माँ की याद में कविता – तू लौट आ माँ | हिंदी कविता माँ के लिए

सूचना: दूसरे ब्लॉगर, Youtube चैनल और फेसबुक पेज वाले, कृपया बिना अनुमति हमारी रचनाएँ चोरी ना करे। हम कॉपीराइट क्लेम कर सकते है।
रचना पसंद आये तो हमारे प्रोत्साहन के लिए कमेंट जरुर करें। हमारा प्रयास रहेगा कि हम ऐसी रचनाएँ आपके लिए आगे भी लाते रहें।

‘माँ’ एक ऐसा शब्द जिसकी परिभाषा देने की कोशिश तो कई लोगों ने दी है लेकिन माँ की परिभाषा इतनी बड़ी है कि उस पर जितना भी लिखा जाए कम है। हम सब अपनी  माँ को बहुत प्यार करते हैं। भगवान् को तो आज तक नहीं देखा पर जिसने भगवान् के बारे में बताया उस माँ को जरूर देखा है और रोज देखता हूँ।

पर कभी सोचा है उनका क्या जिनकी माँ उनसे दूर चली गयी है। कैसे जीते हैं वो लोग? इसी बात को अपने मन में रख कर मैंने उनकी व्यथा को एक कविता में शब्दों द्वारा पिरोने की कोशिश की है। अगर कोई भूल-चूक हो तो क्षमाप्रार्थी हूँ। आइये पढ़ते हैं :- ‘ स्वर्गीय माँ की याद में कविता – तू लौट आ माँ ‘

माँ की याद में कविता – तू लौट आ माँ

माँ की याद में कविता

तू लौट आ माँ
तेरी याद बहुत आती है
ये घर घर न रहा
तेरे जाने के बाद मकान हो गया,
ऐसा पसरा है सन्नाटा
मानो श्मशान हो गया,
काम पर जाता हूँ तो
लौट आने का दिल नहीं करता,
यहाँ गूंजती है तेरी आवाज
और मैं हूँ सन्नाटों से डरता,

थक हार कर शाम को जब
मैं घर वापस आता हूँ,
पूरे घर में बस एक
तेरी कमी पाता हूँ,
लेट जाता हूँ तो लगता है
अभी सिर पर हाथ फिराएगी,
देख के अपने बच्चे को
हल्का सा मुस्काएगी,
मगर ख्यालों से अब तू
बाहर कहाँ आती है
हो सके तो तू लौट आ माँ
तेरी याद बहुत आती है।

मैं कभी न रूठुंगा तुझसे
तू रूठी तो तुझे मनाऊंगा
दूर कहीं भी तुझसे मैं
इक पल को भी न जाऊंगा,
पलकों पे आंसू मेरे हैं
तू आके इन्हें हटा जा ना,
अब नींद न आती आँखों में
तू मुझको लोरी सुना जा ना,
न अब क्यों डांटती है मुझको
न ही प्यार से बुलाती है,
क्यों इतना दूर गयी मुझसे
कि अब याद ये तेरी रुलाती है,

चल बस कर अब ये खेल मेरे संग
जो खेले है आँख मिचौली का
दिवाली पे न दिये जले हैं
फीका लगे है रंग अब होली का,
मैं जानता हूं अब न आएगी
फिर भी ये दिल की धड़कन तुझे बुलाती है,
हो सके तो तू लौट आ माँ
तेरी याद बहुत आती है।

देखिये इस कविता का बेहतरीन विडियो :-

पढ़िए :- माँ पर कविता – माँ का प्यार | मातृ दिवस पर विशेष कविता

आपको ‘ माँ की याद में कविता – तू लौट आ माँ ‘ कविता कैसी लगी हमें अवश्य बताएं। अगर आपकी अपनी माँ के साथ कुछ यादें जुड़ी हैं तो हमसे जरूर बाँटें। ताकि बाकी लोगों को मन की अहमियत पता चले। अंत में बस इतना ही कहना चाहूँगा कि ‘माँ’ से बढ़कर मेरे लिए तो दुनिया में कोई चीज नहीं है। कभी भी अपनी माँ को दुःख मत देना।

पढ़िए माता-पिता को समर्पित कुछ और बेहतरीन कवितायेँ व् शायरी संग्रह :-


धन्यवाद

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on telegram
Telegram
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on email
Email

31 thoughts on “माँ की याद में कविता – तू लौट आ माँ | हिंदी कविता माँ के लिए”

    1. Sandeep Kumar Singh
      Sandeep Kumar Singh

      Vinit Pal जी आपका भी धन्यवाद….इसी तरह हमारे साथ बने रहें..

  1. Avatar

    Maa…………………..isse jyada nahi likh paunga
    Maa mai apko bahut miss krta hun……..kya aap kabhi wapas nahi aoge😭😭😭😭😭

  2. Avatar

    Bahut sundar kavita hai ek ek shabd dil ko chu jaate hai
    Meri maa nahi rahi jab aaj mene ye padha to ek baar me pura nahi padh paya itana rona aaya ki kaash agar vo hoti is kavita ko padh kar esa laga ki meri jo bhi bhavnaye hai jisko mai kabhi shabdo me nahi kah sakta tha vo is kavita ke madhaym se thoda to bata sakta hun

  3. Avatar

    क्या बताएं आपको हम इसे पढ़कर रात के 02:,००, बजे को मां की याद,😄😅😪😥😥😥😥😥

  4. Avatar

    Maine bas kuchh Dino pahle apni maa ko khoya hai,jindagi kitni mushkil aur taklifdeh Hoti hai maa k bina ye bata paana mushkil hai……bas yahi kahungi maa tm laut aao

  5. Avatar

    Nice poem on maa really it is nice and thanx for this wonderful poem and God bless you
    I am 15 years old. And I also want to become like u as a good poet

  6. Avatar

    Sandeep your a genius. I was trying to write few lines on mother but could not. Seems You have narrated my feelings so beautiffly. . Hats off to you.God Bless

  7. Avatar

    बेहतरीन रचना के लिए धन्यवाद। बेहद मार्मिक व उमदा।

  8. Avatar

    ये कविता पड़ के मैं बहुत रोया
    मुझे मेरी मां की बहुत याद आती है

    जब मै 1 साल का था तभी मेरी मां मुझे छोड़ के चली गई और तभी से मै अपने मामा के पास रहेता हूं और आज मेरी उम्र 21 हो गई है

  9. Avatar

    Sandeep Bhai , aapne bht hi pyaari lines likhi Hain , Sach me maa ke jaane k baad esa hi ho gya, Bhai ese hi Kavita likhte rhe keep going ?

    1. Sandeep Kumar Singh

      बहुत-बहुत धन्यवाद अभिषेक जी। आप जैसे पाठकों का प्यार मिलता रहा तो ऐसा लिखना जारी रहेगा। बस आप लोगों द्वारा दिया गया प्यार ही हमारी कलम की ताकत है। इसी तरह अपना प्यार बनाएं रखें। धन्यवाद।

  10. Avatar
    Sharad Kumar Gupta

    "MERY*MATA*G"ka.Swargwas.14.Oct2017.koHo.gaya.hai.maine….Tu.lout.ke.aaja.MAA.pada.&.Watsap.me.sere.kiya.D il.ko.bahoot.Sukun.mila…….ok..

    1. Sandeep Kumar Singh

      Sharad Kumar जी हमारी सहानुभूति आपके साथ है। मेरे पास शब्द नहीं है कुछ कहने के लिए। बस इतना कहना चाहता हूं कि भगवान किसी को माँ से दूर न करे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *