
झिलमिल तारों के आकाश सी दमक रही हैं,
वो सुहाना मौसम, खूबसूरत नज़ारे
हर पल तुझे मेरे करीब ला रहे हैं
तुझसे मिलने की चाहत में सपने भी मेरे
अब सातवें आसमान चढ़ बुला रहें हैं,

तेरा जिस्म भले ही मेरे साथ नहीं
तेरे ख्याल से ही मेरी आँखें नम हैं,
लिखुँ तो क्या लिखूं तेरे बारे
जितना लिखूँ सब कम ही कम है।

पढ़िए :- अधूरे प्यार की कविता ‘काश तुम समझ पाती’


हरीश चमोलीमेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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