झूठी दुनिया झूठे लोग- हिंदी कविता | Jhoothi Duniya Jhoothe Log

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आप पढ़ रहे है हिंदी कविता – झूठी दुनिया झूठे लोग

झूठी दुनिया झूठे लोग

झूठी दुनिया झूठे लोग

झूठी दुनिया, झुठे लोग कि इनकी बातें भी झूठी,
झूठे हैं इरादे भी और मुस्कुराहटें भी हैं झूठी,

बंधती डोर है प्यार की जिस विश्वास के धागे से,
जो देखा तो पता पाया कि अब है डोर वो टूटी,

किस शख्स पर मैं करू यकीन, समझ नहीं आता,
कि इमारत है भरोसे की पर बुनियाद है झूठी,

वो थे जब ऊँचाई पर, गिर रहा था मैं नीचे
हरकत उनकी ऐसी थी कि हर उम्मीद थी छूटी,

सफ़र जो जिंदगी का है, बढ़ता है बढ़ा जाए,
तेरे इस बढ़ते कामों ने ही खुशियाँ सबकी है लूटी,

मुखौटे झूठे खुशियों के सबके चेहरों पे रहते हैं,
मगर अफ़सोस कि इनकी बातें और तसल्लियाँ भी है झूठी,

झूठी दुनिया, झूठे लोग कि इनकी बातें भी झूठी,
झूठे हैं इरादे भी और मुस्कुराहटें भी हैं झूठी।

पढ़िए – हिंदी कविता – इन बेशर्मों की बस्ती में

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7 thoughts on “झूठी दुनिया झूठे लोग- हिंदी कविता | Jhoothi Duniya Jhoothe Log”

  1. Avatar

    बहुत बढ़िया।आज की वास्तविकता को दिखाती है।

  2. Avatar

    Bahut motivational dil Ko chuny wali kavita hi padhny k baad kuch ahsas dil me jagy kuch himmat si bandhi hi Ki jindagi yu mahrum na hony paiegy..sabhi kavitain bahut achhi hi,well done

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