हिंदी कविता – राष्ट्रनिर्माण की बात :- जन-जन में विश्वास है

भारत के जन-जन में  देशभक्ति का संचार करती राष्ट्रनिर्माण को समर्पित हिंदी कविता – राष्ट्रनिर्माण की बात

हिंदी कविता – राष्ट्रनिर्माण की बात

हिंदी कविता - राष्ट्रनिर्माण की बात

जन-जन में विश्वास है,
कण-कण में हैं राम ।।
बच्चा-बच्चा देश का,
आय राम के काम ।।

राम तिहारे देश में,
सबका हो सम्मान ।
मर्यादा में सब रहें,
सब कोय एक समान ।।

मिल सबने जग को दिया,
अच्छा ये पैगाम ।
राम-राज हो देश में,
आय दीन के काम ।।

नहीं किसी की जीत है,
नहीं किसी की हार ।
सबने मिल जीता दिया,
भारत को इस बार ।।

कोई ज्यादा न उछले,
न कोय शोक मनाय ।
सोचे हो कि तुम कितना,
काम देश के आय ।।

छुटके भैय्या ने दिया,
संयम का उपहार ।
बड़े भैय्या अब बनके,
उसको दें हम प्यार ।।

मंदिर औ मस्जिद बने,
आस्था की सौगात।
पर इससे पहले करो,
राष्ट्रनिर्माण की बात ।।

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विनय कुमारयह रचना हमें भेजी है आदरणीय विनय कुमार जी ने जो की अभी रेलवे में कनिष्ठ व्याख्याता के रूप में कार्यरत हैं।
रचनाएं व अवार्ड: इनकी रचनाएं देश के 50 से अधिक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है। जिस के फलस्वरूप आप कई बार सम्मानित हो चुके हैं। गत वर्ष 2018 का रेलमंत्री राष्ट्रीय अवार्ड भी रेल मंत्री ने दिया था।
लेखन विद्या: गीत, ग़ज़ल, दोहा, कुण्डलिया छन्द, मुक्तक के अलावा गद्य में निबंध, रिपोर्ट, लघुकथा इत्यादि। तकनीकी विषय मे हिंदी में लेखन।

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