अमेज़न के जन्म की कहानी :- दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति जेफ बेज़ोस की कहानी

जेफरी प्रेस्टन बेजोस जिनको जेफ बेज़ोस के नाम से भी जाना जाता है। जेफ बेज़ोस इस समय अमेज़न.कॉम के संस्थापक, अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अमेज़न.कॉम बोर्ड के अध्यक्ष हैं। फोर्ब्स द्वारा जारी की गयी 2018 की लिस्ट के अनुसार जेफ बेज़ोस दुनिया के सबसे अमीर आदमी है। आखिर कैसे शुरू किया था उन्होंने ये सफ़र जिसकी वजह से वो इस मुकाम को हासिल कर पाए। आइये जानते हैं अमेज़न के जन्म की कहानी में :-

अमेज़न के जन्म की कहानी

अमेज़न के जन्म की कहानी

क्या करते थे जेफ बेज़ोस अमेज़न से पहले

1986 में प्रिंसटन विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री प्राप्त कर लेने के बाद उन्होंने 1994 तक अलग-अलग जगह पर काम किया। उन्हें इंटेल (Intel), बेल लैब्स (Bell Labs), और एंडरसन कंसल्टिंग (Andersen Consulting) से नौकरी के प्रस्ताव आये। उन्होंने सब से पहले फिटेल(Fitel) कंपनी में काम किया जोकि एक वित्तीय दूरसंचार स्टार्टअप था। जहाँ पर इनका काम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापर को बढ़ाना था।

उनके काम को देख कर उन्हें विकास प्रमुख और ग्राहक सेवा निदेशक (head of development and director of customer service ) के पद पर नियुक्त कर दिया गया। इसके बाद 1988 में उन्होंने बैंकिंग उद्योग में काम करना शुरू किया और बैंकर्स ट्रस्ट नामक संस्था में उत्पादन प्रबंधक (Product Manager) के पद पर काम किया। उन्होंने यह काम 1990 तक किया।

इन दोनों जगह काम करने के बाद 1990 में डीई-शॉ नमक संस्था में काम किया जिसने नया-नया कि हेज फंडिंग का काम शुरू किया था। 1994 में उन्हें इस संस्था का वरिष्ठ उपाध्यक्ष बना दिया गया।

इसके बाद ही शुरू हुआ उनका अमेज़न कंपनी बनाने का सफ़र।

कैसे आया कंपनी का नाम

बेज़ोस ने यह कंपनी वाशिंगटन में बेलेव्यू (Bellevue) नमक जगह पर किराये पर लिए गए घर के गैराज में शुरू किया। जब जेफ बेज़ोस ने पहली बार अपनी कंपनी बनायीं तो उसका नाम Cadabra, Inc. रखा। सितंबर 1994 में बेज़ोस ने relentless.com नाम से एक यूआरएल ख़रीदा। उन्होंने अपने ऑनलाइन स्टोर का नाम Relentless रखा था। जिसका का अर्थ होता है ‘दयाहीन’। यह नाम उनके दोस्तों को पसंद नहीं आया और उन्होंने बेज़ोस को यह नाम बदलने की सलाह दी।

(नोट :- Relentless.com नाम की वेबसाइट बेज़ोस आज भी प्रयोग करते हैं। जब आप इस यूआरएल पर जाते हिं तो यह आपको amazon.com पर भेज देती है।)

इसके बाद बेज़ोस ने शब्दकोष उठाया और अमेज़न ( Amazon ) अमेज़न दुनिया की सबसे बड़ी नदी है और सबसे अनोखी व अलग है। इसी तरह बेज़ोस भी अपनी कंपनी को सबसे बड़ी व सबसे अलग बनाना चाहते थे। और अमेज़न (Amazon) का शुरुआती अक्षर भी अंग्रेजी वर्णमाला का पहला अक्षर है। जोकि हमेशा सबसे ऊपर रहता है।

कैसे आया आईडिया

जेफ बेजोस एक ऐसा स्टोर (Everything Store) बनाना चाहते थे जहां सब कुछ उपलब्ध हो। लेकिन ये राह इतनी आसान न थी। एक ऐसी दुकान जहाँ सब कुछ उपलब्ध हो उसके लिए जरूरत होती बहुत सारी जगह, बहुत सारे पैसे और बहुत सारे लोगों की। पर ऐसा मुमकिन न था क्योंकि ये एक बहुत बड़ा रिस्क साबित हो सकता था।

इसके बारे में उन्होंने बात की डेविड शॉ से, जो कि डीई-शॉ के मालिक थे। ब्रैड स्टोन जिन्होंने अपनी पुस्तक दी एवेरीथिंग स्टोर (The Everything Store) में बताया है कि बेज़ोस और डेविड का अब बस एक ही सपना था कि एक ऐसी इन्टरनेट कंपनी बनायीं जाए जो निर्माता और ग्राहक के बीच एक माध्यम का काम करे। जिससे ग्राहक उत्पादक से सीधे ही सामान खरीद सके। इसी तरह हर तरह का सामान बेचा जा सकता था।

उस समय इन्टरनेट अभी शुरूआती दौर में था। किसे पता था भविष्य में बस इसी का राज होगा। खैर, जब बेजोस इस कंपनी बनाने की योजना पर काम कर रहे थे तब उन्होंने ने भी इस चीज को भांपा कि ऐसा स्टोर बना जिसमे सब कुछ उपलब्ध हो, बनाना संभव नहीं है। स्टोन के अनुसार उन्होंने 20 ऐसे उत्पादों की सूची तैयार की जो आसानी से बेचे जा सकते थे। पर समस्या अभी भी वही थी कि ग्राहक ऐसा उत्पाद क्यों लेंगे जिसके बारे में वो जानते न हों।

इस समस्या का हल उन्होंने ये निकाला कि किताबें ही इस आईडिया के लिए सबसे सही उत्पाद हैं। किताबों के बारे में तो सभी जानते हैं और इसमें कोई कमी भी नहीं हो सकती। अब इस से भी बड़ी समस्या ये थी कि उस समय पहले से ही किताबों की दुनिया में बॉर्डर्स और बार्नेस एंड नोबल नाम से 2 दुकाने पहले से ही बहुत प्रसिद्द थीं।

कैसे शुरू हुआ काम

फैसला लिया जा चुका था और इस पर काम करने के लिए 30 लाख किताबें छपवाई जा चुकी थीं। इन किताबों की संख्या इतनी थी कि बॉर्डर्स और बार्नेस एंड नोबल इन्हें रख भी नहीं सकते थे। जेफ बेज़ोस ने अपने निवेशकों को भी यह बात बता दी थी कि इस काम में 70% दिवालिया होने या असफल होने का जोखिम है। लेकिन वो सफलता ही क्या जिसमे कोई जोखिम न हो।

अमेज़न कंपनी से बिकने वाली सबसे पहली किताब डगलस होफस्टैड्टर की फ्लूइड कॉन्सेप्ट्स एंड क्रिएटिव अनालोगिस थी। अमेज़न ने अपने पहले दो महीने में ही सभी 50 राज्यों और 45 देशों में किताबें बेचीं। लॉस एंजेलेस टाइम्स के अनुसार जब 1995 में अमेज़न कंपनी ने अपना पहला बिल काटा तो उसे “Earth’s Biggest Bookstore” के नाम से काटा और सिर्फ बिल ही नहीं काटा बल्कि सबको दिखा दिया कि सोच हकीकत बनने में देर नहीं लगती।

राह आसान न थी

सफर तो शुरू हो चुका था इसमें जोखिम भी था इसके साथ ही शुरुआत में ही अमेज़न को दो बड़ी रुकावटों का सामना करना पड़ा। पहली रूकावट बार्नेस एंड नोबल के रूप में थी जिन्होंने 12 मई, 1997 को अमेज़न पर इसलिए केस किया क्योंकि वो “Earth’s Biggest Bookstore” नहीं था बल्कि सिर्फ किताबे बेचने का एक माध्यम था। इस मामले को कोर्ट के बहार ही सुलझा लिया गया।

अब दूसरी सबसे बड़ी समस्या वालमार्ट के रूप में आई। उन्होंने 16अक्टूबर,1998 को अमेज़न पर कोर्ट में यह आरोप लगाया की अमेज़न ने वालमार्ट के पुराने कर्मचारियों को नौकरी देकर उनके व्यापर के रहस्य चुरा लिए हैं। यह मामला भी कोर्ट के बहार ही सुलझा लिया गया और वालमार्ट के पुराने कर्मचारियों को व्यापार के नये तरीके इजाद करने को कहा गया।

इसके बाद अमेज़न इस तरह आगे बढती गयी कि उसने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। आज अमेज़न के अपने खुद के कई उत्पाद उपलध हैं। इस तरह हम सबको जेफ बेज़ोस से ये सीख लेनी चाहिए कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए क्यों बार जोखिम लेना ही पड़ता है और यदि कुछ बड़ा करने का इरादा है तो जरूर करिए क्योंकि असंभव कुछ भी नहीं है। जरूरत है तो बस शुरुआत की।

पढ़िए :- प्रेरणादायक कविता ‘मुझे अपनी मंजिल को पाना है’

अमेज़न के जन्म की कहानी आपको कैसी लगी हमें जरूर बताएं। यदि आप जानना चाहते हैं किसी और कंपनी की शुरुआत के बारे में तो कमेंट बॉक्स में लिखिए। हम पूरी कोशिश करेंगे की आपको उस कंपनी की जानकारी दें।

धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

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ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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3 Responses

  1. निरज कहते हैं:

    एक प्रेरणादयक लेख ।
    बहुत बहुत शुक्रिया सर!

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