बदलाव की कहानी :- जीवन बदलने के लिए राह सुझाती कहानी | Badlav Ki Kahani

जीवन में बदलाव कौन नहीं चाहता? कौन नहीं चाहता कि वह जीवन में सफलता प्राप्त करे। उसका जीवन सुखमय हो। लेकिन ये होता कैसे है? कैसे आता है बदलाव जीवन में? आइये जानते हैं इस बदलाव की कहानी में :-

बदलाव की कहानी

बदलाव की कहानी

एक गाँव में एक व्यक्ति रहता था जो अपने जीवन को लेकर बहुत चिंतित रहता था। उसे लगता था कि उसके जीवन में एक बड़ा बदलाव आना चाहिए। जिससे उसे जीवन में किसी भी तरह की परेशानी न रहे। उसके पास खूब धन हो और उसकी खूब प्रसिद्धि हो। परन्तु उसके जीवन में कुछ भी नहीं बदल रहा था। क्योंकि वह कुछ करने की जगह बस सही समय का इन्तजार कर रहा था।

उसकी इसी आदत के कारण उसका मन दुखी रहने लगा। उसके मन में नकारात्मक विचारों का वास होने लगा। उसे हर चीज में कमी नजर आने लगी। जब भी वह कूछ करने का मन बनाता तो अचानक उसके मन में विचार आता कि शायद ये काम सही ढंग से नहीं हो पाएगा। उसे लगने लगा शायद वह कुछ करने लायक ही नहीं है। इसका परिणाम यह हुआ कि उसका जीवन पहले से भी ज्यादा दुखमय हो गया।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह इस परिस्थिति से कैसे बाहर निकले।

उसी दौरान उनके गाँव में एक साधु आए। जिनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक थी। सब ऐसा कहते थे कि उनके पास हर समस्या का हल मिल जाता है। जब उस व्यक्ति ने ये सुना कि साधु उनके गाँव में आये हैं तो वह तुरंत उनसे मिलने चला गया।

साधु को प्रणाम कर उसने अपनी समस्या बताई। उसने बताया कि वह अपने जीवन में बदलाव चाहता है। परन्तु उसे कोई सही राह नहीं मिल रही। इसी कारण उसके मन में नकारात्मक विचार आते रहते हैं।

साधु ने पूरी बात सुनी और उस व्यक्ति को दूसरे दिन उसे सूर्योदय के समय आने के लिए कहा।

दूसरे दिन वह व्यक्ति उन साधु के पास जा पहुंचा। साधु पाठ-पूजा के बाद सैर के लिए निकलने वाले थे। उन्होंने उस व्यक्ति को साथ चलने के लिए कहा। चलते-चलते वे एक खेतों के पास पहुंचे। गेंहूँ की फसल की तरफ इशारा करते हुए साधु ने पूछा,

“क्या तुम बता सकते हो इस खेत में यह फसल कैसे उगी होगी?”

“जी पहले खेत को जोता गया होगा। फिर उसमें बीज डाला गया होगा। उसके बाद समय-समय पर पानी दिया गया होगा। तभी ये फसल उगी होगी।”

उस व्यक्ति ने पूरी प्रक्रिया बताते हुए उत्तर दिया।

थोड़ा आगे और चलने पर उन्होंने देखा कि एक खेत में घास ही घास थी। एक बार फिर साधु ने उस व्यक्ति से पूछा,

“क्या तुम बता सकते हो इस खेत में यह घास किसने उगाई होगी?”

“महाराज, घास कौन उगाता है? ये तो अपने आप उग जाती है। जब खेत में किसी और चीज का बीज नहीं डाला जाएगा तो घास ही उगेगी।”

उस व्यक्ति ने एक बार फिर से साधु के प्रश्न का उत्तर दिया।

“बस तुम्हारे इन्हीं उत्तरों में तुम्हारी समस्या का हल छिपा है।“

साधु ने उस व्यक्ति को समझाना शुरू किया।

“मानव मन भी एक खेत की तरह ही होता है। इस में तुम जो भी बीज डालोगे तुम्हें वही फसल मिलेगी। अगर तुम इस पर काम करते रहोगे, इसमें सकारात्मकता के बीज बोते रहोगे तो ये तुम्हें सफलता की ओर बढ़ाएगा। और यदि तुम अपने भविष्य की चिंता में वर्तमान का समय भी नष्ट करोगे तो दिमाग में नकारात्मकता की वृद्धि होगी।

बदलाव तभी संभव है जब हम व्यर्थ की चिंता को छोड़ कर और सही समय की प्रतीक्षा न करते हुए अपने वर्तमान में ही वो करें जो हमें करना है।”

उस व्यक्ति को ये बात समझ में आ गयी, कि अगर मन को सही दिशा में लगाना है तो उसे सही दिशा की तरफ बढ़ाना होगा। मन रुपी खेत का सही प्रयोग ही जीवन में बदलाव ला सकता है। इसे खाली छोड़ देने से इस पर आलास और नकारात्मकता अपनी सत्ता जमा लेते हैं।

मन के कहे पर मत चलिए बल्कि मन को अपने कहने पर चलाइये। एक बड़ी ईमारत बनने की शुरुआत भी एक ईंट रखने से ही होती है। और उस ईंट की तरह अपनी छोटी-छोटी कोशिशों को जोड़ कर आप एक बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं। जरूरत है तो बस एक शुरुआत की।

दोस्तों मुझे ऐसा लगता है ये ‘ बदलाव की कहानी ” कई लोगों के जीवन से मिलती-जुलती है। हममें से कई लोग ऐसे होते हैं जो आज का काम कल पर या यूँ कहें हमेशा के लिए टालते रहते हैं। इसके साथ ही शिकायत भी करते रहते हैं कि न जाने कब हमें सफलता मिलेगी। यदि आपके साथ भी ऐसा ही होता है तो हमें कमेंट बॉक्स के जरिये अपने विचार जरूर बताएं।


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धन्यवाद।

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