पापा की याद में कविता :- खाली कुर्सी देख के पापा | Papa Ki Yaad Poem

किसी के चले जाने बाद उसकी याद तो साथ ही रहती है। साथ ही उस से जुडी चीजें भी उसकी कमी का अहसास करवाती रहती हैं। वो हमारे दिल के करीब हो जाती हैं। जिस वजह से उनको खुद से दूर करना मुश्किल हो जाता । लेकिन वो हमारे जीने का एक सहारा सा बन जाती हैं। ऐसी ही भावना को दर्शाती पापा की याद में कविता

पापा की याद में कविता

पापा की याद में कविता

कमरे में जाकर बस मुझको
खाली कुर्सी वो दिखती है
हर जगह घूम कर ये नजरें
उसी कुर्सी पर जा टिकती हैं,
यूँ लगता है बैठ वहीं तुम
मुझको आवाज लगाते हो
खाली कुर्सी देख के पापा
तुम याद बहुत ही आते हो।
खाली कुर्सी देख के पापा
तुम याद बहुत ही आते हो।

इक अन्धकार सा छाया है
दिल मना रहा हर पल मातम
आँखें हैं खोज रहीं तुमको
पर आते नहीं कभी अब तुम,
छायी रहती है खामोशी सी
तुम भी न मुझे बुलाते हो
खाली कुर्सी देख के पापा
तुम याद बहुत ही आते हो।

है कमरा खाली पड़ा हुआ
चीजें भी मरी हुयी सी हैं
छिप गयी हैं खुशियां सारी
लगता है डरी हुयी सी हैं,
अब तो मुझको तुम भी कभी
डांट के नहीं डराते हो
खाली कुर्सी देख के पापा
तुम याद बहुत ही आते हो।

माँ की सूनी मांग देखकर
आँखें भर-भर जाती हैं
साथ छोड़ दिया उनका
जो आपकी जीवन साथी हैं,
साथ निभाने का वादा तुम
आकर क्यों न निभाते हो
खाली कुर्सी देख के पापा
तुम याद बहुत ही आते हो।

छोटी बहन है करती खड़ा
पहाड़ रोज सवालों का
तूफ़ान सा चलता रहता है
मन में आपके ख्यालों का
कमी का यूँ अहसास दिला कर
क्यों हर पल हमें सताते हो
खाली कुर्सी देख के पापा
तुम याद बहुत ही आते हो।

यूँ लगता है बैठ वहीं तुम
मुझको आवाज लगाते हो
खाली कुर्सी देख के पापा
तुम याद बहुत ही आते हो।

इस कविता का विडियो यहाँ देखें :-

Papa Ki Yaad Me Kavita | पापा की याद में कविता ( खाली कुर्सी देख के पापा )

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