हिंदी कविता : तुम्हारी हँसी | Hindi Kavita Tumhari Hansi

हमारे जीवन में बहुत सी चीजें अहमियत रखती हैं। ये चीजें ऐसी हैं जिनका कोई मूल्य नहीं लगाया जा सकता। जैसे किसी की ख़ुशी, किसी के होठों की मुस्कान, किसी की मासूमियत और किसी की हँसी। इन्हें देख कर दिल को एक सुकून सा मिलता है। किसी अपने खास के चेहरे पर हँसी देख कर मन में क्या भावना आती है आइये पढ़ते हैं ” हिंदी कविता : तुम्हारी हँसी ” में

हिंदी कविता : तुम्हारी हँसी

हिंदी कविता : तुम्हारी हँसी

तुम हँसी तो
साथ में ही
हँस दिए
बुझते चिराग,
तुम हँसी तो
राख में से
जग गई
सोई – सी आग।

तुम हँसी तो
बादलों से
झर पड़े
मोती कई,
तुम हँसी तो
हँस पड़ी
खेत में
फसलें नई।

यह हँसी
सुनकर ही चटकी
बाग की
कमसिन कली,
यह हँसी
सुनकर ही सरिता
सिन्धु से
मिलने चली।

इस हँसी से
धुल गई हैं
पेड़ की भी पत्तियाँ,
यह हँसी ही
झिलमिलाती
दीप की बन बत्तियाँ।

मन को
मेरे भी भिगोती
इस हँसी की वृष्टियाँ,
लगता मुझको
रच रही है
यह हँसी ही सृष्टियाँ।

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