इंसान पर कविता :- बनाओ मत भगवान उसको | Insan Par Kavita

सूचना: दूसरे ब्लॉगर, Youtube चैनल और फेसबुक पेज वाले, कृपया बिना अनुमति हमारी रचनाएँ चोरी ना करे। हम कॉपीराइट क्लेम कर सकते है।
रचना पसंद आये तो हमारे प्रोत्साहन के लिए कमेंट जरुर करें। हमारा प्रयास रहेगा कि हम ऐसी रचनाएँ आपके लिए आगे भी लाते रहें।

आप पढ़ रहे हैं इंसान पर कविता :-

इंसान पर कविता

इंसान पर कविता

बनाओ मत भगवान उसको
उसे इंसान रहने दो,
समुंदर से जुदा क़तरे की
हरेक पहचान रहने दो।

समझना ही नहीं मुझको
धर्म और ज़ात की बातें,
बनो तुम शौक से ज्ञानी
मुझे नादान रहने दो।

हर इक रस्ते की हो मंज़िल
ज़रूरी तो नहीं यारों,
कुछ रस्ते अपनी ज़िंदगी के
अनजान रहने दो।

हम तोड़ देंगे दिल तुम्हारा
ये भ्रम रहने दो बाकी,
अभी होठों पे तुम अपने
ज़रा मुस्कान रहने दो।

लगी जब आग घर में तो
कहा मुझसे बुज़ुर्गों ने,
उठा लो हाथ में गीता बाकी
सब सामान रहने दो।

क़सम खाकर ज़रूरी तो
नहीं वो सच ही बोलेगा,
तो फिर गीता कुरान अल्लाह
और भगवान रहने दो।

पढ़िए :- इंसानियत पर भावनात्मक कहानी


प्रवीणमेरा नाम प्रवीण हैं। मैं हैदराबाद में रहता हूँ। मुझे बचपन से ही लिखने का शौक है ,मैं अपनी माँ की याद में अक्सर कुछ ना कुछ लिखता रहता हूँ ,मैं चाहूंगा कि मेरी रचनाएं सभी पाठकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनें।

‘इंसान पर कविता ’ के बारे में अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे रचनाकार का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ blogapratim@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।


धन्यवाद।

Share on whatsapp
WhatsApp
Share on telegram
Telegram
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on email
Email

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *