गुरु महिमा के दोहे – गुरु पूर्णिमा पर दोहे और स्टेटस | Guru Purnima Par Dohe

गुरु का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता है। गुरु हमें शिक्षा देते हैं। गुरु जिन्हें हम आचार्य , अध्यापक और टीचर के नाम से भी  जानते हैं, हमें अनुशासन का पाठ पढ़ाते हैं। एक सभ्य समाज का निर्माण करने में गुरु का बहुत बड़ा योगदान होता है। गुरु का स्थान तो भगवान से’ भी बड़ा होता है। कबीर जी ने भी अपने दोहों में भी अकसर गुरु की महिमा का गान किया है। गुरु की महानता देखते हुए ही आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। आइये पढ़ते हैं गुरु को समर्पित “ गुरु महिमा के दोहे ”

गुरु महिमा के दोहे

गुरु महिमा के दोहे

1.
दूर करें अज्ञान सब, देकर ज्ञान प्रकाश ।
गुरु ही करते हैं सदा, अनपढ़ता का नाश ।।

2.
गुरु ही चारों वेद हैं, गुरु हैं सभी पुराण ।
शिक्षा देकर कर रहे, सबका ही कल्याण ।।

3.
सच्चे मन से जो करे, अपने गुरु का ध्यान ।
पड़े नहीं विपदा कभी, जीवन हो आसान ।।

4.
शब्दों में संभव नहीं, गुरु महिमा का गान ।
पहले गुरु को पूजिए, फिर पूजो भगवान ।।

5.
गुरु कृपा जिस पर हुई, उसका हुआ उद्धार
ज्ञानी उसको मानकर, करते सब सत्कार ।।

6.
गुरु अंधे की आँख है, गुरु भटके की राह ।
सच्चा गुरु जो मिल गया, रहे न कोई चाह ।।

7.
गुरु के बल पर ही सदा, मानव करे विकास ।
बिन गुरु संभव है नहीं, रचना कोई इतिहास ।।

8.
गुरु बिन ज्ञान मिले नहीं, जीवन बीते व्यर्थ ।
गुरु चरणों में जो गया, होता नहीं अनर्थ ।।

9.
संशय सारे दूर हों, ऐसा गुरु दें ज्ञान ।
अवगुण मिटते हैं सभी, मिलता है सम्मान ।।

10.
गुरु के आशीर्वाद से, हो जाए सब काम ।
उनके चरणों में बसे, तीरथ चारों धाम ।।

इस दोहा संग्रह का विडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :- 

पढ़िए :- अमीर खुसरो की “गुरु और शिष्य पर कहानी”

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धन्यवाद।

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