पर्यावरण पर दोहे – पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते दोहे | Paryavaran Par Dohe

पर्यावरण पर दोहे – पर्यावरण से सम्बन्धित इन दोहों में मनुष्य के द्वारा प्रकृति के साथ की जा रही अत्यधिक छेड़छाड़ पर चिंता व्यक्त की गई है। यदि अब भी हमने प्रकृति का अन्धाधुन्ध दोहन नहीं रोका तो आने वाले समय में हमें विनाश के भयावह दृश्य देखने पड़ेंगे। आज पर्यावरण – प्रदूषण के कारण मानव का जीवन संकट में पड़ गया है, अतः हमें पर्यावरण का संरक्षण कर धरती के समस्त प्राणियों को बचाने की सोचना चाहिए।

पर्यावरण पर दोहे

पर्यावरण पर दोहे

बसा रहे हैं बस्तियाँ, जंगल घने उजाड़।
जानबूझ पर्यावरण, हम ही रहे बिगाड़।।

धरती को पोला किया, खनिज निकाल – निकाल।
जिस पर हम बैठे हुए, काट रहे वह डाल।।

उद्योगों की चिमनियाँ, धुँआ उगल दिन-रात।
शुद्ध हवा पर कर रहीं, जमकर के आघात।।

बहते जल को रोककर, बनते उँचे बांध।
मर जाती इससे नदी, देकर हमें सड़ांध।।

खोदें नहीं पहाड़ को, काटें नहीं सुरंग।
होता इससे चेहरा, कुदरत का बदरंग।।

पानी पर्वत वायु वन, पशु-पक्षी की जान।
इन्हें बचाएँ तो बचे, धरती पर इंसान।।

अगर हादसों से नहीं, लेते हैं हम सीख।
बर्बादी के दृश्य ही, हमें पड़ेंगे दीख।।

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धन्यवाद।

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