असफलता से सफलता तक :- गलतियों से सीखने की प्रक्रिया

जीवन में गलतियां किस से नहीं होती? मुझे नहीं लगता कि ऐसा होगा जिसने जीवन में कभी कोई गलती न की हो। ज्यादातर लोग गलतियाँ कर उसे छिपाने का प्रयास करते हैं या फिर उसे बस एक गलती समझ कर भूल जाते हैं। लेकिन क्या कोई की गयी गलती हमारा जीवन बदल सकती है? आइये पढ़ते हैं इस कहानी “असफलता से सफलता तक ” में :-

असफलता से सफलता तक

असफलता से सफलता तक

यह कहानी एक ऐसे रिसर्च करने वाले वैज्ञानिक की जिसने चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत सी सफलतायें प्राप्त की। बहुत सारी सफलताएँ प्राप्त कर लेने के बाद एक दिन एक अखबार से एक रिपोर्टर उनका इंटरव्यू लेने आया। उस रिपोर्टर ने उस वैज्ञानिक से उसकी सफलता का राज पूछा और ये पूछा कि वो इतना रचनात्मक कैसे है? वह सबसे अलग कैसे सोच लेता है?

इस सवाल के जवाब में उस वैज्ञानिक ने बताया कि उसे ऐसा करना उसकी माँ ने सिखाया वो भी जब वह चार साल का था। रिपोर्टर ने हैरान होते हुए पूछा, “कैसे?”

फिर उस वैज्ञानिक ने एक घटना बतानी शुरू कि जब वह चार साल का था। वह फ्रिज से दूध की बोतल निकलने की कोशिश कर रहा था। उसने बोतल तो निकाल ली लेकिन बोतल बड़ी और हाथ छोटे होने के कारण बोतल उसके हाथ से फिसल कर जमीन पर गिर गयी। जिस से बोतल का सारा दूध फर्श पर गिर गया।

जब माँ कमरे में आई तो वो दृश्य देख चिल्लाने की जगह या कोई सजा देने के बजाय उन्होंने कहा,”रोबर्ट, ये क्या बड़ी गड़बड़ कर दी तुमने! मैंने पहली बार दूध का इतना कीचड़ देखा है। अब जबकि नुक्सान हो ही चुका है तो क्या सफाई से पहले तुम इसमें खेलना चाहोगे?”

वह उस दूध के कीचड़ में खेला भी। थोड़ी देर बाद उसकी माँ फिर आई और कहने लगी, “तुम जानते हो रोबर्ट, अब जबकि तुमने इतनी गंदगी फैलाई है तो इसे साफ़ कर के सभी चीजों को उनकी सही जगह पर भी तुमको ही रखना पड़ेगा। तो तुम सफाई कैसे करना पसंद करोगे? स्पंज से, तौलिये से या फिर पोंचे से। क्या प्रयोग करना चाहोगे तुम?” उसने स्पंज चुना और माँ के साथ मिलकर उस जगह की सफाई की।

सफाई करने के बाद माँ ने कहा, “तुम जानते हो, अभी यहाँ पर एक परिक्षण असफल हुआ है कि कैसे दो नन्हें हाथों के साथ एक बड़ी दूध की बोतल उठायी जाए। चलो हम पीछे आंगन में चलते हैं और एक पानी से भरी हुयी बोतल को उठाने का नया रास्ता ढूंढते हैं। जिससे हम बोतल को उठा भी लें और बोतल गिरे भी नहीं।

इसके बाद कई बार प्रयास करने के बाद उस नन्हें लड़के ने सीखा की यदि बोतल को ढक्कन के पास से दोनों हाथ लगाकर पकड़ा जाए तो यह नहीं गिरती।कितना बढ़िया पाठ था।

उस दिन उस महान वैज्ञानिक ने सीखा कि जीवन में कभी भी गलती करने से डरना नहीं चाहिए। बल्कि गलती तो एक मौका है, कुछ नया सीखने का, जिसकी जरूरत वैज्ञानिक परीक्षणों में अक्सर होती है। बेशक परिक्षण सफल न हो, हम कुछ नया सीखते जरूर हैं।

तो दोस्तों इस से हमें यह पता चलता है कि जीवन में जब भी कोई गलती हमसे हो जाए तो उसे सुधारने का प्रयास करना चाहिए या फिर उस गलती से सीख लेनी चाहिए जिस से हम जीवन में आगे बढ़ सकें। कहा गया है कि अगर आपको रस्ते में ठोकर लगती है तो आपको इस से सीख लेकर ध्यान से चलना चाहिए। ऐसा न करने पर आप फिर किसी न किसी पत्थर से ठोकर खाएंगे और मंजिल पर पहुँचने से पहले ही शायद आपके हौसले पस्त हो जाएँ।

जिंदगी में गलतियां करना अच्छी बात है लेकिन एक ही गलती बार-बार करना बेवकूफी है। इसलिए अपनी गलतियों से सीख लेते हुए स्वयं को असफलता से सफलता तक आप ही पहुंचा सकते हैं।

पढ़िए :- शिक्षाप्रद कहानी ‘पहली गलती’

इतना ही नहीं इस से यह भी शिक्षा मिलती है कि हमें दूसरों की गलतियों पर उन पर गुस्सा होने या उन्हें सजा देने के बजाय उन्हें उस गलती को सही करने के लिए प्रेरित करें या फिर उन्हें यह बताएं कि वह गलती करने से कसी बच सकते हैं।

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धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

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