ज्ञानवर्धक कहानी :- आदतें ही हमारी पहचान हैं | एक अरबी कथा

एक इन्सान की परवरिश का पता उसकी आदतों से ही चल जाता है। धन-दौलत से आप सुख-सहूलतें खरीद सकते हो लोगों के ख्याल नहीं। आपकी हरकतें ही आपकी सच्चाई बयान करने के लिए काफी हैं। इसी बात का ज्ञान दे रही हैं यह अरबी कथा जिसका शीर्षक है ज्ञानवर्धक कहानी :-

ज्ञानवर्धक कहानी

ज्ञानवर्धक कहानी

एक बादशाह के दरबार में एक अनजान व्यक्ति नौकरी की तलाश में आया। बादशाह ने उस से उसकी योग्यता पूछी तो उसने कहा,

“सियासी हूँ”

( अरबी भाषा में सियासी उसे कहते हैं जो अपनी बुद्धि और ज्ञान से किसी भी समस्या को आसानी से सुलझा सकता है। )

बादशाह के दरबार में सियासतदानों की कमी न थी लेकिन बादशाह उसके आत्मविश्वास से बहुत प्रभावित हुआ और उसे घोड़ों के तबेलों का प्रमुख अध्यक्ष बना दिया गया।

कुछ दिनों बाद बादशाह के मन में ये विचार आया कि अपने तबेले में सबसे महंगे घोड़े के बारे में जानकारी हासिल की जाए। इसी उद्देश्य से बादशाह ने तबेले के प्रमुख अध्यक्ष को बुलाया और उस से घोड़े के बारे में पूछा। तब उस व्यक्ति ने जवाब दिया,

“बादशाह सलामत यह घोड़ा नस्ली नहीं है।”

बादशाह ये सुन कर हैरान हुआ। उसने उस आदमी को बुलाया जी से वह घोड़ा लिया गया था। उसने बताया कि घोड़ा तो नस्ली है लेकिन जब यह पैदा हुआ था तो इसकी माँ मर गयी और इसका पालन-पोषण गाय का दूध पी कर हुआ है।

बादशाह ने तबेले के अध्यक्ष से पूछा कि उसे इस बात का पता कैसे चला? तब उसने जवाब दिया,

” यह घोड़ा जब घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे कर के ही खाता है। जबकि नस्ली घोड़े जब भी घास खाते हैं तो वो घास मुँह में दबा लेने के बाद सर उठा लेते है और फिर खाते हैं।”

बादशाह उसकी अक्लमंदी से बहुत खुश हुआ और इनाम के तौर पर उसके घर अनाज, घी और बहुत सी खाने की चीजें भिजवायीं। इतना ही नहीं उसे अपनी मल्लिका की देख-रेख के लिए महल में तैनात कर दिया।

फिर एक दिन बादशाह को उस व्यक्ति की याद आई और उसने उसे बुला कर अपनी बेगम के बारे में पूछा। तब उस व्यक्ति ने बताया,

“रहन-सहन तो मल्लिका जैसा है लेकिन शहज़ादी नहीं है।”

इतना सुन कर बादशाह के पैरों तले जमीन खिसक गयी। उसका सर चकरा गया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। वो हकीकत जानना चाहता था इसलिए उसने अपनी सास को बुलाने का हुक्म दिया।

अगले दिन उसकी सास बादशाह के पास पहुंची। तो बादशाह ने उसे सब कुछ बताया और सच बताने को कहा। तब सास सच बताने लगी,

” आपके पिता ने हमारी बेटी के जन्म लेने पर उसका हाथ आपके लिए मांग लिया था। लेकिन कुछ दिनों बाद हमारी बेटी मर गयी। आपकी बादशाहत से करीबी रिश्ते कायम रखने के लिए हमने किसी और की बेटी को गोद ले लिया और उसका निकाह आपसे करवा दिया।”

हकीकत जानने के बाद बादशाह ने उस व्यक्ति से पूछा कि तुमको इस बात का इल्म कैसे हुआ कि वो शहज़ादी नहीं है?

उस व्यक्ति ने कहा,

“बादशाह आपकी बेगम का नौकरों के साथ सलूक जाहिलों से भी बदतर है। कोई खानदानी आदमी इस तरह का बर्ताव नहीं करता।”

बादशाह फिर बहुत खुश हुआ और उसे इनाम के तौर पर खूब सारा अनाज और भेड़-बकरियां भेजीं। इसके साथ ही उसे अपना दरबारी बना लिया।

कुछ दिन फिर बीते तो बादशाह ने सोचा मैं इस आदमी से सब के बारे में पूछता हूँ क्यों न आज अपने बारे में ही पूछा जाए। जब बादशाह ने अपने बारे में पूछा तो उस व्यक्ति ने कहा,

“अगर आप मेरी जान बख्शें तो ही मैं बता पाउँगा।”

बादशाह ने उस व्यक्ति से वादा किया कि उसको कुछ नहीं कहा जायेगा। तब उसने बताया कि,

“न आप शहज़ादे हो न आपका चाल-चलन बादशाहों वाला है।”

इतना सुनते ही बादशाह को बहुत गुस्सा आया लेकिन उसने वादा किया था कि उसे कुछ नहीं कहा जायेगा। लेकिन इस बार फिर से हकीकत जानने के लिए उसने अपनी माँ को बुलवाया और उसे सच बताने को कहा।

उसकी माँ ने बताना शुरू किया,

“तुम हमारी औलाद नहीं हो। हमें एक चरवाहे से तुम्हें गोद लिया था।”

बादशाह ने उस व्यक्ति को बुलाया और एक बार फिर पूछा कि तुम्हें इस बात का इल्म कैसे हुआ? तब उस व्यक्ति ने बताया,

“जब भी कोई बादशाह किसी को इनाम देता तो है तो इनाम में हीरे-जवाहरात जैसी चीजें देता है। लेकिन आप खाने का सामान और भेड़-बकरियां देते हैं। ये सलूक किसी बादशाह का नहीं बल्कि चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है।”

इस ज्ञानवर्धक कहानी की तरह ही इन्सान के पास कितनी ही धन-दौलत क्यों न हो? उसकी कितनी ही शान-ओ-शौकत क्यों न हो। इन्सान की हरकतें और उसकी आदतें उसकी असलियत के बारे में बता ही देती हैं।

यदि आप चाहते हैं कि आपकी शख्सियत सबके सामने अच्छी बने तो अपनी आदतें बदलिए और सबके साथ सही ढंग से व्यव्हार कीजिये।

ज्ञानवर्धक कहानी आपको कैसी लगी हमें अपने विचार कमेंट बॉक्स के जरिये जरूर बताएं।

धन्यवाद।

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Sandeep Kumar Singh

Sandeep Kumar Singh

ये कविताएं, शायरियां और कुछ विचार मेरी खुद की रचनाएं हैं। कुछ नकलची बंदरों ने इन्हें चुरा कर अपने ब्लॉग पर डाल लिया है। असली रचनाएं यहीं हैं। आशा करता हूँ कि यदि आप ये रचनाएं कहीं शेयर करते हैं तो हमारे ब्लॉग का लिंक साथ मे जरूर दें। मैं एक अध्यापक हूँ और अपने इस ब्लॉग क लिए खुद ही लिखता हूँ। धन्यवाद।

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