जीवन की सीख कविता | Jeevan Ki Seekh Poem In Hindi

Jeevan Ki Seekh Poem In Hindi ” जीवन की सीख कविता ” में स्वयं की प्रशंसा की प्रवृत्ति से बचकर दूसरों को भी महत्त्व देने की बात कही गई है। हमें लेने की ही नहीं सोचकर दूसरों को भी कुछ देने का प्रयास करना चाहिए। दुःखी व्यक्तियों के प्रति सहानुभूति रखकर यथाशक्ति उनकी सहायता करनी चाहिए। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज में सभी के हित आपस में जुड़े हुए हैं, अतः सभी को एक दूसरे की मदद करते हुए मिलजुलकर रहना चाहिए। आपसी प्रेम एवं मेलजोल से ही मानव का जीवन सुखमय हो सकता है। 

Jeevan Ki Seekh Poem In Hindi
जीवन की सीख कविता

जीवन की सीख कविता

रखें आस क्यों लेने की ही
औरों को भी देना जानें,
अपनी ही क्यों करें बढ़ाई
औरों के भी गुण पहचानें।

बात और की सुनें ध्यान से
अपनी ही ना लगें सुनाने ,
देख और की मजबूरी को
लाभ नहीं हम लगें उठाने ।

औरों को पीड़ा देकर हम
बुनें न सुख के ताने-बाने,
क्षमा माँग लें आगे बढ़कर
भूल अगर होती अनजाने।

दिया और ने कभी सहारा
ऊँचाई तक हमें चढ़ाने,
उनके हित अब आगे आएँ
हम भी अपना हाथ बढ़ाने ।

हम अपने मतलब के आगे
अपनों को ना लगें भुलाने,
धूर्त जनों की मीठी वाणी
कहीं लगे ना हमें लुभाने।

जब हम औरों की खुशियों में
सच्चा सुख लगते हैं पाने,
व्यर्थ तभी लगने लगते हैं
धन – दौलत के भरे खजाने।

हम अच्छी बातों को सीखें
तब औरों को लगें सिखाने,
दीपक बनकर हम दुनिया में
जलें और को राह दिखाने।

मानव है सामाजिक प्राणी
सबके हित में निज हित माने,
रहें प्रेम से हम मिलजुलकर
सीख दे रहे लोग सयाने।

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